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Saturday, 7 November 2015

मजेदार गुदगुदाते हिंदी चुटकुले तथा जोक्स

मजेदार गुदगुदाते हिंदी चुटकुले तथा जोक्स 




1: 
बंता: ऐसा क्या काम है जो रावण कर सकता है राम नहीं?
संता: मुझे नहीं पता!
बंता: सामूहिक चर्चा!
2:
संता: यार बंता तेरी कमीज में यह गाँठ कैसे बंधी है?
बंता: मेरी पत्नी ने लगाई है! ताकि पत्र पोस्ट करने के लिये यादगार बनी
रहे!
संता: तो तुमने पत्र पोस्ट कर दिया होगा!
बंता: नहीं यार, मेरी पत्नी वह पत्र मुझे देना ही भूल गयी!
3:
संता: तुमको सन्नी देओल का फ़ोन नंबर पता है?
बंता: नहीं! पर तुम क्यों पूछ रहे हो?
संता: यार नलका उखड़वाना था
4:
बंता: यार हिंदी भी अजीब भाषा है!
संता: वोह कैसे?
बंता: घडी ख़राब हो तो कहते है “बंद है” और लड़की ख़राब हो तो कहते है ”
चालू है”
5:
संता फ़ोन पर बात कर रहा था!
बंता: किस से बात कर रहो हो!
संता: बीवी से!
बंता: इतने प्यार से?
संता: तुम्हारी है!…..
6:
प्रेमिका: अगर तुम मेरे होंठ चूमने की कोशिश करोगे तो मैं चिल्ला पडूँगी!
प्रेमी: कैसे चिल्लाओगी? तुम्हारे होंठ तो मेरे होंठों में होंगें!
7:
एक सूनसान जगह पर गाड़ी रोक कर प्रेमी प्रेमिका से!
प्रेमी: अगर मैं अब तुम्हारे साथ मुंह काला करने लगूं! तो तुम सहायता के
लिये शोर तो नहीं करोगी?
प्रेमिका: अगर तुम मुंह काला न कर सके! तो तुम्हारा मुंह काला करने के
लिये जरुर शोर करुँगी!
8:
एक बार 3 फलों में आपस में बातचीत होती है!
सेब: मुझे तो सब धो कर और काट कर खाते है!
अमरुद: तुझे क्या मुझे भी सब धो कर और काट कर खाते है!
सेब चुपचाप बैठे केले से कहता है: तुम क्यों चुप हो?
केला: मैं क्या कहूँ मुझे तो बताते हुए भी शर्म आती है मुझे तो सब लोग
नंगा करके खाते है!
9:
डॉक्टर: मंत्री जी आपकी पत्नी माँ बनने वाली है!
मंत्री सोच में पड़ गया!
डॉक्टर: क्या हुआ सर?
मंत्री: समझ नहीं आ रहा! यह जाली वोट कौन डाल गया!
10:
एक फ़कीर ने आवाज़ लगाई : अल्लाह के नाम पर कुछ दे दो!
घर के अन्दर से जवाब मिला : बाबाजी, मम्मी घर में नहीं है!
फ़कीर बोला : मैं खाना मांग रहा हूँ मम्मी को नहीं!
11:
माँ: नालायक कहां थी इतनी रात तक?
बेटी: अपने प्रेमी के साथ थी!
माँ: कर आयी न अपना मूह काला!
बेटी: तो क्या हुआ फेयर एंड लवली है न!
12:अध्यापक: लाइट कहा से आती है?
संता: मेरे मामा जी के घर से!
अध्यापक: वो कैसे?
संता: जब भी लाइट चली जाती है तो पापा कहते है सालो ने फिर कट लगा दिया!
13:
अध्यापक : तुम बड़े गंदे रहते हो, गन्दगी मनुष्य के स्वास्थ्य का कट्टर
शत्रु है !
विद्यार्थी : पर आपने ही तो कहा था कि शत्रुओं से प्रेम करो !
