Monday, 12 September 2016

Lucknow Jokes .......... आप कैसे पता करेंगें कि आप "लखनऊ" के किस मोहल्ले मे खड़े हैं।

आप कैसे पता करेंगें कि आप "लखनऊ" के किस मोहल्ले मे खड़े हैं।

1) दो आदमी लड़ रहे हैं, एक आदमी आता है, उन्हे सिर्फ देखता है और चला जाता है... ये "गोमती नगर" है.

3) दो आदमी लड़ रहे हैं, एक आदमी अपने घर से आवाज़ देता है, " मेरे घर के आगे मत लड़ो, कहींऔर जाओ".. ये "अलीगंज" है 

4) दो आदमी लड़ रहे हैं, पूरी भीड़ देखने के लिये इकट्ठी हो जाये, और कुछ आदमी वहीं पान की दुकान लगा दे.. तो ये "चौक" है.

5) दो आदमी लड़ रहे हैं, दोनो मोबाईल से कॉल कर दोस्तो को बुलाते हैं, थोड़ी देर में 50 आदमी लड़ रहे हैं. .ये "मौलवीगंज" है.

6) दो आदमी लड़ रहे हैं, चार आदमी बैठ कर पान खाते हुए कौन जीतेगा की शर्ते लगाने लगते हैं, ये "हजरतगंज " है.

7) दो आदमी लड़ रहे हैं, दो आदमी और आते हैं, वो आपस में बहस करने लगते हैं कि कौन सही है कौन गलत, देखते देखते भीड़ जमा हो जाती है, पूरी भीड़
बहस करती है,पर लड़ने वाले दोनो खिसक लेते हैं. ये "अमीनाबाद" है


8) दो आदमी लड़ रहे हैं, एक आदमी आता है, उन्हें समझाने की कोशिश करता है, फलस्वरुप दोनो लड़ना छोड़ कर समझाने वाले ही को मारने लग जाते हैं.. ये "निशातगंज" है 

9) दो आदमी लड़ रहे है, एक आदमी आता है, गन निकालता है और- ढिचकांव... 
और सब शांत !
यानि कि आप "नरही" पहुँच गए..
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लखनऊ मेट्रो शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है। ठेठ देसी up East अंदाज़ में एनाउंसमेंट्स कुछ इस प्रकार होंगें:

** भईया हाथ जोडि कै बिनती है कि दरवाजन ते हटि कै ठाड होएओ, नहीं तौ कूचे जहियौ।

** पीली लाइन के पीछेहे ठाड रहेओ।

** गाड़ी केर पहिल डिब्बा मेहेरियन खातिर है, ओहके भीतर जौउन चढ़ी ओहका कायदे मां हौंका जाई और जुर्मानौ हुई जाई।

** दरवज्जा दाईं तरफ़ खुलिहै। ओहके ऊपर हाथ धरि कै न ठाड़ हुई जाएओ सरऊ।

** गाडी मां मसाला, चाय, बीडी, पान सब बर्जित हैं। कौनो ई सब खात मिला तौ ओहका पेल दीन जाई।

** आगे आवै वाला स्टेसन आलमबाग है, हिंयाँ ते उत्तर प्रदेश बस सेवा के सिटी स्टेसन खातिर उतर लीन्हेओ और सरऊ कायदे मां उतरेओ नाहीं तौ आगे बडे-बड़े गड्ढा है, घुसमुडा जहिऔ ओहमां।

** बुजुर्ग चच्चा लोगन और मेहेरियन खातिर चुप्पे ते जगह दई दीन्हेओ वरना लपेटे मां आ जहियओ।


** गाडी मां च्वारन ते सावधान रहेओ। ससुर बहुत बढ़िगे हैं।
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लखनऊ की अदब भिखारी : 
जनाब खुदा आप को नेकी बक्शे, 
आप से एक खुसूसी इल्तिज़ा बाहे करम अर्ज है कि क्या जनाब ऐ-याली, इस दरवेश को 10 रुपए की इनायत फ़रमा दे, 
ज़रा चाय पिने की ख़ाहिश थी, 

खान साहब - मिया, पर चाय तो 5 रुपए में आती है ! 

भिखारी - तो क्या जनाब, आप नहीं नोश फरमाएंगे ?
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पूरे देश ने दिल्ली के कानून मंत्री और पुलिस अधिकारी की बहस देखी ... यही बहस अगर लखनऊ मे हुई होती तो कुछ इस तरह होती :- 

मंत्री जी : देखिए अगर आप हमारी बात नहीं मानेगें तो हम आपकी वालिदा मोहतरमा की शान में गुस्ताख़ना कलिमात पेश कर देंगे। 

पुलिस अधिकारी : हज़ूर फ़िर हम भी आपके रुखसार मुबारक पे ऐसा तमाचा रसीद करेंगे कि गाल-ए-मुबारक गुलाब की मानिंद चमक उठेगा।


यह है 'तहज़ीब-ए-लखनऊ'।



आदाब अर्ज़ है |