Wednesday, 30 September 2015

So true .................. जमाई के साथ (ससुराल मैं)सन् 1990 से पहले और उसके बाद किये जाने वाले व्यवहार के बारे में :-

 

जमाई के साथ (ससुराल मैं)सन् 1990 से पहले और उसके बाद किये जाने वाले व्यवहार के बारे में :-

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1. पहले के जमाई के जब आने का पता चलता तो ससुर जी दाढ़ी बनाकर और नए कपङे पहनकर स्वागत के लिए कम्पलीट रहते थे ।
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2. जमाई आ जाते तो बहुत मान मनवार मिलती और छोरी दौड़कर रसोई में घुस जाती थी ।सासुजी पानी पिलातीं और धीरे से कहती :-"आग्या कांई ?"
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3. आने का समाचार मिलते ही गली मोहल्ले के लोग चाय के लिए बुलाते थे,
और काकी सासुजी या भाभियां तो आटे का हलवा भी बनाती थी ।
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4. जमाई खुद को ऐसा महसूस करता था कि वो पूरे गांव का जमाई है ।
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5. जमाई के घर में आने के बाद घर के सब लोग डिसिप्लिन में आ जाते थे ।
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6. जमाई बाथरूम से निकलते तो उनके हाथ lux साबुन से धुलवाते, भले खुद उजाला साबुन से नहाते थे ।
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7. जमाई अगर रात में रुक जाते तो सुबह उनका साला कॉलगेट और ब्रश हाथ में लेकर आस पास घूमता रहता था ।
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8. जब जमाई का अपनी बीवी को लेकर जाने का समय हो जाता तो वो स्कूटर को पहले गैर में डालकर भन्ना भोट निकालते थे, जिससे उनका ससुराल में प्रभाव बना रहता था ।





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अब आज के जमाई की दुर्दशा :-


1. आज के जमाई से कोई भी लुगाई लाज नहीं करती है, खुद की बीवी भी सलवार कुर्ते में आस पास घूमती रहती है ।
काकी सासुजी और भाभी कोई दूसरी रिश्तेदारी निकाल कर बोलती हैं :- " अपने तो जमाई वाला रिश्ता है ही नहीं ।"
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2. साला अगर कुंवारा है और अगर उसकी सगाई नहीं हो पा रही है तो इसका ताना जमाई को सुनाया जाएगा :- "तुम्हारा हो गया इसका भी तो कुछ सेट करो ।"
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3. पानी पीना हो तो खुद रसोई में जाना पड़ेगा, कोई लाकर देने वाला नहीं है ।
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4. ससुराल पक्ष की किसी शादी में जमाई को इसीलिए ज्यादा मनवार करके बुलाया जाता है ताकि जमाई बच्चों को संभाल सके, बीवी और सासुजी आराम से महिला संगीत में डांस कर सके ।
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5. जरा सा अगर बीवी को ससुराल में कुछ कह दिया तो सासुजी की तरफ से तुरंत जवाब आता हैं " एक से एक रिश्ते आऐ थे, पर ये ही मिला था छोरी को दुखी करने के लिए, इसके पापा को .....नासपीटा।।".

फ़ेसबुक कार्यालय पर माँ को याद कर मोदी के रोने और माँ की गरीबी को ढोंग बताये जाने पर बयानबाजों को जवाब देती कविता

फ़ेसबुक कार्यालय पर माँ को याद कर मोदी के रोने और माँ की गरीबी को ढोंग बताये जाने पर बयानबाजों को जवाब देती  कविता 





फूस बिछौना अखरा है क्यों मखमल के गलियारों को?
चिकने पत्थर चिढ़ा रहे क्यों माटी के चौबारों को,


मनीप्लान्ट के पौधे आँगन की तुलसी को डांट रहे,
मदिरा के प्याले मंदिर में चरणामृत को बांट रहे,


राजघराने जो अय्याशी के ही सदा सबूत रहे,
जहाँ सदा सोने की चम्मच लेकर पैदा पूत हुए,


जहाँ किसी ने कभी अभावों के अनुभव को छुआ नही,
जिन्हें गरीबी के आलम का दर्द कभी भी हुआ नही,


ढोंगी थे जो फिरंगियों से हाथ मिलाकर रखते थे,
खादी के नीचे रेशम की जेब लगाकर रखते थे,


जिनके बच्चों को इटली की गोरी मैडम भाती थी,
जिनकी चमड़ी से खुश्बू पेरिस लन्दन की आती थी,


