Sunday, 14 February 2016

UP वाले का लव लेटर...

UP वाले का लव लेटर...


मेरी प्यारी पिंकी....
वेलेंटाइन बाबा के कसम!!!

इ लभ लेटर मैं सरसों के खेत से नहीं तुम्हारे मुहब्बत के टावर पर चढ़कर लिख रहा हूँ...
डीह बाबा अऊर काली माई दुनो के कसम...
आज तीन दिन से मोबाइल में टावरे नहीं पकड़ रहा था..
खीसियाना मत... मोहब्बत के दुश्मन खाली हमारे तुम्हारे बाउजी नहीं यूनिनार आ एयरसेल वालें भी हैं..
जब फोनवा नहीं मिलता है न रतिया को तो मनवा करता है कि सड़की पर दउड़ दउड़ कर जान दे दें...

अरे इन सबको आशिक़ों के दुःख का क्या पता रे?
हम चार किलो चावल बेच के नाइट फ्री वाला पैक डलवाये थे...लेकिन हाय रे वेलेंटाइन.. रोज डे निकस गया प्रपोज डे बीत गया आज टेडी डे चला गया..हम तुमको हलो भी नहीं कह पाये।
कभी कभी तो मन तो करता है की चार काठा खेत बेचकर एक दुआर पर टावर लगवा लें..आ रात भर तुमसे इलू इलू करें।
जानती हो आज रहले नही जा रहा था एकदम..
मनवा एतना लभेरिया गया है कि एकदम बेचैनी लेस दिया था...इधर बाऊजी अलगे परसान किये हैं...माई अलगे नोकरी करने के लिए खिसिया रही है....कल आलू में दवाई छिड़कना है.. मटर में पानी चलाना है..
सांझी को गेंहू पीसवाना है नाही तो माई बेलना से मारके सब बेलनटाइन निकास देगी...
फेर चना के खेत घूमना है.


तुमको पता है जब जब सरसो का खेत देखता हूँ न तब तब तुम्हारी बहुते याद आती है..
लगता है तुम हंसते हुए दौड़कर मेरे पास आ रही हो....मन करता है ये सरसों का फूल तोड़कर तुम्हारे जूड़े में लगा दें आ जोर से कहें..."आई लभ यू पिंकी"...


अरे अब गरीब लड़के कहाँ से सौ रुपया का गुलाब खरीदेंगे?....जानती हो हवा एकदम फगुनहटा बह रही है... तुम तो घर से निकलती नहीं हो....यहाँ मटर,चना जौ के पत्ते सरसरा रहे हैं...रहर और लेतरी आपस में बतिया रहे हैं.....मन करता है खेत में ही तुम्हारा दुपट्टा बिछाकर सो जाएं आ सीधे होली के बिहाने उठें...

बाकी तुम्हारे उस बाउजी के अमरिस पुरिया जइसन फेस देखकर ऐसा लगता है जैसे सरसो के खेत में साँड़ घुस आया हो..मनवे बीजूक जाता है।
अच्छा छोड़ो..उस दिन जब बबीतवा के बियाह में तुम आई थी न..हम देखे थे..तुम केतना खुश थी...करिया सूट में एकदम गुलाब जामुन जैसा लग रही थी...तुमको पता है तुमको देखकर हम दुइ घण्टा नागिन डांस किये थे।
ए पिंकी अच्छे से रहना..अब तुम्हारा 18 से परीक्षा भी है....नीमन से पढ़ना..बाकी हम खिड़की पर खड़े होकर नकल करवाने के लिये ज़िंदा हैं न....चिंता मत करना ..बस काका आ विद्या का गाइड खरीद लेना....
इ खाली तुम्हारे इंटर का परीक्षा नहीं मेरे इश्क का इम्तेहान भी है।

अकलेस भाई आ मोलायम सिंग के कसम कवन उड़ाका दल रोक लेगा रे नकल करने से।

बाकी सब ठीके है...रात दिन तुम्हारी याद आती है.पागल का हाल हो गया है.....रहा नहीं जा रहा..
अब खेती का काम करके हमहू जल्दी से दौड़ निकालेंगे ...तेरह को बनारस में भरती है...देखो बरम बाबा का आशीर्वाद रहा तो मलेटरी में भरती होकर तुमसे जल्दी बियाह करेंगे...

हम नहीं चाहते की तुम्हारा बियाह किसी बीटेक्स वाले से हो जाए और हमको तुम्हारे बियाह में रो रोकर पूड़ी पत्तल गिलास चलाना पड़े...
आई लभ यू रे पिंकी। कल दू बजे मातादीन हलवाई के किनारे वाले टिबुल पर आ जाना..बड़ा मन कर रहा है तुमसे मिलने का।
आई मिस यू..

एगो गाना याद किया तुम्हरे खातिर..