14 :
शादी के दो दिन बाद बेटी माँ से,
बेटी : माँ रात मेरी उनसे लड़ाई हो गई !
माँ : बेटी शादीशुदा ज़िन्दगी में छोटे-मोटे झगड़े तो चलते रहते हैं !
बेटी : सो तो ठीक है पर तुम मुझे बताओ मैं लाश का क्या करूँ ?
15 :
एक महिला दूधवाले से-
महिला: भईया आजकल दूध बहुत पतला आ रहा है!
दूधवाला: आप यह सब मुझे क्यों बता रही हैं! किसी अच्छे से डॉक्टर को
बताओ!
16 :
लड़का शादी के लिए लड़की देखने गया!
लड़का: मैं आप पर कैसे विश्वास करूं !
लड़की: पहले इस्तेमाल करो फिर विश्वास करो!17:
लड़की का पिता: तुम मेरी बेटी को कब से प्यार करते हो?
लड़का: चार महीने से!
पिता: मैं कैसे यकीन करू?
लड़का: आप और पांच महीने रुकिए यकीन हो जायेगा!
18:
दो भाई एक ही क्लास में थे!
अध्यापक: तुम दोनों ने अपने पिता का नाम अलग-अलग क्यों लिखा है?
दोनों भाई बोले: सर आप फिर कहोगे नक़ल मार के किया है!
19: 
अध्यापक: बच्चों कसम खाओ कभी शराब, सिगरेट, लड़की इनको नहीं छुओगे और देश
के लिए जान दोगे!
बच्चे: जान भी दे देंगे सर, ऐसी जिंदगी जी कर क्या करेंगे!
20: 
प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ नई कार में घूम रहा था!
प्रेमी: मैंने तुमसे एक बात छुपाई है!
प्रेमिका हैरान हो कर: कौन सी बात?
प्रेमी: मैं शादी शुदा हूँ!
प्रेमिका: हे भगवान! तुमने तो डरा ही दिया! मैं समझी ये कार तुम्हारी
नहीं!
21: 
प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ नई कार में घूम रहा था!
प्रेमी: मैंने तुमसे एक बात छुपाई है!
प्रेमिका हैरान हो कर: कौन सी बात?
प्रेमी: मैं शादी शुदा हूँ!
प्रेमिका: हे भगवान! तुमने तो डरा ही दिया! मैं समझी ये कार तुम्हारी
नहीं!
22: 
डॉक्टर: तुम्हे मालूम है कि सिगरेट एक तरह का जहर है! जो इन्सान को धीरे-
धीरे मारता है!
: तो मुझे कौन सा मरने की जल्दी है!
23: 
संता: जज साहब, मुझे तलाक चाहिये पिछले एक साल से मेरी बीवी ने मुझसे बात
तक नहीं की है!
जज: एक बार फिर से सोच लो! ऐसी बीवी किस्मत से मिलती है !
24: 
संता: जज साहब, मुझे तलाक चाहिये पिछले एक साल से मेरी बीवी ने मुझसे बात
तक नहीं की है!
जज: एक बार फिर से सोच लो! ऐसी बीवी किस्मत से मिलती है !
25:
माँ: जाओ बेटा आंटी के पास जाओ आंटी तुमको प्यार करेगी!
बेटा: नहीं माँ मैं आंटी के पास नहीं जाउगा! आंटी थप्पड़ मारती है!
माँ: नहीं आंटी थप्पड़ नहीं मारेगी!
बेटा: नहीं माँ मुझे पता है! पापा को भी मारा था!
26
हर माँ अपने बेटे को सलाह देती है!………
1980 में माँ: अपने जाति की लड़की से ही शादी करना!
1990 में माँ: अपने देश की लड़की से ही शादी करना!
