Tuesday, 12 July 2016

हिंदी व्यंग कविता , हिंदी चुटकुले

हिंदी व्यंग कविता , हिंदी चुटकुले 

मिर्ज़ा ग़ालिब कमरतोड़ महगाई और गरीबी से तंग आकर
डाकू बन गए और डकैती करने एक बैंक गए.... 
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बैंक में घुसते ही हवाई फायर करते हुए " अर्ज़ किया -
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"तक़दीर में जो है वही मिलेगा,
हैंड्स-अप कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा...!!
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ग़ालिब ने फिर ऊँची आवाज में अर्ज किया -
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"बहुत कोशिश करता हूँ उसकी यादों को भुलाने की,
ध्यान रहे कोई कोशिश न करना पुलिस बुलाने की..."
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फिर कैशियर की कनपटी में बंदूक रखते हुए से कहा-
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"ए खुदा तूं कुछ ख्वाब मेरी आँखों से निकाल दे,
जो कुछ भी है, जल्दी से इस बैग में डाल दे..."
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कैश लेने के बाद ग़ालिब ने लाकर की तरफ इशारा करके कैशियर से कहा -
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 समझने वाला इश्क क्या सम्हालेगा
लाकर का पैसा क्या तेरा अब्बू बाहर निकलेगा .."
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जाते जाते एक और हवाई फायर करते अर्ज किया -
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"भुला दे मुझको क्या जाता है तेरा,
मार दूँगा गोली जो किसी ने पीछा किया मेरा..."

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