Saturday, 31 October 2015

POONAM PANDEY HOT & SEXY YOGA VIDEO

Thursday, 29 October 2015

New Jokes and Cartoon on Karva Chauth ................ करवाचौथ पर जाटणी ने जाट से कहा

2 days left for renewal of life insurance of Indian 

husbands......Karva Chauth is round the corner (dont forget

Pay your premium on time.


No renewal if insurance lapses
.
.
.



Indrani will keep Karwa Chauth Fast this year for .....
"TO WHOMSOEVER IT MAY CONCERN"....!!!
.
.
.
.
करवाचौथ तो बहाना है,
असली मकसद तो पति को याद दिलाना है...

कि कोई है,
जो उसके इंतजार में दरवाजे पर
टकटकी लगाए रहती है,
पति के इंतज़ार में.
सदा आँखें बिछाए रहती है...

वैलेंटाईन ड़े, रोज़ ड़े
इन सब को वो समझ नहीं पाती है....
प्यार करती है दिल की गहराईयों से,
पर कह नहीं पाती है....

सुबह से भूखी है,
उसका गला भी सूखा जाता है....
इस पर उसका कोई ज़ोर नहीं,
उसे प्यार जताने का
बस यही तरीका आता है....

खुलेआम किस करना हमारी संस्कुति में नहीं,
'आई लव यू' कहने में वो शर्माती है....
वो चाहती है बहुत कुछ कहना,
पर 'जल्दी घर आ जाना'
बस यही कह पाती है....

फेसबुक, ट्वीटर से मतलब नहीं उसे,
ना फोन पे वाट्सैप चलाना आता है....
यूँ तो कोई जिद नहीं करती,
पर प्यार से रूठ जाना आता है...

यूँ तो दिल मचलता है हमारा भी,
देख कर हुस्न की बहार...

मन करता है कि कोई गर्लफ्रेंड बनाऊँ,
पर याद आ जाता है उसका समर्पण,
और हमारे परिवार पर लुटाया हुआ प्यार....
ऐसी प्रिया को,
है सम्मान का, प्यार का अधिकार |।।
.
.
.
.
.
.
करवाचौथ पर जाटणी ने जाट से कहा :-सुनो जी...
कोए छोटा-मोटा ही सही, लेकिन गोल्ड का कुछ तो लया दो।....
फेर के था
जाट ने दिमाग पे जोर दिया......
देसी जाट :- या ले, छोटी गोल्ड फ्लेक, जा चास ले, अरे देखै दो घूँट मन्नै भी मार लेण दिए कदे सारी न खींच दे । .
.
.
.
करवा चौथ के नशे में डूबे
सारे पतियों को ये ज्ञात हो कि
बेशक साल में एक दिन उनकी पूजा 
"भाजपा" के चुनाव चिन्ह से हो,
लेकिन बाकी
364 दिन तो 
"कांग्रेस"
और 
"आप" 
के चुनाव चिन्ह से होनी है....!!!
.
.
.
 जरूर पढ़े:एक व्यंग्य

अक्ल बाटने लगे विधाता, लंबी लगी कतारें
सभी आदमी खड़े हुए थे कहीं नहीं थी नारें ।

सभी नारियाँ कहाँ रह गई था ये अचरज भारी
पता चला ब्यूटी पार्लर में पहुँच गई थी सारी।

मेकअप की थी गहन प्रक्रिया एक एक पर भारी
बैठी थीं कुछ इंतजार में कब आएगी बारी

उधर विधाता ने पुरूषों में अक्ल बाँट दी सारी
ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर जब पहुँची सब नारी

बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है नहीं अक्ल अब बाकी
रोने लगी सभी महिलाएं नींद खुली ब्रह्मा की

पूछा कैसा शोर हो रहा है ब्रह्मलोक के द्वारे
पता चला कि स्टॉक अक्ल का पुरुष ले गए सारे

ब्रह्मा जी ने कहा देवियों बहुत देर कर दी है
जितनी भी थी अक्ल वो मैंने पुरुषों में भर दी है

लगी चीखने महिलाये सब कैसा न्याय तुम्हारा
कुछ भी करो हमें तो चाहिए आधा भाग हमारा

पुरुषो में शारीरिक बल है हम ठहरी अबलाएं
अक्ल हमारे लिए जरुरी निज रक्षा कर पाएं

सोच सोच कर दाढ़ी सहलाकर तब बोलर ब्रह्मा जी 
एक वरदान तुम्हे देता हूँ अब हो जाओ राजी

थोड़ी सी भी हँसी तुम्हारी रहे पुरुष पर भारी
कितना भी वह अक्लमंद हो अक्ल जायेगी मारी

एक औरत ने तर्क दिया मुश्किल बहुत होती है
हंसने से ज्यादा महिलाये जीवन भर रोती है

ब्रह्मा बोले यही कार्य तब रोना भी कर देगा
औरत का रोना भी नर की अक्ल हर लेगा

एक अधेड़ बोली बाबा हंसना रोना नहीं आता
झगड़े में है सिद्धहस्त हम खूब झगड़ना भाता

ब्रह्मा बोले चलो मान ली यह भी बात तुम्हारी 
झगडे के आगे भी नर की अक्ल जायेगी मारी

तब बुढियां तुनक उठीं सुन यह तो न्याय नहीं है
हँसने रोने और झगड़ने की अब अपनी उम्र नहीं है

ब्रह्मा बोले सुनो ध्यान से अंतिम वचन हमारा 
तीन शस्त्र अब तुम्हे दे दिए पूरा न्याय हमारा

इन अचूक शस्त्रों में भी जो मानव नहीं फंसेगा
निश्चित समझो, उस पागल का घर भी नहीं बसेगा

कहे प्रेम कविमित्र ध्यान से सुन लो बात हमारी
बिना अक्ल के भी होती है नर पर नारी भारी।।।।
.
.
.
.
उड़ती हुई खबर आ रही है 
कि एयरटेल 4G वाली लड़की ने चाँद को 
डाऊनलोड करके व्रत तोड़ भी लिया हैं.'ll
.
.
.
.
करवा चौथ का सही मतलब :
करवा यानि कड़वा यानि दारू
चौथ यानि चौथाई यानि क्वाटर
जो बीबी अपने हाथ से पति को क्वाटर पिलाती है उसे डबल पुण्य मिलता है ।

इत्ती सी बात पत्नी जी को समझाई थी और अब आई.सी.यू. के चौथे बिस्तर पर नर्स के हाथों कड़वी दवा पी रहा हूं।
.
.
.
.
Karwachoth Spl ...if we lose a pen, we can buy new one;  but if we lose a pen cap, we cannt buy it...so love your husband, coz all Dhakkans are important 
 Always keep your husbands picture as mobile screen saver. Whenever you face a problem, see the picture & say: if I can handle this, I can handle anything!... 
 Living with husband is a part of living.........but living with the same husband for years is 'art of living'!!!!!!!   Cheers  to all married women.
.
.
.
.
Aaj patniyon ne nirjal vrat rakha hai...

kripya Peg me paani na milayen
.
.
.
.