2000 में माँ: अपनी उम्र की लड़की से ही शादी करना!
2009 में माँ: कैसी भी हो, पर शादी लड़की से ही करना!……
27:
माँ अपने बेटे से कहती: बेटा सो जा वरना गब्बर आ जायेगा!
बेटा अपनी माँ से कहता: माँ मुझे चॉकलेट दो वरना पापा से कह दूंगा! कि
मेरे सोने के बाद रोज़ गब्बर आता है!28
बंता पेड़ पर चढ़ा ! तो ऊपर बैठे बन्दर ने पूछा : ऊपर क्यों आया?
बंता: सेब खाने!
बन्दर: यह तो आम का पेड़ है!
बंता: पता है सेब साथ लाया हूँ!
29
अध्यापक: ज़मीन पर रहने वाले जानवर बच्चे देते है! हवा में उड़ने वाले
अंडे देते है! वो कौन सी चीज़ है जो हवा में भी उड़ती है और बच्चे भी
देती है?
विद्यार्थी: एयर होस्टेस!
30 
बहु: माँ जी, यह अभी तक नहीं आये, कहीं कोई लड़की का चक्कर तो नहीं है
उनका?
माँ: अरे कल्मूही तू तो हमेशा गलत ही सोचती है! हो सकता है कि किसी ट्रक
के नीचे आ गया हो!
31
नर्स डॉक्टर से: सर बैड न० 6 वाले मरीज का बी.पी. तीन बार चेक कर लिया
है! बहुत हाई है!
डॉक्टर: एक बार फिर से चेक करो! पर अपने ऊपर के 2 बटन जरुर बंद कर लेना!
32
प्रेमिका:मैं अपनी सारी जायदाद साधुओं को दान कर दूंगी! (प्रेमी उठकर
जाने लगा )
प्रेमिका: तुम कहाँ चले?
प्रेमी: साधू बनने!
33 
लड़की:पंडितजी मैं 2 लड़को से प्यार करती हूँ! मेरी शादी किस से होगी! वो
खुशनसीब कौन होगा?
पंडित: पहले से शादी होगी और दूसरा खुशनसीब होगा!
34 
लड़का : मैडम आपकी सैंडल बहुत खूबसूरत है!
लड़की : उतारूँ क्या?
लड़का : आपकी साड़ी उससे से भी खूबसूरत है!
35 
ड्राईवर : संता जी पेट्रोल ख़त्म हो गया है! गाड़ी आगे नहीं जा सकती!
संता : अरे यार! चलो फिर गाड़ी वापिस घर ले चलो!
36
पति : गुरुदेव मुझे पत्नी को वश में करने का कोई मन्त्र बताइये!
साधू : बच्चा मुझे अगर कोई उपाय मालूम होता तो मैं साधू क्यों बनता?
37 
संता डॉक्टर के क्लिनिक में गया
डॉक्टर : अगर तुम लड़कियों का पीछा नहीं छोड़ोगे तो मर जाओगे !
संता : लड़कियों का पीछा करने से कोई कैसे मर सकता है ?
डॉक्टर : तुम जिन लड़कियों के पीछे घूमते हो उनमे से एक लड़की मेरी है !
38
बच्चा : पापा पापा क्या हेमा आंटी के घर में एक भी दरवाज़ा नहीं है ?
पापा : है क्यों नहीं ! कम से कम 7-8 दरवाज़े हैं !
बच्चा : पापा फिर आप उनके घर खिड़की से कूदकर क्यों जाते हैं ?
39
किसी कॉलगर्ल ने अर्ज किया है!
धीरे-धीरे करो सनम! मंदी का जमाना है!
इस छोटी सी जगह से पूरी जिन्दगी भर कमाना है!
40
अपने बच्चे से: बेटा अंगूठा नहीं चूसते हैं नहीं तो पेट फूल जाता है!
एक दिन उस बच्चे ने एक गर्भवती महिला को देखा और उसके पास जा कर बोला
मुझे पता है आपने क्या चूसा है!

