Monday, 4 January 2016

एक नवयुवती छज्जे पर बैठी है, वह उदास है .......................

प्रसंग है
एक नवयुवती छज्जे पर बैठी है, 
वह उदास है, उसकी मुख मुद्रा देखकर लग रहा है कि जैसे वह छत से कूदकर आत्महत्या करने वाली है। 
विभिन्न कवियों से अगर इस पर लिखने को कहा जाता तो वो कैसे लिखते :


गुलजार....



वो बरसों पुरानी ईमारत
शायद
आज कुछ गुफ्तगू करना चाहती थी
कई सदियों से उसकी छत से
कोई कूदा नहीं था.
और आज
उस तंग हालात
परेशां
स्याह आँखों वाली
उस
लड़की ने
ईमारत के सफ़े
जैसे खोल ही दिए
आज फिर कुछ बात होगी
सुना है ईमारत खुश बहुत है...।



हरिवंश राय बच्चन...



किस उलझन से क्षुब्ध आज
निश्चय यह तुमने कर डाला
घर चौखट को छोड़ त्याग
चड़ बैढीं तुम चौथा माला
अभी समय है, जीवन सुरभित
पान करो इस का बाला
ऐसे कूद के मरने पर तो
नहीं मिलेगी मधुशाला 



रहीम...



रहिमन कभउँ न फांदिये छत ऊपर दीवार
हल छूटे जो जन गिरें फूटै और कपार 



तुलसी...



छत चढ़ नारी उदासी कोप व्रत धारी
कूद ना जा री दुखारी
सैन्य समेत अबहिन आवत होइहैं रघुरारी 



कबीर....



कबीरा देखि दुःख आपने कूदिंह छत से नार
तापे संकट ना कटे , खुले नरक का द्वार'' 



मैथिली शरण गुप्त-



अट्टालिका पर एक रमिणी अनमनी सी है अहो
किस वेदना के भार से संतप्त हो देवी कहो?
धीरज धरो संसार में, किसके नही है दुर्दिन फिरे
हे राम! रक्षा कीजिए, अबला ना भूतल पर गिरे।



श्याम नारायण पांडे-



ओ घमंड मंडिनी, अखंड खंड मंडिनी
वीरता विमंडिनी, प्रचंड चंड चंडिनी
सिंहनी की ठान से, आन बान शान से
मान से, गुमान से, तुम गिरो मकान से
तुम डगर डगर गिरो, तुम नगर नगर गिरो
तुम गिरो अगर गिरो, शत्रु पर मगर गिरो।



हन्नी सिंह....



कूद जा डार्लिंग क्या रखा है
जिंजर चाय बनाने में
यो यो की तो सीडी बज री
डिस्को में हरयाणे में
छत से नीचे आजा गोरी,
या भेजूं तुझको थाने में
आजा रॉक एंड रोल करेंगे,
हनी सिंह के गाने पे।

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और अगर डा. सलिल Agra होते तो ऐसे लिखते


ओ संगनी 
तू कहाँ जा के बैठी है अटारी पर,
तुझे क्यूँ नहीं लगता है मरने से डर,
अगर गिर गई ओ मेरी जाने जिगर,
मेरा क्या है ढूँढ लूँगा दूसरी दिलबर,
पर तुझको न मिलेगा मेरे जैसा वर,


















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