" सुहागन दे करवा , ,......
सुहागन ले करवा.........."
सुबह सवेरे उठ के.......
करवा माता धयाये.......
नहा धो कर वसत्र पहन ले.....
जो पिया को भाये.......
सुहागन ले करवा.....
सुहागन दे करवा......
चूड़ी बिंदी लिपस्टिक लगा कर...
हो जाऔ तैयार.....
करवाचौथ मनाऔ.........
और पाऔ पति का प्यार........
सुहागन दे करवा.........
सुहागन ले करवा........
सोने का तेरा दीवला......
चाँदी की तेरी बाती.....
सौभाग्य तू पाये.........
प्यार बढ़े दिन राती........
सुहागन दे करवा.......
सुहागन ले करवा.......
व्रत रख के कहानी सुनके...
चाँद को देवे अरक.......
करवा माता कृपा करे.....
करदे घर को स्वरग............
सुहागन दे करवा.......
सुहागन ले करवा.......,,
.
.
.
 Ek aavshyak suchna

Sabhi mehndi lagwate time apni suvidhanusar ek anguli  ke aage thori si jagah khali rakhe......Taki aap what's app ke liye aatamanirbhar rahe...
Suchna janhit me jari 
.
.
.

 आखिर पति के लिए
पत्नी क्यों जरूरी है??
मानो न मानो
.
.
जब तुम दुःखी हो तो वो तुम्हे
कभी अकेला नहीं छोड़ेगी।।
.
.
.
हर वक्त, हर दिन तुम्हे तुम्हारे अन्दर
की बुरी आदतें छोड़ने को कहेगी।।
.
.
हर छोटी छोटी बात पर तुमसे
झगड़ा करेगी, परंतु ज्यादा देर
गुस्सा नहीं रह पाएगी।।
.
.
तुम्हें आर्थिक मजबूती देगी।।
.
.
.
कुछ भी अच्छा ना हो फिर
भी तुम्हें यही कहेगी- चिन्ता मत
करो, सब ठीक हो जाएगा।।
.
.
.
तुम्हें समय का पाबंद बनाएगी।।
.
.
.
यह जानने के लिए कि तुम क्या कर
रहे हो, दिन में 15 बार फोन करके
हाल पूछेगी।।
.
.
.
कभी कभी तुम्हे खीझ
भी आएगी पर सच यह है कि तुम कुछ
कर नहीं पाओगे।।
..
..
चूंकि पत्नी ईश्वर का दिया एक
स्पेशल उपहार है, इसलिए
उसकी उपयोगिता जानो और
उसकी देखभाल करो।।
ये मैसेज हर विवाहित पुरुष के
मोबाइल मे होना चाहिए,
ताकि उन्हें
अपनी पत्नी के महत्व
का अंदाजा हो
अंत में हम दोनों ही होंगे !!!.
भले ही झगड़ें, गुस्सा करें, 
एक दूसरे पर टूट पड़ें
एक दूसरे पर दादागिरि करने के
लिए, अंत में हम दोनों ही होंगे...
जो कहना है, वह कह ले
जो करना है, वह कर ले
एक दूसरे के चश्मे और 
लकड़ी ढूंढने में, 
अंत में हम दोनों ही होंगे
मैं रूठूं तो तुम मना लेना, 
तुम रूठो तो मैं मना लूंगा
एक दूसरे को लाड़ लड़ाने के लिए..
अंत में हम दोनों ही होंगे
आंखें जब धुंधली होंगी, 
याददाश्त जब कमजोर होगी
तब एक दूसरे को एक दूसरे 
में ढूंढने के लिए, 
अंत में हम दोनों ही होंगे
घुटने जब दुखने लगेंगे, 
कमर भी झुकना बंद करेगी
तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे
"अरे मुुझे कुछ नहीं हुआ,
बिलकुल नॉर्मल हूं"
ऐसा कह कर एक दूसरे को 
बहकाने के लिए
अंत में हम दोनों ही होंगे
साथ जब छूट जाएगा, 
विदाई की घड़ी जब आ जाएगी
तब एक दूसरे को माफ करने के लिए
अंत में हम दोनों ही होंगे......
Husband wife per jokes kitne bhi hon, but fact yahi hai...
.
.
.
उनके हाथो में मेहंदी लगाने का ये फायदा हुआ,
उनके चहरे से हम रात भर.....जुल्फे हटाते रहे.
.
.
.
पुरे इंडिया में मोबइल कम्पनी को 2000 करोड़ रूपये का घाटा
मेहँदी लगी होने के कारन सभी औरतों ने 4 घण्टे
मोबाईल का

व्हाट्सएप्प का त्याग किआ

Tuesday, 27 October 2015

Famous दाल जोक्स ................. Enjoy ...............

दाल जोक्स 


सहवाग रिटायर हो चुके हैं,
.
.
.
अब तिहरे शतक की उम्मीदें
.
.
.
.
सिर्फ दाल से बची हैं..
.
.
.
 The economic impact of sky rocketing Dal prices...
Recently an oldman died hearing Dal prices have hit 200 per kg..the doctor in the death certificate wrote the reason for demise as..."HIGH PULSE RATE"!
.
.
.
.

लड़के वाले :
क्या आप की बेटी..
दाल बना सकती है..?
लड़की वाले :
क्या आप का बेटा...
दाल खरीद सकता है..?
.
.
.
.
कुछ मशहूर फिल्मो के डायलॉग -~:

एक किलो दाल की क़ीमत तुम क्या जानो मोदी बाबु,......~:

मेरे करन अर्जुन आयेंगे , एक किलो अरहर दाल लायेंगे ।~:

मेरे पास गाड़ी है बंगला है बैंक बैलेंस है तुम्हारे पास क्या है ?"मेरे पास दाल है"~:

ये दाल हमको दे ठाकुर~:

जॉनी जिनके घर डिनर मे दाल होती है वो दरवाज़ा बन्द कर के खाते है ।~:

जा सिमरन जा खा ले अपने हिस्से की दाल~:

दाल को खाना मुश्किल ही नहीँ नामुमकिन है ।~:

ना तलवार की धार से , ना गोलियो की बौछार से , बन्दा डरता है तो सिर्फ़ दाल के दाम से~:

प्यार से दाल खिला रहे है खा लो , वरना थप्पड़मार के भी खिला सकते है ।~:

अरे ओ साम्भा ! कितने किलो दाल थी ।सरदार 220 ₹ किलो~:

सरदार मैने आपकी दाल खाई है ~:

पीटर तुम लोग मुझे वहाँ ढुंढ रहे हो और मै यहाँ दाल खा रहा हूँ ।~:

कुत्ते मै तेरी पुरी दाल पी जाउंगा ।~:

ये मज़दूर की दाल है कात्या ~:

दालवाले दुल्हनिया ले जायेंगे .....
.
.
.
.
पहले मैं हमेशा दुखी रहता था
अच्छा खाना नहीं खा पाता था
और नॉन वेज तो जैसे देखना ही नसीब नहीं था....
लेकिन फिर एक अच्छे दिनों वाली सरकार आई
और उन्होंने ऐसी जादू की छड़ी घुमाई कि
जिस रेट पर मैं दाल लाता था उसी रेट पर अब पूरे 2 किलो चिकन आ जाता है....
अब मैं हमेशा चिकन खाता हूँ और मेरे घर की 2 मुर्गी भी दाल बराबर हो गई है
थैंक्यू ‪#‎अच्छे दिन‬
हर हर मुर्गा .....
घर घर मुर्गा..
.
.
.
सदमें से मर गया उसी वक़्त एक मरीज़,
डॉक्टर ने जब कहा कि दाल का पानी पिया करो ।
.
.
.
.
सुबह से 50-60 लड़कियों के फोन आ चूके,
सभी I Love You बोल रही है,
पता ना किस साले ये अफवाह फैला दी है कि मेरे घर 1 बोरी अरहर की दाल है!
.
.
.
.
रिपोर्टर -मोदी जी आपने कभी 200 रुपये किलो दाल खाई है।
मोदी - मैंने कहा था ना जो काम कांग्रेस 60 सालों में नहीं कर पाई वो मैंने एक साल में करके दिखा दिया।
कहा था ना 
न खाऊंगा ना खाने दूंगा । 
. .
.
तू अपने ग़रीब होने का दावा न कर, ऐ दोस्त,
हमने देखा है तुझे बाज़ार में "अरहर की दाल" खरीदते हुए...


Saturday, 24 October 2015

एक कनपुरिया छात्र से गुरु जी ने पूछा रामायण का सारांश बताओ:-

एक कनपुरिया छात्र  से गुरु जी  ने पूछा रामायण का सारांश बताओ:-



विद्यार्थी ने बहुत सीधा, सरल और संक्षिप्त विवरण दिया...

एक रहें राम बहुतै काबिल,

बाप की मान लीं और मेहरिया लेय के चल दिए जंगल। 

उनके भाई लक्ष्मण अउर भी बड़े वाले होनहार वहू साथ हुई गे। 

हुआं जंगल मा सूपनखा आई सेट्टिंग के लिए तो गुरु उसकी नाक काट लिहिन। 
सूपनखा का भाई रावण एकदम टोपा राक्षस रहा। 

ऊ राम का हलके मा लई लिहिस और सीता मैया का लपेट दिहिस।
.

लेकिन रामो बड़े वाले रहें,भेज दीन्ह हनुमान  का कि जाओ अउर रावण की बैंड बजा आओ। 

हनुमान जी तो अउरो बड़े परम थे। 

लंका की लफद्दर कर दिहिन और गुरु ऐसा टैलर दिहिन की रावण का सारा भौकाल घुस गवा। 

फिर का रहे, रावण बाद में विद फैमिली हौंके गए। 

और विभीषण फ्री में राजा बाबू हुई गए। 

Saturday, 17 October 2015

A must read poem on Dadri Kand and on so called intellectuals


 
 

हैं साहित्य मनीषी या फिर अपने हित के आदी हैं,
राजघरानो के चमचे हैं,वैचारिक उन्मादी हैं,


दिल्ली दानव सी लगती है,जन्नत लगे कराची है,
जिनकी कलम तवायफ़ बनकर दरबारों में नाची है,


डेढ़ साल में जिनको लगने लगा देश दंगाई है,
पहली बार देश के अंदर नफरत दी दिखलायी है,


पहली बार दिखी हैं लाशें पहली बार बवाल हुए.
पहली बार मरा है मोमिन पहली बार सवाल हुए.


नेहरू से नरसिम्हा तक भारत में शांति अनूठी थी,
पहली बार खुली हैं आँखे,अब तक शायद फूटी थीं,


एक नयनतारा है जिसके नैना आज उदास हुए,
जिसके मामा लाल जवाहर,जिसके रुतबे ख़ास हुए,


पच्चासी में पुरस्कार मिलते ही अम्बर झूल गयी,
रकम दबा सरकारी,चौरासी के दंगे भूल गयी


भुल्लर बड़े भुलक्कड़ निकले,व्यस्त रहे रंगरलियों में,
मरते पंडित नज़र न आये काश्मीर की गलियों में,


अब अशोक जी शोक करे हैं,बिसहाडा के पंगो पर,
आँखे इनकी नही खुली थी भागलपुर के दंगो पर,


आज दादरी की घटना पर सब के सब ही रोये हैं,
जली गोधरा ट्रेन मगर तब चादर ताने सोये हैं,


छाती सारे पीट रहे हैं अखलाकों की चोटों पर,
कायर बनकर मौन रहे जो दाऊद के विस्फोटों पर,


ना तो कवि,ना कथाकार,ना कोई शायर लगते हैं,
मुझको ये आनंद भवन के नौकर चाकर लगते हैं,


दिनकर,प्रेमचंद,भूषण की जो चरणों की धूल नही,
इनको कह दूं कलमकार,कर सकता ऐसी भूल नही,


चाटुकार,मौका परस्त हैं,कलम गहे खलनायक हैं,
सरस्वती के पुत्र नही हैं,साहित्यिक नालायक हैं,
.
.
.
.

(साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले अशोक बाजपेयी,गुरुवचन भुल्लर 
और नयनतारा सहगल जैसे साहित्यकारों की मानसिकता पर 
प्रश्न चिन्ह लगाती  नयी कविता)
रचनाकार-गौरव चौहान इटावा उ प्र  
 

चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....






हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं
चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं

अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं
दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं 
चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं

सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं
सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

बिजली की झालर छत से लटकाते हैं
कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं

टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं
दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है
मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है

दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं
बार-बार बस गिनते जाते है
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है
छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं

मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं
प्रसाद की थाली पड़ोस में देने जाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

माँ से खील में से धान बिनवाते हैं 
खांड के खिलोने के साथ उसे जमके खाते है 

अन्नकूट के लिए सब्जियों का ढेर लगाते है 
भैया-दूज के दिन दीदी से आशीर्वाद पाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

दिवाली बीत जाने पे दुखी हो जाते हैं 
कुछ न फूटे पटाखों का बारूद जलाते हैं 

घर की छत पे दगे हुए राकेट पाते हैं 
बुझे दीयों को मुंडेर से हटाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

बूढ़े माँ-बाप का एकाकीपन मिटाते हैं 
वहीँ पुरानी रौनक फिर से लाते हैं 

सामान से नहीं ,समय देकर सम्मान जताते हैं
उनके पुराने सुने किस्से फिर से सुनते जाते हैं 
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ....

