Wednesday, 10 February 2016

हाँ हमको मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत है अपने मोटापेसे हमको मोहब्बत है।

मैं और मेरा मोटापा अक्सर ये बातें करते हैं
तुम न होते तो कैसा होता

मैं साइज़ ज़ीरो कहलाता, मैं टूथपिक जैसे दिखता
मैं आइसक्रीम देखकर हैरान होता
मैं मोटों को देखकर कितना हसता
तुम न होते तो ऐसा होता, तुम न होते तो वैसा होता
मैं और मेरा मोटापा अक्सर ये बातें करते हैं


ये रबड़ी है या चाँदनी ज़मीन पर उतरी हुई है
है गुलाबजामुन या पेट को खेलने के लिए गोलियाँ मिली है
ये पास्ता है या मेरी रसना की चाहत
पिझ्झा है या चाँद का दर्शन

हवा का झोंका है, या भजीयों के तलने की महक
यह आलू वेफर्स की है सरसराहट, की तुमने चुपके से कुछ कहा है
यह सोचता हूँ मैं कबसे गुमसुम
जबकी मुझको भी यह खबर है
की तुम यहीं हो, यहीं कहीं हो
मगर यह दिल है की कह रहा है
की तुम नहीं हो, यहाँ नहीं हो।



मजबूर यह हालत मन में भी है तन में भी
डाएटिंग की एक रात इधर भी है उधर भी
करने को बहुत कुछ है मगर कैसे करें हम
कब तक यूहीं भूखे और वर्कआउट करते रहे हम
दिल कहता है दुनिया की हर एक मीठी चीज़ चख ले
दीवार जो हम दोनों में है आज गिरा दें
क्यूँ दिल में सुलगते रहें, लोगो को बता दें
हाँ हमको मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत है
अपने मोटापेसे हमको मोहब्बत है।

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