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Saturday, 7 November 2015

शाहरुख़ खान द्वारा करोङो भारतवासियों को "असहिष्णु" कहने पर फ़िल्मी अंदाज़ में जवाब देती राष्ट्रीय कवि "गौरव चौहान" and जयपुर के कवि अब्दुल गफ्फार की नयी कविता ::-

अभिनेता शाहरुख़ खान के बढ़ती 'असहिष्णुता' के बयान पर जयपुर के कवि अब्दुल गफ्फार की ताजा रचना


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"तूने कहा,सुना हमने अब मन टटोलकर सुन ले तू
सुन सुन ओ शाहरुख खान,अब कान खोलकर सुन ले तू

तुमको शायद इस हरकत पे शरम नहीं है आने की
तुमने हिम्मत कैसे की जोखिम में हमें बताने की

शस्य श्यामला इस धरती के जैसा जग में और नहीं
भारत माता की गोदी से प्यारी कोई ठोर नहीं

घर से बाहर जरा निकल के अकल खुजाकर के पूछो
हम कितने हैं यहां सुरक्षित, हम से आकर के पूछो

पूछो हमसे गैर मुल्क में मुस्लिम कैसे जीते हैं
पाक, सीरिया, फिलस्तीन में खूं के आंसू पीते हैं

लेबनान, टर्की,इराक में भीषण हाहाकार हुए
अल बगदादी के हाथों मस्जिद में नर संहार हुए

इजरायल की गली गली में मुस्लिम मारा जाता है
अफगानी सडकों पर जिंदा शीश उतारा जाता है

यही सिर्फ वह देश जहां सिर गौरव से तन जाता है
यही मुल्क है जहां मुसलमान राष्ट्रपति बन जाता है

इसकी आजादी के खातिर हम भी सबकुछ भूले थे
हम ही अशफाकुल्ला बन फांसी के फंदे झूले थे

हमने ही अंग्रेजों की लाशों से धरा पटा दी थी
खान अजीमुल्ला बन के लंदन को धूल चटा दी थी

ब्रिगेडियर उस्मान अली इक शोला थे,अंगारे थे
उसने सिर्फ अकेले ने सौ पाकिस्तानी मारे थे

हवलदार अब्दुल हमीद बेखौफ रहे आघातों से
जान गई पर नहीं छूटने दिया तिरंगा हाथों से

करगिल में भी हमने भी बनके हनीफ हुंकारा था
वहाँ मुसर्रफ के चूहों को खेंच खेंच के मारा था

मिटे मगर मरते दम तक हम में जिंदा ईमान रहा
होठों पे कलमा रसूल का दिल में हिंदुस्तान रहा

इसीलिए कहता हूँ तुझसे,यों भडकाना बंद करो
जाकर अपनी फिल्में कर लो हमें लडाना बंद करो

बंद करो नफरत की स्याही से लिक्खी पर्चेबाजी
बंद करो इस हंगामें को, बंद करो ये लफ्फाजी

यहां सभी को राष्ट्र वाद के धारे में बहना होगा
भारत में भारत माता का बनकर ही रहना होगा

भारत माता की बोलो जय 
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शाहरुख़ खान द्वारा करोङो भारतवासियों को "असहिष्णु" कहने पर इस फ़िल्मी वतन परस्त को फ़िल्मी अंदाज़ में जवाब देती राष्ट्रीय कवि "गौरव चौहान" की नयी कविता ::-





हमने तुमको "दिल से" चाहा, "चाहत" का उपहार दिया,
"दीवाना"पूरा भारत था, शोहरत का संसार दिया,

"दिल तो पागल है" जनता का "बादशाह" तुमको माना,
"मोहब्बते" इतनी की हमने, धर्म तुम्हारा ना जाना,

जब "चक दे इंडिया" कहा तो भीड़ तुम्हारे साथ रही,
"हैप्पी न्यू ईयर" जब आया, जगमग सारी रात रही,

"चैन्नई एक्सप्रेस" तलक में तुमने खुल कर सफ़र किया,
उत्तर से दक्षिण तक सबने, प्यार तुम्हारी नज़र किया,

"दिलवाले दुलहनियां ले जायेंगे" तुमने जब बोला,
तुमको मुम्बई ने पनाह दी, सबने अपना दिल खोला,

"डॉन"बनाकर रक्खा तुमको, "बाज़ीगर" का ताज दिया,
राजा तुम्हे "अशोका" समझा सबने तुम पर नाज किया,

लेकिन ये क्या? तुम "स्वदेस" को आज पराया कह बैठे,
खुद को पूरे भारत का लाचार सताया कह बैठे,

जिस जनता ने दौलत देकर तुमको भाव विभोर किया,
साथ उसी जनता के तुमने, क्यों "वन टू का फोर" किया?

"डर" किसका, किसलिये झूठ का ढोल बजाकर बैठे हो,
दिल के अंदर तुम कितना, "कोयला" सजाकर बैठे हो,

आज तुम्हारी आँखों में नफरत का सावन देखा है,
"रॉ-वन" के अंदर हमने फिर से इक रावन देखा है,

उजड़ा जब केदारनाथ, फूटी कौड़ी ना दे पाये,
और कराची में करोड़ रुपये क्यों तुमने भिजवाये?

भारत को धिक्कार, पाक को तुम "यस बॉस"बोलते हो,
और हमारी चाहत को मज़हब से आज तौलते हो,

खूब दिया"अंजाम" प्यार का, आज वतन आभारी है,
हमें बता दो कब भारत से जाने की तैयारी है?

जल्दी जाओ, अमन चैन की धरती केवल पाकिस्तान,
कसम तुम्हे है लौट न आना शाहरुख़ जी, "जब तक है जान".

 



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