Joke .............. Gujrati

A boy was cycling with a basket of eggs on it. He hit a stone and fell down along with the cycle. 
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The eggs also fell down and broke. A crowd gathered around the boy.
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As usual free advice started flowing from the on lookers 
“Couldn’t you be more careful?” 
“What is this, you are cycling , casually without attention?” 
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An old man approached the crowd , saw what had happened and said 
“Poor fellow this boy has to answer the Owner of the shop . Ok I will help him , as much as I can”......
saying this handed over Rs10/- to the boy.
And also said “These onlookers are good people, they will not only give advice, they will help you by giving money also, accept their help”. 
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The onlookers observing the sayings of the old man and his actions , gave money to the boy. 
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The boy was very 
happy, since the money collected was more than the value of the eggs broken.
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One of the onlooker 
asked the boy “young man if that old man was not around , I do not know what difficulties you would have faced with your owner” 
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The boy smiled and replied “Sir ,that old man is the owner of the shop , where I work and he is GUJARAT

Songs by different poets Ha Ha Ha Ha

 एक रूमानी कवि :


अभी ना जाओ
छोड़ कर कि
दिल अभी
भरा नहीं



एक दार्शनिक कवि :

मै
पल
दो पल का
शायर हूँ




एक खिन्न कवि :


कभी कभी
मेरे दिल में
खयाल आता है




एक समर्पित कवि :


मेरे दिल में
आज क्या है
तू कहें तों
मैं बता दूँ




एक जीवन से संतुस्ट कवि :


मांग के
साथ
तुम्हारा




एक प्रेमिका से समझोता
करने वाला कवि  :


चलो
इक बार
फिर से
अजनबी
बन जाए
हम दोनों




एक उदास कवि :


जाने वो
कैसे लोग थे
जिनके
प्यार को
प्यार मिला




एक निश्चित कवि :


मैं
जिंदगी का
साथ
निभाता चला




एक असांसारिक कवि :


ये दुनिया
अगर
मिल भी जाए
तो क्या है




एक देशप्रेमी कवि :


ये
देश है
वीर
जवानों का




एक विद्रोही कवि :


जिन्हें
नाज़ है
हिंद पर
वो
कहाँ है




एक निराशावादी कवि :


तंग
आ चुके है
कशमकश-ए-जिंदगी से
हम




एक मानवतावादी कवि :


अल्ला
तेरो नाम
ईश्वर
तेरो नाम




एक धर्मनिरपेक्ष कवि :


तू
हिंदू
बनेगा
ना
मुसलमान
बनेगा




एक छेड़छाड़ करनेवाला कवि :


ए मेरी
जोहराजबी
तुझे
मालूम नहीं




एक याद ताज़ा करनेवाला कवि :


जिंदगी भर
ना
भूलेगी
ये
बरसात की
रात

शाहरुख़ खान द्वारा करोङो भारतवासियों को "असहिष्णु" कहने पर फ़िल्मी अंदाज़ में जवाब देती राष्ट्रीय कवि "गौरव चौहान" and जयपुर के कवि अब्दुल गफ्फार की नयी कविता ::-

अभिनेता शाहरुख़ खान के बढ़ती 'असहिष्णुता' के बयान पर जयपुर के कवि अब्दुल गफ्फार की ताजा रचना


******************************************************
"तूने कहा,सुना हमने अब मन टटोलकर सुन ले तू
सुन सुन ओ शाहरुख खान,अब कान खोलकर सुन ले तू

तुमको शायद इस हरकत पे शरम नहीं है आने की
तुमने हिम्मत कैसे की जोखिम में हमें बताने की

शस्य श्यामला इस धरती के जैसा जग में और नहीं
भारत माता की गोदी से प्यारी कोई ठोर नहीं

घर से बाहर जरा निकल के अकल खुजाकर के पूछो
हम कितने हैं यहां सुरक्षित, हम से आकर के पूछो

पूछो हमसे गैर मुल्क में मुस्लिम कैसे जीते हैं
पाक, सीरिया, फिलस्तीन में खूं के आंसू पीते हैं

लेबनान, टर्की,इराक में भीषण हाहाकार हुए
अल बगदादी के हाथों मस्जिद में नर संहार हुए

इजरायल की गली गली में मुस्लिम मारा जाता है
अफगानी सडकों पर जिंदा शीश उतारा जाता है

यही सिर्फ वह देश जहां सिर गौरव से तन जाता है
यही मुल्क है जहां मुसलमान राष्ट्रपति बन जाता है

इसकी आजादी के खातिर हम भी सबकुछ भूले थे
हम ही अशफाकुल्ला बन फांसी के फंदे झूले थे

हमने ही अंग्रेजों की लाशों से धरा पटा दी थी
खान अजीमुल्ला बन के लंदन को धूल चटा दी थी

ब्रिगेडियर उस्मान अली इक शोला थे,अंगारे थे
उसने सिर्फ अकेले ने सौ पाकिस्तानी मारे थे

हवलदार अब्दुल हमीद बेखौफ रहे आघातों से
जान गई पर नहीं छूटने दिया तिरंगा हाथों से

करगिल में भी हमने भी बनके हनीफ हुंकारा था
वहाँ मुसर्रफ के चूहों को खेंच खेंच के मारा था

मिटे मगर मरते दम तक हम में जिंदा ईमान रहा
होठों पे कलमा रसूल का दिल में हिंदुस्तान रहा

