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Sunday, 14 February 2016

मंदी के हालात में एक बिचारे पति की लिखी हुई एक कविता.... ......

 मंदी के हालात में एक बिचारे पति की लिखी हुई एक कविता.... ......

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प्रिय क्यूँ तुम नित नए-नए सूट सिलाती हो !
पुरानी साडी में भी तुम अप्सरा ही नजर आती हो !!!
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इन ब्यूटी पार्लरों के चक्करों में ना पडा करो !
अपने चांद से चेहरे को क्रीम पाउडर से यूँ ना ढका करो !!!
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रेस्टोरेंट, होटल व बाहर के खाने में क्या रखा है !
तुम्हारे हाथों से बना बैंगन का भर्ता, इनसे लाख गुना अच्छा है !!
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इन पहाड़ों के सैर सपाटों में है वो बात कहाँ !
तुम्हारे मायके जैसा इनमे वो ऐशो-आराम कहाँ !!!
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नौकरों से खिटपिट में, मत सेहत तुम अपनी खराब करो !
झाडू-पौछा लगा और कपड़े धो हल्का सा व्यायाम करो !!!
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सोने-चांदी में मिलती, अब सौ सौ खोट है !
तुम्हारी सुन्दरता ही 24 कैरेट प्योर गोल्ड है !!!
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कार कार मत कर पगली, कार प्रदूषण बढाती है,
सबसे अच्छी मेट्रो अपनी, जल्दी से पहुंचाती है !!!
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सिनेमा देखना ठीक नही, स्वाइन फ्लू का खतरा है,
एकता कपूर का सीरियल देखो, वही साफ-सुथरा है !!!
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माया-माया मत किया कर पगली, यह तो महा ठगिनी है !
मेरे इस घर-आंगन की तो, तू ही असली धन लक्ष्मी है !!!
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 "माँ" और "बीवी" में एक फर्क ये है की....
माँ बेटे के रग रग को पहचानती है..
और
बीवी केवल दुखती रग को.. 

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