आज खुदा से मुलाकात हुई थोडी ही सही पर बात हुई


एक सूफी फकीर थी जिसका नाम राबिया था। सांझ का वक़्त था वह अपने झोंपड़े के बाहर कुछ ढून्ढ़ रही थी। प्रसिद्ध फकीर महिला थी तो थोड़ी देर में ही सारा गाँव इकठ्ठा हो गया और राबिया से पूछा कि हे राबिया- तुम क्या ढूंढ़ रही हो ? राबिया ने कहा मेरी सुई गुम हो गई है उसे ही तलाश कर रही हूँ।
तो काफी लोगों ने भी तलाश करना शुरू कर दिया। काफी देर तलाश करने के बाद भी जब सुई नहीं मिली तो एक व्यक्ति को ख़याल आया उसने राबिया से पूछा कि सुई खोई कहाँ थी ? राबिया ने कहा कि सुई खोई तो भीतर थी पर वहां अँधेरा बहुत ज्यादा था यहाँ बाहर रौशनी है तो मैंने सोचा कि यहाँ उजाले में मिल जाये। लोग तो बहुत नाराज हुए और उन्होंने कहा कि राबिया- लगता है तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। अरे जब सुई भीतर खोई है तो बाहर कैसे मिलेगी।
राबिया ने कहा कि क्या मालूम दिमाग किसका खराब है मेरा कि तुम्हारा। मैं तो वही कर रही हूँ जो तुम रोज करते हो । तुमने भी तो परमात्मा को खोया तो भीतर है और उसे दर-बदर दरवेश की भांति यहाँ-वहां ढूंढ रहे हो।
सुई तो एक बहाना है आप लोगों से यही निवेदन करना है कि हम गहराई से देखें , सोचें कि हमने परमात्मा को खोया कहाँ है और उसे तलाश कहाँ कर रहे है। जहाँ हम तलाश कर रहे हैं वहां पहले तलाश करके जाने वालों को मिल गया है क्या ? जब शास्त्रों में लिखा है कि कण-कण में परमात्मा है तो फिर मंदिर-मस्जिद जाकर आने वालो की आँखों में इतना सूनापन क्यों है, वाणी कठोर क्यों है,------पंथ,सम्प्रदाय और शास्त्रों के नाम पर इतना अहंकार क्यों है ?  हम भूल कहाँ कर रहे है  ?
हकीकत ये है दोस्तों कि हमारी आँख पर ही पर्दा पड़ा है ये पर्दा हटे तो कण-कण में परमात्मा दिखाई पड़े। पर्दा परमात्मा पर नहीं है हमारी ही आँख पर है।  गुरु की कृपा से, ज्ञान के दिए में ध्यान की रौशनी में ही वो पर्दा उठाया जा सकता है। डूबें ध्यान में, डूबें अपने अंतस में । अपने केंद्र पर पहुंचे। पहुँच कर ही वो जलधार ला पायेंगे जिनसे इन आँखों के जाले हट सकते हैं।
.
.
.
.

जीवन में इन दो नियमो का पालन अवश्य करें:-
मित्र और रिश्तेदार सुखी हों तो बिना निमंत्रण के उनके पास कभी ना जाएँ।
और
अगर किसी परेशानी या दुःख में हों तो, निमंत्रण की प्रतीक्षा कभी ना करें।
.
.
.
.
 Don't regret knowing the people that come into
your life… Good people give you Happiness, Bad
ones give you Experience. The Worst ones give
you Lessons, And the Best ones give you
Memories! ~~Life is Beautiful
.
.
.
.
आप अकेले बोल तो सकते है... परन्तु बातचीत नहीं कर सकते,
आप अकेले आनन्दित हो सकते है... परन्तु उत्सव नहीं मना सकते,
आप अकेले मुस्करा तो सकते है... परन्तु हर्षौल्लास नहीं मना सकते,
हम सब एक दुसरे के बिना कुछ नहीं है यही रिश्तो की खूबसूरती है......
है रिश्ता तो जिंदगी है...!!!
.
.
.
.
ट्रक के पीछे एक
बड़ी अच्छी बात लिखी देखी....
"ज़िन्दगी एक सफ़र है,आराम से चलते रहो
उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगें, बस गियर बदलते रहो"
तज़ुर्बा है मेरा.... मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने .....पाँव फिसलते देखे
हैं...!
जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारों,
यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नही जायेगा !!!
जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे
बारिश में , जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रह गए !!
.
.
.
.

मकान चाहे कच्चे थे
लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे...
चारपाई पर बैठते थे
पास पास रहते थे...
सोफे और डबल बेड आ गए
दूरियां हमारी बढा गए....
छतों पर अब न सोते हैं
बात बतंगड अब न होते हैं..
आंगन में वृक्ष थे
सांझे सुख दुख थे...
दरवाजा खुला रहता था
राही भी आ बैठता था...
कौवे भी कांवते थे
मेहमान आते जाते थे...
इक साइकिल ही पास था
फिर भी मेल जोल था...
रिश्ते निभाते थे
रूठते मनाते थे...
पैसा चाहे कम था
माथे पे ना गम था...
मकान चाहे कच्चे थे
रिश्ते सारे सच्चे थे...
अब शायद कुछ पा लिया है
पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया
जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है।
एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम
और
आज कई बार
बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है!!
कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते
लोग कहते है हम मुश्कुराते बहोत है ,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते
"खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करता हूँ.
मालूम हे कोई मोल नहीं मेरा.....
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से
रिश्ता रखता हूँ......!
.
.
.
.
50 most positive one liners. Worthy of reading again & again... 
1. Have a firm handshake.
2. Look people in the eye.
3. Sing in the shower.
4. Own a great stereo system.
5. If in a fight, hit first and hit hard.
6. Keep secrets.
7. Never give up on anybody. Miracles happen everyday.
8. Always accept an outstretched hand.
9. Be brave. Even if you're not, pretend to be. No one can tell the difference.
10. Whistle.
11. Avoid sarcastic remarks.
12. Choose your life's mate carefully. From this one decision will come 90 per cent of all your happiness or misery.
13. Make it a habit to do nice things for people who will never find out.
14. Lend only those books you never care to see again.
15. Never deprive someone of hope; it might be all that they have.
16. When playing games with children, let them win.
17. Give people a second chance, always.
18. Be romantic.
19. Become the most positive and enthusiastic person you know.
20. Loosen up. Relax. Except for rare life-and-death matters, nothing is as important as it first seems.
21. Don't allow the phone to interrupt important moments. It's there for our convenience, not the caller's.
22. Be a good loser for your
loved ones.
23. Be a good winner of
Hearts.
24. Think twice before burdening a friend with a secret.
25. When someone hugs you, let them be the first to let go.
26. Be modest. A lot was accomplished before you were born.
27. Keep it simple.
28. Beware of the person who has nothing to lose.
29. Don't burn bridges.
You'll be surprised how many times you have to cross the same river.
30. Live your life so that your epitaph could read, No Regrets
31. Be bold and courageous. When you look back on life, you'll regret the things you didn't do more than the ones you did.
32. Never waste an opportunity to tell someone you love them.
33. Remember no one makes it alone. Have a grateful heart and be quick to acknowledge those who helped you.
34. Take charge of your attitude. Don't let someone else choose it for you.
35. Visit friends and relatives when they are in hospital; you need only stay a few minutes.
36. Begin each day with some of your favourite music.
37. Once in a while, take the scenic route.
38. Forgive quickly. Life is short.
39. Answer the phone with enthusiasm and energy in your voice.
40. Keep a note pad and pencil on your bed-side table. Million-dollar ideas sometimes strike at 3a.m.
41. Show respect for everyone who works for a living, regardless of how trivial their job.
42. Send your loved ones flowers. Think of a reason later.
43. Make someone's day by encouraging them.
44. Become someone's hero.
45. Marry only for love.
46. Count your blessings.
47. Compliment the meal when you're a guest in someone's home.
48. Wave at the children on a school bus.
49. Remember that 80 per cent of the success in any job is based on your ability to deal with people.
50. Don't expect life to be fair...
.
.
.
.
Who should be blamed when a Leaf falls from the tree;
Is it the wind that blew it away, Or
the tree that let it go, Or
the leaf itself who grew tired holding on?
Life unfolds SO MANY misunderstandings each day,
It is up to us to -
Solve it, Leave it or LIVE WITH IT..
.
.
.
  Whenever you are not feeling well without any reason..
Spend time with someone special in your life..
Because sometimes you don't need medicines..
You just need the best times of life with the best of people..!
.
.
.
.
आज खुदा से मुलाकात हुई
थोडी ही सही पर बात हुई
मैने आप लोगो के बारे मे भी पूछा कि
ये इंसान कैसे है ?
खुदा बोला :"रिश्ता बनाए रखना
बिल्कुल मेरे जैसे है".
.
.
.
When you are going through difficulties and you wonder where GOD is...just remember that the teacher is always quiet during tests.