जो कुर्सी को किसी हाल में दूर नही कर सकते थे.
चाय बेचने वाले को मंज़ूर नही कर सकते थे,


वही घराने आज गरीबी को झुठलाने आये हैं,
माँ की ममता और कष्ट का नाप बताने आये हैं,


तुम क्या जानों,कैसे आंसू रोज निकाले जाते हैं,
चार चार बच्चे इक माँ से कैसे पाले जाते हैं,


तुम क्या जानो साहब कितने बोझे ढोने पड़ते हैं
इक गरीब माँ को पड़ोस के बर्तन धोने पड़ते हैं,


जो माँ खुद भूखा रहकर बच्चों का पेट भराती हो,
बच्चों को बिस्तर देकर जो धरती पर सो जाती हो,


ऐसी माँ जब भी बेटे की यादों में आ जाती है,
हम तो हैं इंसान,आँख पत्थर की भी भर आती है,


जो आया की गोद पले हो,डिब्बे वाला दूध पिये,
जिनकी माँ ने रानी बनकर रुतबे के संग राज किये,


वो क्या जाने,इक माँ की क्या क्या मजबूरी होती है,
बर्तन कैसे धोते हैं?कैसी मज़दूरी होती है,


तुम तो दहशत गर्दो पर आंसू छलकाने वाले हो,
माँ की पावन ममता का उपहास उड़ाने वाले हो,


ये गौरव चौहान कहे जिनको ममता का भान नही,
जिनको इन आँखों से बहते आंसू की पहचान नही,


माँ के दुःख जो ढोंग बताये,तो बेटा बर्बाद है वो,
लावारिस है या धरती पर नाजायज़ औलाद है वो,

Sex Jokes ........... HOW SEX IS GOOD FOR YOU?

 गणेशोत्सव संपन्न हुआ और श्री गणेश जी कैलाश पर्वत पर पहुँचे।
माता पार्वती ने पूछा---" कैसा रहा उत्सव का माहौल ? "
गणेश जी---" मुझपे एक अहसान करना, कि मुझपे कोई एहसान ना करना। "
माता पार्वती---" अरे, ये क्या बोलते हो ? "
गणेश जी---" लुंगी डांस...लुंगी डांस...लुंगी डांस..."
रिद्धी सिद्धी---" अरे, ये क्या है ??? "
गणेश जी---" 12 महीने में 12 तरीके से... ढिंका चिका ढिंकाचिका रे ए ए ए....."
शंकर जी---÷#@+%£......आजकल बच्चों को कहीं भेजने का ज़माना ही नहीं रहा। " .
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मास्टर जी ने सांता को फोन किया_..आपका बेटा बड़ा शैतान हे..आज उसने क्लासरूम की जमीन पे 500 के नोट की हूबहू फोटो बना दी..उसे उठाने के चक्कर में मेरे नाख़ून टूट गए..इसे समझाते क्यों नहीं..?
सांता_..मास्टरजी ..मैं खुद ICU से बोल रहा हूँ..भोसड़ी वाले ने कल बिजली के सॉकेट पे चूत बना दी थी..
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हरियाणे के लुगाइयों को अंग्रेजी सिखाने के लिए मास्टरनी आई |
चूँकि
A फॉर Apple
और
B फॉर Boy
समझाना आसान न था
तो मास्टरनी नें नया तरीका निकाला |
A फॉर अमरपाल की बहु
B फॉर बलवंत की बहु
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O फॉर ओंकार चंद  की बहु
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Z फॉर ज़मींदार की बहु
अच्छी तरह रटवाया गया और फिर हुआ टेस्ट.
प्रश्न था 'Q' फॉर......
ताई कंफ्यूज बोली - दिखे तो ओंकार चंद  की बहु है
पर गांड में डंडा कहे डाल रक्खा है |
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HOW SEX IS GOOD FOR YOU?