ए हो ब्यूटी के खजाना
बाड़ू लभ लेटर के पाना

मनवा लागे नाहीं
जबसे दीदार भइल बा
ए जान हो....
तोहरा से प्यार भइल बा।।
तोहरा से प्यार भइल बा।।

तुम्हारे पियार में हमेशा से पागल
तोहार मंटुआ















मंदी के हालात में एक बिचारे पति की लिखी हुई एक कविता.... ......

 मंदी के हालात में एक बिचारे पति की लिखी हुई एक कविता.... ......

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प्रिय क्यूँ तुम नित नए-नए सूट सिलाती हो !
पुरानी साडी में भी तुम अप्सरा ही नजर आती हो !!!
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इन ब्यूटी पार्लरों के चक्करों में ना पडा करो !
अपने चांद से चेहरे को क्रीम पाउडर से यूँ ना ढका करो !!!
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रेस्टोरेंट, होटल व बाहर के खाने में क्या रखा है !
तुम्हारे हाथों से बना बैंगन का भर्ता, इनसे लाख गुना अच्छा है !!
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इन पहाड़ों के सैर सपाटों में है वो बात कहाँ !
तुम्हारे मायके जैसा इनमे वो ऐशो-आराम कहाँ !!!
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नौकरों से खिटपिट में, मत सेहत तुम अपनी खराब करो !
झाडू-पौछा लगा और कपड़े धो हल्का सा व्यायाम करो !!!
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सोने-चांदी में मिलती, अब सौ सौ खोट है !
तुम्हारी सुन्दरता ही 24 कैरेट प्योर गोल्ड है !!!
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कार कार मत कर पगली, कार प्रदूषण बढाती है,
सबसे अच्छी मेट्रो अपनी, जल्दी से पहुंचाती है !!!
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सिनेमा देखना ठीक नही, स्वाइन फ्लू का खतरा है,
एकता कपूर का सीरियल देखो, वही साफ-सुथरा है !!!
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माया-माया मत किया कर पगली, यह तो महा ठगिनी है !
मेरे इस घर-आंगन की तो, तू ही असली धन लक्ष्मी है !!!
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 "माँ" और "बीवी" में एक फर्क ये है की....
माँ बेटे के रग रग को पहचानती है..
और
बीवी केवल दुखती रग को.. 

Punishment for pharma doctor relationship notified Medical Council of India Notification

Punishment for pharma doctor relationship notified  Medical Council of India Notification


 New Delhi, the 28th January, 2016 No.  MCI-211(1)/2010(Ethics)/163013.—  In exercise of the powers conferred by Section 33 of the Indian Medical Council Act, 1956 (102 of 1956), the Medical Council of India with the previous sanction of the Central Government, hereby makes the following Regulations to amend the "Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002:—

 1. (i) These Regulations may be called the "Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) (Amendment) Regulations, 2015."

    (ii) They shall come into force from the date of their publication in the Official Gazette.
 2. In the "Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002", the following additions/modification/deletions/substitutions, shall be, as indicated therein:-

 3. (i) The title of Section 6.8, as amended vide notification dated 10/12/2009, shall be further amended by deleting the words "and professional association of doctors" as under:-
 "6.8 Code of Conduct for doctors in their relationship with pharmaceutical and allied health sector industry"
(ii) Section 6.8.1. (b), as amended vide notification dated 10/12/2009, shall be substituted as under:—
 (b) Travel Facilities : A medical practitioner shall not accept any travel Facility inside the country or outside, including rail, road, air, ship, cruise tickets, paid vacation, etc. from any pharmaceutical or allied healthcare industry or their representatives for self and family members for vacation or for attending conferences, seminars, workshops, CME Programme, etc. as a delegate.
 (iii) Action to be taken by the Council for violation of Section 6.8, as amended vide notification dated 10/12/2009, shall be prescribed by further amending the Section 6.8.1 as under:—

6.8.1 In dealing with Pharmaceutical and allied health sector industry, a medical practitioner shall follow and adhere to the stipulations given below:-
a) Gifts: A medical practitioner shall not receive any gift from any pharmaceutical or allied healthcare industry and their sales people or representatives.
Action: Gifts more than Rs. 1,000/- up to Rs. 5,000/- : Censure
Gifts more than Rs. 5,000/- up to Rs. 10,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 3 (three) months.
Gifts more than Rs. 10,000/- to Rs. 50,000/- : Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 6(six) months.
Gifts more than Rs. 50,000/- to Rs. 1, 00,000/- : Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 1 (one) year.
Gifts more than Rs. 1, 00,000/-: Removal for a period of more than 1 (one) year from Indian
Medical Register or State Medical Register.


b) Travel facilities: A medical practitioner shall not accept any travel facility inside the country or outside, including rail, road, air, ship, cruise tickets, paid vacations etc. from any pharmaceutical or allied healthcare industry or their representatives for self and family members for vacation or for attending conferences, seminars, workshops, CME programme etc. as a delegate.
 