Tuesday, 13 October 2015

How can You hack your girl friend's WhatsApp?

How can You hack your girl friend's WhatsApp?


Yes I can, it's very easy. I will teach you the social engineering hack
 
Step 1. You approach your girlfriend, smile and ask, "What is the password for your WhatsApp?"
 
Step 2. If she answers the question, she is vulnerable to that attack and you are in.
 
Step 3. If she doesn't answer or gives you the wrong password she is not vulnerable to the attack and you need to ask her, "Can I borrow your smart phone while you are logged on to WhatsApp?"
 
If she gives you the phone you are in, if not go to step 4.
 
Step 4. Get a dumber girlfriend.

'What does love mean?'

 'What does love mean?'

A group of professional people posed this question to a group of 4 to 8 year-olds.

'What does love mean?'

The answers they got were broader, deeper, and more profound than anyone could have ever imagined !
See what you think:

'When my grandmother
got arthritis, she couldn't bend over and paint her toenails anymore.. So my grandfather does it for her all the time , even when his hands got arthritis too. That's love.

Rebecca- age 8
'When someone loves you , the
way they say your name is different.
You just know that your name
is safe in their mouth.'

Billy - age 4
'Love is when a girl puts on perfume
and a boy puts on shaving cologne
and they go out and smell each other.'

Karl - age 5
'Love is when you go out to eat
and give somebody most of your French fries
without making them give you any of theirs'

Chrissy - age 6
'Love is when my
mommy makes coffee for my daddy and she takes a sip before giving it to him, to
make sure the taste is OK.

Danny - âge 8
'If you want to learn to love better, you should start with a friend who you hate. '

Nikka - age 6
(we need a few million more Nikkas on this planet)
'Love is when you tell a guy you like his shirt, then he wears it everyday.'

Noelle - age 7
'Love is like a little
old woman and a little old man who are still friends even after they know each other so well.'

Tommy - age 6
'During my piano recital , I was
on a stage and I was scared. I looked at all the
people watching me and saw my daddy waving and
smiling. He was the only one doing that. I wasn't scared anymore.'

Cindy - age 8
'My mommy loves me
more than anybody
You don't see anyone else
kissing me to sleep at night.'

Clare - age 6
'Love is when Mommy
gives Daddy the best piece of chicken.'

Elaine-age 5
'Love is when Mommy
sees Daddy smelly and sweaty and still says he is handsomer than Robert Redford.'

Chris - age 7
'Love is when your puppy licks
your face even after you left him alone all day.'

Mary Ann - age 4
'I know my older sister loves me because she gives me all her old clothes and has to go out and buy new ones.

Lauren - age 4
'You really shouldn't say
'I love you' unless you mean it.
But if you mean it,
you should say it a lot. People forget.'

Jessica - age 8
And the final one:
The winner was a four year old child whose next door neighbor was an elderly gentleman who had recently lost his wife.
Upon seeing the man cry, The
little boy went into the old
gentleman's yard, climbed onto his lap, and just sat there.
When his Mother asked what he had said to the neighbor, the little boy said
'Nothing, I just helped him cry.'

Sunday, 11 October 2015

हिंदी मजेदार गंदे XXX चुटकुले

हिंदी मजेदार गंदे XXX चुटकुले 



1: 
बंता: ऐसा क्या काम है जो रावण कर सकता है राम नहीं?
संता: मुझे नहीं पता!
बंता: सामूहिक चर्चा!

2:
संता: यार बंता तेरी कमीज में यह गाँठ कैसे बंधी है?
बंता: मेरी पत्नी ने लगाई है! ताकि पत्र पोस्ट करने के लिये यादगार बनी
रहे!
संता: तो तुमने पत्र पोस्ट कर दिया होगा!
बंता: नहीं यार, मेरी पत्नी वह पत्र मुझे देना ही भूल गयी!

3:
संता: तुमको सन्नी देओल का फ़ोन नंबर पता है?
बंता: नहीं! पर तुम क्यों पूछ रहे हो?
संता: यार नलका उखड़वाना था

4:
बंता: यार हिंदी भी अजीब भाषा है!
संता: वोह कैसे?
बंता: घडी ख़राब हो तो कहते है “बंद है” और लड़की ख़राब हो तो कहते है ”
चालू है”

5:
संता फ़ोन पर बात कर रहा था!
बंता: किस से बात कर रहो हो!
संता: बीवी से!
बंता: इतने प्यार से?
संता: तुम्हारी है!…..

6:
प्रेमिका: अगर तुम मेरे होंठ चूमने की कोशिश करोगे तो मैं चिल्ला पडूँगी!
प्रेमी: कैसे चिल्लाओगी? तुम्हारे होंठ तो मेरे होंठों में होंगें!

7:
एक सूनसान जगह पर गाड़ी रोक कर प्रेमी प्रेमिका से!
प्रेमी: अगर मैं अब तुम्हारे साथ मुंह काला करने लगूं! तो तुम सहायता के
लिये शोर तो नहीं करोगी?
प्रेमिका: अगर तुम मुंह काला न कर सके! तो तुम्हारा मुंह काला करने के
लिये जरुर शोर करुँगी!

8:
एक बार 3 फलों में आपस में बातचीत होती है!
सेब: मुझे तो सब धो कर और काट कर खाते है!
अमरुद: तुझे क्या मुझे भी सब धो कर और काट कर खाते है!
सेब चुपचाप बैठे केले से कहता है: तुम क्यों चुप हो?
केला: मैं क्या कहूँ मुझे तो बताते हुए भी शर्म आती है मुझे तो सब लोग
नंगा करके खाते है!