It has been known that sex is good exercise, but until recently nobody had made a scientific study of the caloric expenditure of different sexual activities.
Now, after proprietary research the results:

REMOVING HER CLOTHES:
With her consent : 12 Calories
Without her consent : 387 Calories

OPENING HER BRA:
With both hands :  8 Calories
With one hand : 12 Calories
With your teeth : 85 Calories

PUTTING ON A CONDOM:
With an erection : 6 Calories
Without an erection : 315 Calories

PRELIMINARIES:
Trying to find the clitoris : 18 Calories
Trying to find the G-Spot : 322 Calories

POSITIONS:
Missionary : 252 Calories
69 lying down : 378 Calories
69 standing up : 1312 Calories
Wheelbarrow : 716 Calories
Her on top : 924 Calories
Doggy Style : 726 Calories
Donkey punch : 1412 Calories

ORGASMIC:
Real : 112 Calories
Fake : 315 Calories
POST ORGASM:
Lying in bed hugging : 18 Calories
Getting up immediately : 36 Calories
Explaining why you got out of bed immediately : 8816 Calories

GETTING A SECOND ERECTION:
If you are
20-29 years : 36 Calories
30-39 years : 80 Calories
40-49 years : 1124 Calories
50-59 years : 1972 Calories
60-69 years : 2916 Calories
70 and over : Results are still pending

DRESSING UP AFTERWARDS:
Calmly : 32
In a hurry : 98 Calories
With her father knocking at the door : 1218 Calories
With your spouse knocking at the door : 15521 Calories
I m leaving my Gym - for greener pastures.
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एक बार एक बाबा शाम के समय कटोरा लेकर मांगने चल पड़ा।
एक घर का कुंडा खड़काया तो एक नई नवेली बहू आयी निकल के…
बाबा उसे देख के बोला कि इस कटोरे में थोड़ा सा मूत दे…
बहू :- क्या करेगा मूत का ?
बाबा :- दवाई बनाउंगा जी …
बहू भीतर जाकर उस कटोरे में मूत के ले आई।
बाबा ने दो-चार घर ऐसे ही बोल-बोल के कटोरा भरवा लिया, और जंगल में चला गया…
वहां जाकर लंड निकाला और उस कटोरे में डूबो के बोला :-
पीस तो तेरे किस्मत में है नी,
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लै तरी-तरी पी ले।
 

वास्तविक श्राद्ध .............. Must read and follow

एक दोस्त हलवाई की दुकान पर मिल गया ।
मुझसे कहा- ‘आज माँ का श्राद्ध है, 
माँ को लड्डू बहुत पसन्द है, इसलिए लड्डू लेने आया हूँ '
मैं आश्चर्य में पड़ गया ।
अभी पाँच मिनिट पहले तो मैं उसकी माँ से सब्जी मंडी में मिला था ।
मैं कुछ और कहता उससे पहले ही 
खुद उसकी माँ हाथ में झोला लिए वहाँ आ पहुँची ।
मैंने दोस्त की पीठ पर मारते हुए कहा- 
'भले आदमी ये क्या मजाक है ?
माँ जी तो यह रही तेरे पास !
दोस्त ! अपनी माँ के दोनों कंधों पर हाथ रखकर हँसकर बोला, ‍
'भई, बात यूँ है कि मृत्यु के बाद 
गाय या कौवे की थाली में लड्डू रखने से अच्छा है कि माँ की थाली में लड्डू परोसकर उसे जीते - जी तृप्त करूँ ।
मैं मानता हूँ कि जीते जी माता - पिता को हर हाल में खुश रखना ही सच्चा श्राद्ध है ।
आगे उसने कहा, 'माँ को मिठाई,
सफेद रसगुल्ला, गुलाब जामुन, आम आदि पसंद है ।
मैं वह सब उन्हें खिलाता हूँ ।
श्रद्धालु मंदिर में जाकर अगरबत्ती जलाते हैं । 
मैं मंदिर नहीं जाता हूँ, पर माँ के सोने के कमरे में कछुआ छाप अगरबत्ती लगा देता हूँ ।
सुबह जब माँ गीता पढ़ने बैठती है तो माँ का चश्मा साफ कर के देता हूँ । 
मुझे लगता है कि ईश्वर के फोटो व मूर्ति आदि साफ करने से ज्यादा पुण्य माँ का चश्मा साफ करके मिलता है ।
यह बात श्रद्धालुओं को चुभ सकती है पर बात खरी है ।
हम बुजुर्गों के मरने के बाद उनका श्राद्ध करते हैं ।
पंडितों को खीर पूरी खिलाते हैं ।
रस्मों के चलते हम यह सब कर लेते है, पर याद रखिए कि गाय या कौए को खिलाया ऊपर पहुँचता है या नहीं, यह तो पता नहीं ।
अमेरिका या जापान में भी अभी तक स्वर्ग के लिए कोई टिफिन सेवा शुरू नही हुई है ।
माता-पिता को जीते-जी ही सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है ॥