Action: Expenses for travel facilities more than Rs. 1,000/- up to Rs. 5,000/-: Censure
Expenses for travel facilities more than Rs. 5,000/- up to Rs. 10,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 3 (three) months.
Expenses for travel facilities more than Rs. 10,000/- to Rs. 50,000/-: Removal from Indian Medical Register or State medical Register for 6 (six) months.
Expenses for travel facilities more than Rs. 50,000/- to Rs. 1, 00,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 1 (one) year.
Expenses for travel facilities more than Rs. 1, 00,000/-: Removal for a period of more than 1 (one) year from Indian Medical Register or State Medical Register.

c) Hospitality: A medical practitioner shall not accept individually any hospitality like hotel accommodation for self and family members under any pretext.

Action: Expenses for Hospitality more than Rs. 1,000/- up to Rs. 5,000/-: Censure
Expenses for Hospitality more than Rs. 5,000/- up to Rs. 10,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 3 (three) months.
Expenses for Hospitality more than Rs. 10,000/- to Rs. 50,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 6 (six) months.
Expenses for Hospitality more than more than Rs. 50,000/- to Rs. 1, 00,000/: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 1 (one) year.
Expenses for Hospitality more than Rs. 1, 00,000/-: Removal for a period of more than 1 (one) year from Indian Medical Register or State Medical Register.

d) Cash or monetary grants: A medical practitioner shall not receive any cash or monetary grants from any pharmaceutical and allied healthcare industry for individual purpose in individual capacity under any pretext. Funding for medical research, study etc. can only be received through approved institutions by modalities laid down by law/rules/guidelines adopted by such approved institutions, in a transparent manner. It shall always be fully disclosed.

Action: Cash or monetary grants more than Rs. 1,000/- up to Rs. 5,000/-: Censure
Cash or monetary grants more than Rs. 5,000/- up to Rs. 10,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 3 (three) months.
Cash or monetary grants more than Rs. 10,000/- to Rs. 50,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 6 (six) months.
Cash or monetary grants more than Rs. 50,000/- to Rs. 1, 00,000/-: Removal from Indian Medical Register or State Medical Register for 1 (one) year.
Cash or monetary grants more than Rs. 1, 00,000/-: Removal for a period of more than 1 (one) year from Indian Medical Register or State Medical Register.

e) Medical Research: A medical practitioner may carry out, participate in, work in research projects funded by pharmaceutical and allied healthcare industries. A medical practitioner is obliged to know that the fulfilment of the following items (i) to (vii) will be an imperative for undertaking any research assignment/ project funded by industry–for being proper and ethical. Thus, in accepting such a position a medical practitioner shall :-
(i) Ensure that the particular research proposal(s) has the due permission from the competent concerned authorities.
(ii) Ensure that such a research project(s) has the clearance of national/state/institutional ethics committees/bodies.
(iii) Ensure that it fulfils all the legal requirements prescribed for medical research.
(iv) Ensure that the source and amount of funding is publicly disclosed at the beginning itself.
(v) Ensure that proper care and facilities are provided to human volunteers, if they are necessary for the research project(s).
(vi) Ensure that undue animal experimentations are not done and when these are necessary they are done in a scientific and a humane way.
(vii) Ensure that while accepting such an assignment a medical practitioner shall have the freedom to publish the results of the research in the greater interest of the society by inserting such a clause in the MoU or any other documents/agreement for any such assignment.

Action: First time censure, and thereafter removal of name from Indian Medical Register or State Medical Register for a period depending upon the violation of the clause.

f) Maintaining Professional Autonomy: In dealing with pharmaceutical and allied healthcare industry a medical practitioner shall always ensure that there shall never be any compromise either with his/her own professional autonomy and/or with the autonomy and freedom of the medical institution.

Action: First time censure, and thereafter removal of name from Indian Medical Register or State Medical Register.



g) Affiliation: A medical practitioner may work for pharmaceutical and allied healthcare industries in advisory capacities, as consultants, as researchers, as treating doctors or in any other professional capacity. In doing so,

a medical practitioner shall always:—
i. Ensure that his professional integrity and freedom are maintained.
ii. Ensure that patients interest are not compromised in any way.
iii. Ensure that such affiliations are within the law.
iv. Ensure that such affiliations/employments are fully transparent and disclosed.
Action: First time censure, and thereafter removal of name from Indian Medical Register or State Medical Register for a period depending upon the violation of the clause.

h) Endorsement: A medical practitioner shall not endorse any drug or product of the industry publically. Any study conducted on the efficacy or otherwise of such products shall be presented to and/or through appropriate scientific bodies or published in appropriate scientific journals in a proper way.

Action: First time censure, and thereafter removal of name from Indian Medical Register or State Medical Register. 
Dr. Reena Nayyar, Secy. I/c.
(ADVT.-III/4/Exty./100/347)
 Foot Note : The Principal Regulations namely, "Indian Medical Council (Professional Conduct, Etiquette and Ethics) Regulations, 2002" were published in Part – III, Section (4) of the Gazette of India on the 6th April, 2002, and amended vide MCI notification dated 22/02/2003, 26/05/2004 & 10/12/2009