9:
डॉक्टर: मंत्री जी आपकी पत्नी माँ बनने वाली है!
मंत्री सोच में पड़ गया!
डॉक्टर: क्या हुआ सर?
मंत्री: समझ नहीं आ रहा! यह जाली वोट कौन डाल गया!

10:
एक फ़कीर ने आवाज़ लगाई : अल्लाह के नाम पर कुछ दे दो!
घर के अन्दर से जवाब मिला : बाबाजी, मम्मी घर में नहीं है!
फ़कीर बोला : मैं खाना मांग रहा हूँ मम्मी को नहीं!

11:
माँ: नालायक कहां थी इतनी रात तक?
बेटी: अपने प्रेमी के साथ थी!
माँ: कर आयी न अपना मूह काला!
बेटी: तो क्या हुआ फेयर एंड लवली है न!


12:अध्यापक: लाइट कहा से आती है?
संता: मेरे मामा जी के घर से!
अध्यापक: वो कैसे?
संता: जब भी लाइट चली जाती है तो पापा कहते है सालो ने फिर कट लगा दिया!

13:
अध्यापक : तुम बड़े गंदे रहते हो, गन्दगी मनुष्य के स्वास्थ्य का कट्टर
शत्रु है !
विद्यार्थी : पर आपने ही तो कहा था कि शत्रुओं से प्रेम करो !

14 :
शादी के दो दिन बाद बेटी माँ से,
बेटी : माँ रात मेरी उनसे लड़ाई हो गई !
माँ : बेटी शादीशुदा ज़िन्दगी में छोटे-मोटे झगड़े तो चलते रहते हैं !
बेटी : सो तो ठीक है पर तुम मुझे बताओ मैं लाश का क्या करूँ ?

15 :
एक महिला दूधवाले से-
महिला: भईया आजकल दूध बहुत पतला आ रहा है!
दूधवाला: आप यह सब मुझे क्यों बता रही हैं! किसी अच्छे से डॉक्टर को
बताओ!

16 :
लड़का शादी के लिए लड़की देखने गया!
लड़का: मैं आप पर कैसे विश्वास करूं !
लड़की: पहले इस्तेमाल करो फिर विश्वास करो!

17:
लड़की का पिता: तुम मेरी बेटी को कब से प्यार करते हो?
लड़का: चार महीने से!
पिता: मैं कैसे यकीन करू?
लड़का: आप और पांच महीने रुकिए यकीन हो जायेगा!

18:
दो भाई एक ही क्लास में थे!
अध्यापक: तुम दोनों ने अपने पिता का नाम अलग-अलग क्यों लिखा है?
दोनों भाई बोले: सर आप फिर कहोगे नक़ल मार के किया है!

19: 
अध्यापक: बच्चों कसम खाओ कभी शराब, सिगरेट, लड़की इनको नहीं छुओगे और देश
के लिए जान दोगे!
बच्चे: जान भी दे देंगे सर, ऐसी जिंदगी जी कर क्या करेंगे!

20: 
प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ नई कार में घूम रहा था!
प्रेमी: मैंने तुमसे एक बात छुपाई है!
प्रेमिका हैरान हो कर: कौन सी बात?
प्रेमी: मैं शादी शुदा हूँ!
प्रेमिका: हे भगवान! तुमने तो डरा ही दिया! मैं समझी ये कार तुम्हारी
नहीं!

21: 
प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ नई कार में घूम रहा था!
प्रेमी: मैंने तुमसे एक बात छुपाई है!
प्रेमिका हैरान हो कर: कौन सी बात?
प्रेमी: मैं शादी शुदा हूँ!
प्रेमिका: हे भगवान! तुमने तो डरा ही दिया! मैं समझी ये कार तुम्हारी
नहीं!

22: 
डॉक्टर: तुम्हे मालूम है कि सिगरेट एक तरह का जहर है! जो इन्सान को धीरे-
धीरे मारता है!
: तो मुझे कौन सा मरने की जल्दी है!

23: 
संता: जज साहब, मुझे तलाक चाहिये पिछले एक साल से मेरी बीवी ने मुझसे बात
तक नहीं की है!
जज: एक बार फिर से सोच लो! ऐसी बीवी किस्मत से मिलती है !

24: 
संता: जज साहब, मुझे तलाक चाहिये पिछले एक साल से मेरी बीवी ने मुझसे बात
तक नहीं की है!
जज: एक बार फिर से सोच लो! ऐसी बीवी किस्मत से मिलती है !

25:
माँ: जाओ बेटा आंटी के पास जाओ आंटी तुमको प्यार करेगी!
बेटा: नहीं माँ मैं आंटी के पास नहीं जाउगा! आंटी थप्पड़ मारती है!
माँ: नहीं आंटी थप्पड़ नहीं मारेगी!
बेटा: नहीं माँ मुझे पता है! पापा को भी मारा था!

26
हर माँ अपने बेटे को सलाह देती है!………
1980 में माँ: अपने जाति की लड़की से ही शादी करना!
1990 में माँ: अपने देश की लड़की से ही शादी करना!
2000 में माँ: अपनी उम्र की लड़की से ही शादी करना!
2009 में माँ: कैसी भी हो, पर शादी लड़की से ही करना!……

27:
माँ अपने बेटे से कहती: बेटा सो जा वरना गब्बर आ जायेगा!
बेटा अपनी माँ से कहता: माँ मुझे चॉकलेट दो वरना पापा से कह दूंगा! कि
मेरे सोने के बाद रोज़ गब्बर आता है!

28
बंता पेड़ पर चढ़ा ! तो ऊपर बैठे बन्दर ने पूछा : ऊपर क्यों आया?
बंता: सेब खाने!
बन्दर: यह तो आम का पेड़ है!
बंता: पता है सेब साथ लाया हूँ!

29
अध्यापक: ज़मीन पर रहने वाले जानवर बच्चे देते है! हवा में उड़ने वाले
अंडे देते है! वो कौन सी चीज़ है जो हवा में भी उड़ती है और बच्चे भी
देती है?
विद्यार्थी: एयर होस्टेस!

30 
बहु: माँ जी, यह अभी तक नहीं आये, कहीं कोई लड़की का चक्कर तो नहीं है
उनका?
माँ: अरे कल्मूही तू तो हमेशा गलत ही सोचती है! हो सकता है कि किसी ट्रक
के नीचे आ गया हो!

31
नर्स डॉक्टर से: सर बैड न० 6 वाले मरीज का बी.पी. तीन बार चेक कर लिया
है! बहुत हाई है!
डॉक्टर: एक बार फिर से चेक करो! पर अपने ऊपर के 2 बटन जरुर बंद कर लेना!

32
प्रेमिका:मैं अपनी सारी जायदाद साधुओं को दान कर दूंगी! (प्रेमी उठकर
जाने लगा )
प्रेमिका: तुम कहाँ चले?
प्रेमी: साधू बनने!