इसीलिए कहता हूँ तुझसे,यों भडकाना बंद करो
जाकर अपनी फिल्में कर लो हमें लडाना बंद करो

बंद करो नफरत की स्याही से लिक्खी पर्चेबाजी
बंद करो इस हंगामें को, बंद करो ये लफ्फाजी

यहां सभी को राष्ट्र वाद के धारे में बहना होगा
भारत में भारत माता का बनकर ही रहना होगा

भारत माता की बोलो जय 
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शाहरुख़ खान द्वारा करोङो भारतवासियों को "असहिष्णु" कहने पर इस फ़िल्मी वतन परस्त को फ़िल्मी अंदाज़ में जवाब देती राष्ट्रीय कवि "गौरव चौहान" की नयी कविता ::-





हमने तुमको "दिल से" चाहा, "चाहत" का उपहार दिया,
"दीवाना"पूरा भारत था, शोहरत का संसार दिया,

"दिल तो पागल है" जनता का "बादशाह" तुमको माना,
"मोहब्बते" इतनी की हमने, धर्म तुम्हारा ना जाना,

जब "चक दे इंडिया" कहा तो भीड़ तुम्हारे साथ रही,
"हैप्पी न्यू ईयर" जब आया, जगमग सारी रात रही,

"चैन्नई एक्सप्रेस" तलक में तुमने खुल कर सफ़र किया,
उत्तर से दक्षिण तक सबने, प्यार तुम्हारी नज़र किया,

"दिलवाले दुलहनियां ले जायेंगे" तुमने जब बोला,
तुमको मुम्बई ने पनाह दी, सबने अपना दिल खोला,

"डॉन"बनाकर रक्खा तुमको, "बाज़ीगर" का ताज दिया,
राजा तुम्हे "अशोका" समझा सबने तुम पर नाज किया,

लेकिन ये क्या? तुम "स्वदेस" को आज पराया कह बैठे,
खुद को पूरे भारत का लाचार सताया कह बैठे,

जिस जनता ने दौलत देकर तुमको भाव विभोर किया,
साथ उसी जनता के तुमने, क्यों "वन टू का फोर" किया?

"डर" किसका, किसलिये झूठ का ढोल बजाकर बैठे हो,
दिल के अंदर तुम कितना, "कोयला" सजाकर बैठे हो,

आज तुम्हारी आँखों में नफरत का सावन देखा है,
"रॉ-वन" के अंदर हमने फिर से इक रावन देखा है,

उजड़ा जब केदारनाथ, फूटी कौड़ी ना दे पाये,
और कराची में करोड़ रुपये क्यों तुमने भिजवाये?

भारत को धिक्कार, पाक को तुम "यस बॉस"बोलते हो,
और हमारी चाहत को मज़हब से आज तौलते हो,

खूब दिया"अंजाम" प्यार का, आज वतन आभारी है,
हमें बता दो कब भारत से जाने की तैयारी है?

जल्दी जाओ, अमन चैन की धरती केवल पाकिस्तान,
कसम तुम्हे है लौट न आना शाहरुख़ जी, "जब तक है जान".

 



महाभारत आज के सन्दर्भ में हा हा

महाभारत आज के सन्दर्भ में हा हा 

बैकग्राउंड : कृष्ण कर्णार्जुन के घनघोर युद्घ को उस ओर घसीट ले गए जहां दलदल था। कर्ण के रथ का पहिया उसमें फंस गया है । और कर्ण धनुष-बाण त्याग कर युद्घ के नियमों का आह्वान करते हुए अर्जुन से कह रहा है

"'मैं शस्त्र -त्याग करता हूं। धर्मानुसार कुछ क्षणों के लिए युद्घ बंद करो। मैं रथ का पहिया निकाल लूं।"

जब वह रथ का पहिया निकाल रहा था तब अर्जुन ने जैसे ही अपने बाण धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ाये..एक आदर्श लिबरल पत्रकार वहाँ प्रकट हुए.
आदर्श लिबरल : ठहरो अर्जुन..तुम ये गलत कर रहे हो..तुम निहत्थे आदमी पर हमला नहीं कर सकते..ये ह्यूमन राइट्स के खिलाफ है..हम इसके विरोध में कैंडल मार्च निकालेंगे और UN तक इस मामले को लेके जाएंगे?

