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Saturday, 17 October 2015

A must read poem on Dadri Kand and on so called intellectuals


 
 

हैं साहित्य मनीषी या फिर अपने हित के आदी हैं,
राजघरानो के चमचे हैं,वैचारिक उन्मादी हैं,


दिल्ली दानव सी लगती है,जन्नत लगे कराची है,
जिनकी कलम तवायफ़ बनकर दरबारों में नाची है,


डेढ़ साल में जिनको लगने लगा देश दंगाई है,
पहली बार देश के अंदर नफरत दी दिखलायी है,


पहली बार दिखी हैं लाशें पहली बार बवाल हुए.
पहली बार मरा है मोमिन पहली बार सवाल हुए.


नेहरू से नरसिम्हा तक भारत में शांति अनूठी थी,
पहली बार खुली हैं आँखे,अब तक शायद फूटी थीं,


एक नयनतारा है जिसके नैना आज उदास हुए,
जिसके मामा लाल जवाहर,जिसके रुतबे ख़ास हुए,


पच्चासी में पुरस्कार मिलते ही अम्बर झूल गयी,
रकम दबा सरकारी,चौरासी के दंगे भूल गयी


भुल्लर बड़े भुलक्कड़ निकले,व्यस्त रहे रंगरलियों में,
मरते पंडित नज़र न आये काश्मीर की गलियों में,


अब अशोक जी शोक करे हैं,बिसहाडा के पंगो पर,
आँखे इनकी नही खुली थी भागलपुर के दंगो पर,


आज दादरी की घटना पर सब के सब ही रोये हैं,
जली गोधरा ट्रेन मगर तब चादर ताने सोये हैं,


छाती सारे पीट रहे हैं अखलाकों की चोटों पर,
कायर बनकर मौन रहे जो दाऊद के विस्फोटों पर,


ना तो कवि,ना कथाकार,ना कोई शायर लगते हैं,
मुझको ये आनंद भवन के नौकर चाकर लगते हैं,


दिनकर,प्रेमचंद,भूषण की जो चरणों की धूल नही,
इनको कह दूं कलमकार,कर सकता ऐसी भूल नही,


चाटुकार,मौका परस्त हैं,कलम गहे खलनायक हैं,
सरस्वती के पुत्र नही हैं,साहित्यिक नालायक हैं,
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(साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले अशोक बाजपेयी,गुरुवचन भुल्लर 
और नयनतारा सहगल जैसे साहित्यकारों की मानसिकता पर 
प्रश्न चिन्ह लगाती  नयी कविता)
रचनाकार-गौरव चौहान इटावा उ प्र  
 

चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....






हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं
चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं

अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं
दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं 
चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं

सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं
सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

बिजली की झालर छत से लटकाते हैं
कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं

टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं
दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है
मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है

दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं
बार-बार बस गिनते जाते है
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है
छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं

मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं
प्रसाद की थाली पड़ोस में देने जाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

माँ से खील में से धान बिनवाते हैं 
खांड के खिलोने के साथ उसे जमके खाते है 

अन्नकूट के लिए सब्जियों का ढेर लगाते है 
भैया-दूज के दिन दीदी से आशीर्वाद पाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

दिवाली बीत जाने पे दुखी हो जाते हैं 
कुछ न फूटे पटाखों का बारूद जलाते हैं 

घर की छत पे दगे हुए राकेट पाते हैं 
बुझे दीयों को मुंडेर से हटाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

बूढ़े माँ-बाप का एकाकीपन मिटाते हैं 
वहीँ पुरानी रौनक फिर से लाते हैं 

सामान से नहीं ,समय देकर सम्मान जताते हैं
उनके पुराने सुने किस्से फिर से सुनते जाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

