Saturday, 17 September 2016

Hindi Jokes and raseele chutkule


संता पुलिस स्टेशन आया-मुझे अर्रेस्ट कर लो,मैंने अपनी पत्नी के सर पर डंडा मारा है.
पुलिस-क्या वो मर गई
संता-नहीं वो तो बच गई,अब मेरी खैर नहीं
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 एक औरत अपनी कुछ परेशानियों को लेकर एक बाबा के पास पहुँची। बाबा ने सारी परेशानियों को बड़े गौर से सुना। फिर बोले बेटा, इसका हल हो जायेगा सब ठीक हो जायेगा। लेकिन इसके लिए कुछ खर्च आयेगा।*
*औरत:- कितना खर्च आयेगा?*
*बाबा:- तुमसे मैं ज्यादा तो नहीं ले सकता ......  पुराणों के अनुसार हमारे कुल ३३ करोड़ देवी देवता हैं  सबके नाम से एक-एक पैसा दान कर दो।*
(औरत ने मन ही मन कैलकुलेट किया तो बाबा के हिसाब से कुल खर्च ३३ लाख रुपए)
औरत भी चालाक थी।
*_उसने कहा ठीक है बाबा आप बारी बारी से सबका नाम लेते जाईये मैं एक-एक पैसा रखते जाऊँगी।_*
*बाबा अभी भी बेहोश हैं.......
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.  पल्स पोलिओ टीम घर आयी...
संता बीबी से...बंदूक और कारतुस कहाँ हैं...??
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टीम भागी,
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पीछे से संता ने आवाज दी,
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रुको
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ओये रुको
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ये हमारे बच्चो के नाम हैं.!!
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.. आने वाले समय में *विजय माल्या* के जन्मदिन को
" *कर्जा एकादशी* " के रूप में मनाया जा सकता है।
*-State Bank of India*
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. तुम आँखो की पलकों सी हो गई हो ..
के मिले बिना सुकून ही नही आता....




.कबीर की अन्धविश्वास, पाखंड, भेदभाव, जा
तिप्रथा, हिन्दू, मुस्लिम पर करारी चोट !!

” जो तूं ब्रह्मण , ब्राह्मणी का जाया !
आन बाट काहे नहीं आया !! ”
– कबीर
(अर्थ- अपने आप को ब्राह्मण होने पर गर्व करने वाले ज़रा यह तो बताओ की जो तुम अपने आप की महान कहते तो फिर तुम किसी अन्य रास्ते से जाँ तरीके से पैदा क्यों नहीं हुआ ? जिस रास्ते से हम सब पैदा हुए हैं, तुम भी उसी रास्ते से ही क्यों पैदा हुए। )
 “लाडू लावन लापसी ,पूजा चढ़े अपार
पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुह छार !!”
”पाथर पूजे हरी मिले,
तो मै पूजू पहाड़ !
घर की चक्की कोई न पूजे,
जाको पीस खाए संसार !!”
– कबीर
”मुंड मुड़या हरि मिलें ,सब कोई लेई मुड़ाय |
बार -बार के मुड़ते ,भेंड़ा न बैकुण्ठ जाय ||”
– कबीर
”माटी का एक नाग बनाके,
पुजे लोग लुगाया !
जिंदा नाग जब घर मे निकले,
ले लाठी धमकाया !!”
– कबीर
” जिंदा बाप कोई न पुजे, मरे बाद पुजवाये !
मुठ्ठी भर चावल लेके, कौवे को बाप बनाय !!
– कबीर
”हमने देखा एक अजूबा ,मुर्दा रोटी खाए ,
समझाने से समझत नहीं ,लात पड़े चिल्लाये !!”
– कबीर
”कांकर पाथर जोरि के ,मस्जिद लई चुनाय |
ता उपर मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय ||”
– कबीर
”हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।”
– कबीर
”जाति ना पूछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान !
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान !!
– कबीर
”काहे को कीजै पांडे छूत विचार।
छूत ही ते उपजा सब संसार ।।
हमरे कैसे लोहू तुम्हारे कैसे दूध।
तुम कैसे बाह्मन पांडे, हम कैसे सूद।”
– कबीर
”कबीरा कुंआ एक हैं,
पानी भरैं अनेक ।
बर्तन में ही भेद है,
पानी सबमें एक ॥”
– कबीर
”एक क्ष ,एकै मल मुतर,
एक चाम ,एक गुदा ।
एक जोती से सब उतपना,
कौन बामन कौन शूद ”
– कबीर
”जैसे तिल में तेल है,
ज्यों चकमक में आग I
तेरा साईं तुझमें है ,
तू जाग सके तो जाग II ”
– कबीर
मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे ,
मैं तो तेरे पास में।
ना मैं तीरथ में, ना मैं मुरत में,
ना एकांत निवास में ।
ना मंदिर में, ना मस्जिद में,
ना काबे, ना कैलाश में।।
ना मैं जप में, ना मैं तप में,
ना बरत ना उपवास में ।।।
ना मैं क्रिया करम में,
ना मैं जोग सन्यास में।।
खोजी हो तो तुरंत मिल जाऊ,
इक पल की तलाश में ।।
कहत कबीर सुनो भई साधू,
मैं तो तेरे पास में बन्दे…
मैं तो तेरे पास में…..
– कबीर
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जीवन में गुरू का महत्व व आवश्यकता..!!
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"एक बार किसी ने गुरु जी से पूछा- गुरु जी कुछ लोग कहते हैं,
कि जीवन एक संघर्ष है..!!
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कुछ अन्य कहते हैं,
कि जीवन एक खेल है..!!
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और कुछ लोग,
जीवन को एक उत्सव की संज्ञा देते हैं..!!
इनमें कौन सही है ?
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"गुरु जी ने तत्काल बड़े ही धैर्यपूर्वक शिष्य को उत्तर दिया- पुत्र जिन्हें गुरु नहीं मिला,
उनके लिए जीवन एक संघर्ष है..!!
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जिन्हें गुरु मिल गया,
उनका जीवन एक खेल है..!!
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और जो लोग गुरु द्वारा बताये गए मार्ग पर चलने लगते हैं,
मात्र वे ही जीवन को एक उत्सव का नाम देने का साहस जुटा पाते हैं..!!
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!!...जिसके जीवन में गुरु नहीं..!!
!!....उसका जीवन शुरू नहीं....!!
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   Hi all,
no hard feelings. But due to some issues, I'm  leaving this group. I  just feel that I don't belong here. The things said here are totally against  what I believe in. You all have my contact number and will be in my heart always.
Thanks for everything. I take good memories from here. Will try to meet whenever it's possible....










-Said a man when he was leaving an Alcohol Rehabilitation Group..
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Punjabi Classic
एक फ़क़ीर घर के बाहर आवाज़ लगा रहा था :-"कोई बाबा णु रोटी खवा दो "
"बाबा चावल वी खा लेन्दा "
"बाबा आइसक्रीम वी खा लेंदा"
"बाबा बर्गर वी खा लेंदा "
"बाबा सैंडविच वी खा लेंदा
"घर के अंदर से आवाज़ आई :-बाबा "जुत्तिया" वी खा लेंदा के नई?
बाबा :-ना पुत्तर ना, सख्त चीज दी मनाई है।। .
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अपना ग्रूप भी...
आँगन वाड़ी जैसा हो गया है...
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कुछ ही बच्चे पढ़ते-लिखते हैं...
बाकियों ने खाली...
दलिया के  लालच में...
रजिस्टर में नाम लिखवाया हुआ है...!!