33 
लड़की:पंडितजी मैं 2 लड़को से प्यार करती हूँ! मेरी शादी किस से होगी! वो
खुशनसीब कौन होगा?
पंडित: पहले से शादी होगी और दूसरा खुशनसीब होगा!

34 
लड़का : मैडम आपकी सैंडल बहुत खूबसूरत है!
लड़की : उतारूँ क्या?
लड़का : आपकी साड़ी उससे से भी खूबसूरत है!

35 
ड्राईवर : संता जी पेट्रोल ख़त्म हो गया है! गाड़ी आगे नहीं जा सकती!
संता : अरे यार! चलो फिर गाड़ी वापिस घर ले चलो!

36
पति : गुरुदेव मुझे पत्नी को वश में करने का कोई मन्त्र बताइये!
साधू : बच्चा मुझे अगर कोई उपाय मालूम होता तो मैं साधू क्यों बनता?

37 
संता डॉक्टर के क्लिनिक में गया
डॉक्टर : अगर तुम लड़कियों का पीछा नहीं छोड़ोगे तो मर जाओगे !
संता : लड़कियों का पीछा करने से कोई कैसे मर सकता है ?
डॉक्टर : तुम जिन लड़कियों के पीछे घूमते हो उनमे से एक लड़की मेरी है !

38
बच्चा : पापा पापा क्या हेमा आंटी के घर में एक भी दरवाज़ा नहीं है ?
पापा : है क्यों नहीं ! कम से कम 7-8 दरवाज़े हैं !
बच्चा : पापा फिर आप उनके घर खिड़की से कूदकर क्यों जाते हैं ?

39
किसी कॉलगर्ल ने अर्ज किया है!
धीरे-धीरे करो सनम! मंदी का जमाना है!
इस छोटी सी जगह से पूरी जिन्दगी भर कमाना है!

40
अपने बच्चे से: बेटा अंगूठा नहीं चूसते हैं नहीं तो पेट फूल जाता है!
एक दिन उस बच्चे ने एक गर्भवती महिला को देखा और उसके पास जा कर बोला
मुझे पता है आपने क्या चूसा है!

Friday, 9 October 2015

वह क्या कारण था कि गर्भवती माता सीता को राजमहल छोड़ कर जंगल जाना पड़ा था। जानने के लिए पढ़ें

वह क्या कारण था कि गर्भवती माता सीता को राजमहल छोड़ कर जंगल जाना  पड़ा था।  जानने के लिए पढ़ें 




एक किंवदंती है जो बताती है कि दशरथ वधू माता सीता द्वारा जब किसी को तड़पाया गया तो उन्हें उसकी सजा भोगनी पड़ी थी. इस घटना को बहुत कम लोग ही जानते हैं. किस गर्भवती को तड़पाया था माँ सीता ने? किसने दिया था माता सीता को श्राप? माता सीता को उस श्राप की कौन सी सजा मिली थी? सीता मिथिला नरेश जनक की पुत्री थी. 

एक दिन उद्यान(बगीचे) में खेलते हुए कन्या सीता को एक नर व मादा तोते का जोड़ा दिखाई पड़ा. वो दोनों आपस में बातें कर रहे थे. वो जोड़ा ये बात कर रहे थे कि भूमंडल में राम नाम का बड़ा प्रतापी राजा होगा जिसकी अत्यंत सुंदर पत्नी सीता होगी. उत्सुकतावश सीता अपने को रोक ना सकी और उनकी बातें सुनने लगी. उन्हें अपने ब्याह के बारे में सुन अच्छा लग रहा था. इसी उमंग में उन्होंने बातचीत में मग्न तोते के उस जोड़े को पकड़वा लिया. सीता उनसे अपने और श्रीराम के बारे में और भी बातें सुनना चाहती थी इसलिए उन्होंने उस जोड़े से पूछा कि उन्हें राम और उसके विवाह के बारे में ये बातें कहाँ से पता चली. तोते ने कहा कि उन्होंने ये बात महर्षि वाल्मीकि के मुख से उनके आश्रम में शिष्यों को पढ़ाते वक्त सुनी. इस पर सीता ने कहा कि ‘’तुम जनक की जिस पुत्री के बारे में बात कर रहे हो वो मैं ही हूँ. तुम्हारी बातें मुझे रोमांचित कर रही है इसलिए अब मैं तुम्हें तब छोड़ूँगी जब मेरा विवाह श्रीराम से हो जाएगा.’’ 

तोते ने याचना करते हुए कहा कि ‘’हे देवी! हम पक्षी हैं जिसे घर में सुख नहीं मिल सकता है. हमारा काम ही आसमाँ में विचरण करना है.’’ सीता ने नर तोते को आज़ाद कर दिया और कहा कि ‘’ठीक है तुम सुखपूर्वक विचरो, परंतु तुम्हारी पत्नी को मैं तब छोड़ूँगी जब मुझे राम प्राप्त हो जाएँगे.’’ नर तोते ने फिर गिड़गिड़ाते हुए कहा हे सीते मेरी यह पत्नी गर्भ से है. मैं इसका वियोग सह ना पाऊँगा. 

कन्या सीता ने फिर भी मादा तोते को नहीं छोड़ा. इस पर क्रोध में आकर मादा तोते ने सीता को श्राप दिया कि ‘’जैसे तू मेरी गर्भावस्था में मेरे पति से मुझे दूर कर रही है उसी प्रकार तुझे भी अपनी गर्भावस्था में अपने राम का वियोग सहना पड़ेगा.’’ इतना कहते ही मादा तोते ने प्राण त्याग दिया. कुछ समय बाद उसके वियोग में व्यथित नर तोते ने भी अपने प्राण त्याग दिए. सालो बाद इसी श्राप के कारण ही माता सीता को श्रीराम ने उनकी गर्भावस्था के दैरान ही वन में भेज दिया था.

Thursday, 8 October 2015

मालूम नही किसने लिखा है, पर क्या खूब लिखा है..

मालूम नही किसने लिखा है, पर क्या खूब लिखा है..


नफरतों का असर देखो,
जानवरों का बटंवारा हो गया,

गाय हिन्दू हो गयी ;
और बकरा मुसलमान हो गया.

मंदिरो मे हिंदू देखे, 
मस्जिदो में मुसलमान,

शाम को जब मयखाने गया ;
तब जाकर दिखे इन्सान.

ये पेड़ ये पत्ते ये शाखें भी परेशान हो जाएं
अगर परिंदे भी हिन्दू और मुस्लमान हो जाएं

सूखे मेवे भी ये देख कर हैरान हो गए
न जाने कब नारियल हिन्दू और 
खजूर मुसलमान हो गए..

न मस्जिद को जानते हैं , न शिवालों को जानते हैं
जो भूखे पेट होते हैं, वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.

अंदाज ज़माने को खलता है.
की मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है......

मैं अमन पसंद हूँ , मेरे शहर में दंगा रहने दो...
लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो....
.
.