अर्जुन : ये गलत कैसे हुआ..कहां था तुम्हारा धर्म का विचार जब इनके साथ दुर्योधन, दु:शासन और शकुनि द्रौपदी को बालों से पकड़कर घसीटते हुए दरबार में लाए?

आदर्श लिबरल : वो सब पुरानी घटनाएं हैं..उस सब का इस से क्या लेना देना..कैमरामैन जरा फोकस करो और जनता को दिखाओ कि कैसे अर्जुन कर्ण जैसे निरीह प्राणी पर अत्याचार कर रहा है.

अर्जुन : तब तुम्हारा कैमरा कहाँ था जब कौरवों ने युधिष्ठिर को फुसलाकर जुए में छल-कपट किया?

आदर्श लिबरल : आप लोगों का यही दिक्कत है..इतिहास पकड़ के बैठे रहते हो..चलो धनुष छोडो और दो कबूतर उड़ा के अमन की आशा का ट्राई करो..मैं अपने FTII वाले स्लीपर सेल और साहित्य अकैडमी वाले स्लीपर सेल से कह के इवेंट ऑर्गनाइज कराता हूँ.

अर्जुन : तुम्हारे स्लीपर सेल तब कहाँ थे जब बारह वर्ष वनवास और तेरहवें वर्ष अज्ञातवास में रहने के बाद हमारा राज्य हमें देने से इनकार कर दिया गया ?

आदर्श लिबरल : आपकी बातों से सामंती विचारधारा की बू आ रही है..ये विचारधारा समाज के लिए बहुत खतरनाक है..आप सिर्फ मरने मारने की बातें कर रहे हैं...मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है..इसलिए मैं बड़ा हुआ आप छोटे हुए..आप कट्टर हैं..मैं लिबरल हूँ..आपको IPC की धाराओं में गिरफ्तार कराने के लिए मैं खुद अपने तीसरे स्लीपर सेल के साथ आमरण अनशन करूंगा.

अर्जुन : तुम्हारी धर्मबुद्घि तब कहां थी जब लाक्षागृह में सब भाइयों को जलाने का यत्न किया गया? अकेले और निहत्थे अभिमन्यु को जब तुम सबने मिलकर मार डाला तब कहां गया था तुम्हारा क्षात्रधर्म और न्याय-व्यवहार?'

आदर्श लिबरल : टीवी की तरफ मुखातिब होके "तो देखा आपने कैसे कट्टरता इस समाज को बर्बाद कर रही है..कैसे निरीह निहत्थे कौरवों को मारा जा रहा है..अमन का पैगाम सुनने को पांडव राजी तक नहीं हैं..इस से बढ़िया कौरवों का राज था.सब कितने खुश थे..अमन की आशा वाले भी FTII वाले भी..अकेडमी वाले भी. ये पांडव लोग रैशनल तरीके से सोच ही नहीं पा रहे हैं..ये फासिस्ट हैं..और FTII , अकेडमी, और अमन की आशा वालों के खिलाफ भी.

जनता अपनी राय 420420 पर sms करके भेज सकती है की पांडवों को महाभारत में फांसी मिलनी चाहिए या उन्हें पत्थर मार के मारा जाना चाहिए.
उधर कृष्ण अर्जुन को परेशान खड़ा देख समझाते हुए : बस यही कलियुग की शुरुआत है...पार्थ..आन दे
...... और तब कर्ण जो अपना 'विजय' धनुष रथ पर ही छोड़ आया था .... 'ब्रह्मास्त्र' का आवाह्न करता है ...... किन्तु अनीति और छल से प्राप्त की गयी धनुर्विद्या उस समय गुरु श्राप के कारण फलहीन होती है ।
अर्जुन एक ही बाण से उसके भगवान सूर्य द्वारा प्रदत्त दिव्य कवच हीन (वर्षो से मिल रहे शासन की कृपा) 'वक्ष स्थल' को चीर देतें हैं ।

कैमरा मैन फलाने के साथ presstitute  'आदर्श लिबरल' युद्ध क्षेत्र से पलायन करता है । 'सोशल मिडिया' के रथ पे सवार अर्जुन विजय नाद करते शिविर में लौटते हैं ।
जय हो !!!