Sunday, 8 January 2017

लखनऊ के कवि विशाल अग्रवाल अग्रवंशी के करीना-सैफ के नवजात बेटे 'तैमूर अली पटौदी' को केन्द्र में रखकर दो मुक्तक

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Atul Kumar Agarwal'  facebook 
लखनऊ के कवि विशाल अग्रवाल अग्रवंशी के करीना-सैफ के नवजात बेटे 'तैमूर अली पटौदी' को केन्द्र में रखकर दो मुक्तक 
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हज़ारों शेर चीतों में तुम्हें लंगूर भाया है।
अहिंसा, शान्तिवाले देश में वो क्रूर भाया है।
जहाँ इतिहास है अब्दुल हमीदों औ' कलामों का
तुम्हें उस देश में केवल वही 'तैमूर'भाया है।।

बिठाया सर पे तुमको देश की कुछ नाक रख लेते।
है ताल्लुक जिस घराने से उसी की साख रख लेते।
मेरा है मश्वरा तुमको कोई कुछ कह नहीं पाता,
जहाँ 'तैमूर' रखा था वहाँ 'अशफ़ाक़' रख लेते।।

इसी पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए जयपुर के कवि गोविन्द चारण ने भी एक महत्त्वपूर्ण सुझाव दिया-
अपने लबों पे' अगर तुम ऐसा पैगाम रख लेते।
चाहनेवालों के लिए ख़ुशी का ये जाम रख लेते।
वैसे तो छूट है मेरे देश में ऐसे श्वान पालने की भी,
पर मान होता गर तैमूर की जगह कलाम रख लेते।।

मैं उपर्युक्त मुक्तकों को पढ़ ही रहा था कि लखनऊ से ही अंग्रेजी के विद्वान् प्रोफ़ेसर और ख्यातिलब्ध पत्रकार डॉ. शक्तिकुमार पाण्डेय ( DrShakti KumarPandey ) की पोस्ट पर दृष्टि पड़ी-
सभी के घर में ग़ालिब, मीर से दिल चाक़ नहीं होते।
अब्दुल-सा ज़माने में सभी जन पाक़ नहीं होते।
तुम्हें तैमूर-सा क़ातिल पसन्द आया है क्योंकि,
नवाबों की रखैलों से कभी अशफ़ाक नहीं होते।।

व्यञ्जना और प्रतीयमान गुण के कारण चारों मुक्तक अपनी अपनी तरह से भारतीय राष्ट्रीयता का शंखनाद करते हैं। तीनों रचनाकारों को बहुत बहुत धन्यवाद।