आज खुदा से मुलाकात हुई थोडी ही सही पर बात हुई


एक सूफी फकीर थी जिसका नाम राबिया था। सांझ का वक़्त था वह अपने झोंपड़े के बाहर कुछ ढून्ढ़ रही थी। प्रसिद्ध फकीर महिला थी तो थोड़ी देर में ही सारा गाँव इकठ्ठा हो गया और राबिया से पूछा कि हे राबिया- तुम क्या ढूंढ़ रही हो ? राबिया ने कहा मेरी सुई गुम हो गई है उसे ही तलाश कर रही हूँ।
तो काफी लोगों ने भी तलाश करना शुरू कर दिया। काफी देर तलाश करने के बाद भी जब सुई नहीं मिली तो एक व्यक्ति को ख़याल आया उसने राबिया से पूछा कि सुई खोई कहाँ थी ? राबिया ने कहा कि सुई खोई तो भीतर थी पर वहां अँधेरा बहुत ज्यादा था यहाँ बाहर रौशनी है तो मैंने सोचा कि यहाँ उजाले में मिल जाये। लोग तो बहुत नाराज हुए और उन्होंने कहा कि राबिया- लगता है तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। अरे जब सुई भीतर खोई है तो बाहर कैसे मिलेगी।
राबिया ने कहा कि क्या मालूम दिमाग किसका खराब है मेरा कि तुम्हारा। मैं तो वही कर रही हूँ जो तुम रोज करते हो । तुमने भी तो परमात्मा को खोया तो भीतर है और उसे दर-बदर दरवेश की भांति यहाँ-वहां ढूंढ रहे हो।
सुई तो एक बहाना है आप लोगों से यही निवेदन करना है कि हम गहराई से देखें , सोचें कि हमने परमात्मा को खोया कहाँ है और उसे तलाश कहाँ कर रहे है। जहाँ हम तलाश कर रहे हैं वहां पहले तलाश करके जाने वालों को मिल गया है क्या ? जब शास्त्रों में लिखा है कि कण-कण में परमात्मा है तो फिर मंदिर-मस्जिद जाकर आने वालो की आँखों में इतना सूनापन क्यों है, वाणी कठोर क्यों है,------पंथ,सम्प्रदाय और शास्त्रों के नाम पर इतना अहंकार क्यों है ?  हम भूल कहाँ कर रहे है  ?
हकीकत ये है दोस्तों कि हमारी आँख पर ही पर्दा पड़ा है ये पर्दा हटे तो कण-कण में परमात्मा दिखाई पड़े। पर्दा परमात्मा पर नहीं है हमारी ही आँख पर है।  गुरु की कृपा से, ज्ञान के दिए में ध्यान की रौशनी में ही वो पर्दा उठाया जा सकता है। डूबें ध्यान में, डूबें अपने अंतस में । अपने केंद्र पर पहुंचे। पहुँच कर ही वो जलधार ला पायेंगे जिनसे इन आँखों के जाले हट सकते हैं।
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जीवन में इन दो नियमो का पालन अवश्य करें:-
मित्र और रिश्तेदार सुखी हों तो बिना निमंत्रण के उनके पास कभी ना जाएँ।
और
अगर किसी परेशानी या दुःख में हों तो, निमंत्रण की प्रतीक्षा कभी ना करें।
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 Don't regret knowing the people that come into
your life… Good people give you Happiness, Bad
ones give you Experience. The Worst ones give
you Lessons, And the Best ones give you
Memories! ~~Life is Beautiful
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आप अकेले बोल तो सकते है... परन्तु बातचीत नहीं कर सकते,
आप अकेले आनन्दित हो सकते है... परन्तु उत्सव नहीं मना सकते,
आप अकेले मुस्करा तो सकते है... परन्तु हर्षौल्लास नहीं मना सकते,
हम सब एक दुसरे के बिना कुछ नहीं है यही रिश्तो की खूबसूरती है......
है रिश्ता तो जिंदगी है...!!!
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ट्रक के पीछे एक
बड़ी अच्छी बात लिखी देखी....
"ज़िन्दगी एक सफ़र है,आराम से चलते रहो
उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगें, बस गियर बदलते रहो"
तज़ुर्बा है मेरा.... मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने .....पाँव फिसलते देखे
हैं...!
जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारों,
यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नही जायेगा !!!
जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे
बारिश में , जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रह गए !!
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मकान चाहे कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे...
चारपाई पर बैठते थे
पास पास रहते थे...
सोफे और डबल बेड आ गए
दूरियां हमारी बढा गए....
छतों पर अब न सोते हैं
बात बतंगड अब न होते हैं..
आंगन में वृक्ष थे
सांझे सुख दुख थे...
दरवाजा खुला रहता था
राही भी आ बैठता था...
कौवे भी कांवते थे
मेहमान आते जाते थे...
इक साइकिल ही पास था
फिर भी मेल जोल था...
रिश्ते निभाते थे
रूठते मनाते थे...
पैसा चाहे कम था
माथे पे ना गम था...
मकान चाहे कच्चे थे
रिश्ते सारे सच्चे थे...
अब शायद कुछ पा लिया है
पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया
जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है।
एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम
और
आज कई बार
बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है!!
कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते
लोग कहते है हम मुश्कुराते बहोत है ,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते
"खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करता हूँ.
मालूम हे कोई मोल नहीं मेरा.....
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से
रिश्ता रखता हूँ......!
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50 most positive one liners. Worthy of reading again & again... 
1. Have a firm handshake.
2. Look people in the eye.
3. Sing in the shower.
4. Own a great stereo system.
5. If in a fight, hit first and hit hard.
6. Keep secrets.
7. Never give up on anybody. Miracles happen everyday.
8. Always accept an outstretched hand.
9. Be brave. Even if you're not, pretend to be. No one can tell the difference.
10. Whistle.
11. Avoid sarcastic remarks.
12. Choose your life's mate carefully. From this one decision will come 90 per cent of all your happiness or misery.
13. Make it a habit to do nice things for people who will never find out.
14. Lend only those books you never care to see again.
15. Never deprive someone of hope; it might be all that they have.
16. When playing games with children, let them win.
17. Give people a second chance, always.
18. Be romantic.
19. Become the most positive and enthusiastic person you know.
20. Loosen up. Relax. Except for rare life-and-death matters, nothing is as important as it first seems.
21. Don't allow the phone to interrupt important moments. It's there for our convenience, not the caller's.
22. Be a good loser for your
loved ones.
23. Be a good winner of
Hearts.
24. Think twice before burdening a friend with a secret.
25. When someone hugs you, let them be the first to let go.
26. Be modest. A lot was accomplished before you were born.
27. Keep it simple.
28. Beware of the person who has nothing to lose.
29. Don't burn bridges.
You'll be surprised how many times you have to cross the same river.
30. Live your life so that your epitaph could read, No Regrets
31. Be bold and courageous. When you look back on life, you'll regret the things you didn't do more than the ones you did.
32. Never waste an opportunity to tell someone you love them.
33. Remember no one makes it alone. Have a grateful heart and be quick to acknowledge those who helped you.
34. Take charge of your attitude. Don't let someone else choose it for you.
35. Visit friends and relatives when they are in hospital; you need only stay a few minutes.
36. Begin each day with some of your favourite music.
37. Once in a while, take the scenic route.
38. Forgive quickly. Life is short.
39. Answer the phone with enthusiasm and energy in your voice.
40. Keep a note pad and pencil on your bed-side table. Million-dollar ideas sometimes strike at 3a.m.
41. Show respect for everyone who works for a living, regardless of how trivial their job.
42. Send your loved ones flowers. Think of a reason later.
43. Make someone's day by encouraging them.
44. Become someone's hero.
45. Marry only for love.
46. Count your blessings.
47. Compliment the meal when you're a guest in someone's home.
48. Wave at the children on a school bus.
49. Remember that 80 per cent of the success in any job is based on your ability to deal with people.
50. Don't expect life to be fair...
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Who should be blamed when a Leaf falls from the tree;
Is it the wind that blew it away, Or
the tree that let it go, Or
the leaf itself who grew tired holding on?
Life unfolds SO MANY misunderstandings each day,
It is up to us to -
Solve it, Leave it or LIVE WITH IT..
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  Whenever you are not feeling well without any reason..
Spend time with someone special in your life..
Because sometimes you don't need medicines..
You just need the best times of life with the best of people..!
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आज खुदा से मुलाकात हुई
थोडी ही सही पर बात हुई
मैने आप लोगो के बारे मे भी पूछा कि
ये इंसान कैसे है ?
खुदा बोला :"रिश्ता बनाए रखना
बिल्कुल मेरे जैसे है".
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When you are going through difficulties and you wonder where GOD is...just remember that the teacher is always quiet during tests.