जिस तरह से धर्म मजहब के नाम पे हम रंगों को भी बांटते जा रहे है

कि हरा मुस्लिम का है
और लाल हिन्दू का रंग है

तो वो दिन दूर नही
जब सारी की सारी हरी सब्ज़ियाँ मुस्लिमों की हों जाएँगी
और

हिंदुओं के हिस्से बस टमाटर,गाजर और चुकुन्दर ही आएंगे!

अब ये समझ नहीं आ रहा कि ये तरबूज  किसके हिस्से में आएगा ?

ये तो बेचारा ऊपर से मुस्लमान और अंदर से हिंदू ही रह जायेगा...

India ka system

एक बड़े मुल्क के राष्ट्रपति के बैडरूम की खिड़की सड़क की ओर खुलती थी। रोज़ाना हज़ारों आदमी और वाहन उस सड़क से गुज़रते थे। राष्ट्रपति इस बहाने जनता की परेशानी और दुःख-दर्द को निकट से जान लेते।
राष्ट्रपति ने एक सुबह खिड़की का परदा हटाया। भयंकर सर्दी। आसमान से गिरते रुई के फाहे। दूर-दूर तक फैली सफ़ेद चादर। अचानक उन्हें दिखा कि बेंच पर एक आदमी बैठा है। ठंड से सिकुड़ कर गठरी सा होता।
राष्ट्रपति ने पीए को कहा -उस आदमी के बारे में जानकारी लो और उसकी ज़रूरत पूछो।

दो घंटे बाद। पीए ने राष्ट्रपति को बताया - सर, वो एक भिखारी है। उसे ठंड से बचने के लिए एक अदद कंबल की ज़रूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा -ठीक है, उसे कंबल दे दो।
अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से पर्दा हटाया। उन्हें घोर हैरानी हुई। वो भिखारी अभी भी वहां जमा है। उसके पास ओढ़ने का कंबल अभी तक 
नहीं है।
राष्ट्रपति ने गुस्सा हुए और पीए पूछा -यह क्या है? उस भिखारी को अभी तक कंबल क्यों नहीं दिया गया?

पीए ने कहा -मैंने आपका आदेश सेक्रेटरी होम को बढ़ा दिया था। मैं अभी देखता हूं कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।
थोड़ी देर बाद सेक्रेटरी होम राष्ट्रपति के सामने पेश हुए और सफाई देते हुए बोले - सर, हमारे शहर में हज़ारों भिखारी हैं। अगर एक भिखारी को कंबल दिया तो शहर के बाकी भिखारियों को भी देना पड़ेगा। और शायद पूरे मुल्क में भी। अगर न दिया तो आम आदमी और मीडिया हम पर भेदभाव का इल्ज़ाम लगायेगा।

राष्ट्रपति को गुस्सा आया -तो फिर ऐसा क्या होना चाहिए कि उस ज़रूरतमंद भिखारी को कंबल मिल जाए।

सेक्रेटरी होम ने सुझाव दिया -सर, ज़रूरतमंद तो हर भिखारी है। आपके नाम से एक 'कंबल ओढ़ाओ, भिखारी बचाओ' योजना शुरू की जाये। उसके अंतर्गत मुल्क के सारे भिखारियों को कंबल बांट दिया जाए।

राष्ट्रपति खुश हुए। अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से परदा हटाया तो देखा कि वो भिखारी अभी तक बेंच पर बैठा है। राष्ट्रपति आग-बबूला हुए।
सेक्रेटरी होम तलब हुए। उन्होंने स्पष्टीकरण दिया -सर, भिखारियों की गिनती की जा रही है ताकि उतने ही कंबल की खरीद हो सके।
राष्ट्रपति दांत पीस कर रह गए। अगली सुबह राष्ट्रपति को फिर वही भिखारी दिखा वहां। खून का घूंट पीकर रहे गए वो।

सेक्रेटरी होम की फ़ौरन पेशी हुई। विनम्र सेक्रेटरी ने बताया -सर, ऑडिट ऑब्जेक्शन से बचने के लिए कंबल ख़रीद का शार्ट-टर्म कोटेशन डाला गया है। आज शाम तक कंबल ख़रीद हो जायेगी और रात में बांट भी दिए जाएंगे।

राष्ट्रपति ने कहा -यह आख़िरी चेतावनी है।
अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की पर से परदा हटाया तो देखा बेंच के इर्द-गिर्द भीड़ जमा है। राष्ट्रपति ने पीए को भेज कर पता लगाया। पीए ने लौट कर बताया -कंबल नहीं होने के कारण उस भिखारी की ठंड से मौत हो गयी है।

गुस्से से लाल-पीले राष्ट्रपति ने फौरन से पेश्तर सेक्रेटरी होम को तलब किया। सेक्रेटरी होम ने बड़े अदब से सफाई दी -सर, खरीद की कार्यवाही पूरी हो गई थी। आनन-फानन हमने सारे कंबल बांट भी दिए। मगर अफ़सोस कंबल कम पड़ गये।

राष्ट्रपति ने पैर पटके -आख़िर क्यों? मुझे अभी जवाब चाहिये।
सेक्रेटरी होम ने नज़रें झुका कर कहा -सर, भेदभाव के इलज़ाम से बचने के लिए हमने अल्फाबेटिकल आर्डर से कंबल बांटे। बीच में कुछ फ़र्ज़ी भिखारी आ गए। आख़िर में जब उस भिखारी नंबर आया तो कंबल ख़त्म हो गए।

राष्ट्रपति चिंघाड़े -आखिर में ही क्यों?

सेक्रेटरी होम ने भोलेपन से कहा -सर, इसलिये कि उस भिखारी का नाम 'जेड' से शुरू होता था।
Ye he india ka system 

Monday, 5 October 2015

Varanasi-बनारस- What do you want to know about Varanasi before coming

Varanasi-बनारस- What do you want to know about Varanasi before coming


कैसे आएं:
बनारस आने के लिए देश के लगभग हर कोने से रेल यातायात सुलभ है। यहां का बाबतपुर हवाई अड्डा दिल्ली सहित सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। स्थानीय परिवहन के लिए ऑटो, किराए पर टैक्सी सुलभ है।





कब आएं:
सभी मौसम यहां के लिए अनुकूल हैं। गर्मी के बावजूद बनारस की सुबह और शाम बहुत सुहानी होती है।

क्या खाएं:
बनारस का अपना खानपान है। उत्तर भारत के प्रसिद्ध व्यंजनों के साथ ही यहां देश-दुनिया के प्रसिद्ध खाने सुलभ हैं। वैसे बनारस की खासियत है यहां की लस्सी और दूध। सुबह के समय कचौरी और जलेबी खाएं और दोपहर में सादा खाना। शाम को लौंगलता के साथ समोसा और गुलाब जामुन ले सकते हैं। इसके बाद बनारस की प्रसिद्ध ठंडाई पीना और पान खाना न भूलें। बनारसी साडियां और सिल्क के कपडे तो दुनियाभर में अपनी अलग पहचान रखते है। इसलिए थोडी खरीददारी भी करें।

~कहां-कहां जाएं~


बाबा विश्वनाथ मंदिर

गंगा के तट पर स्थित शिवलिंग 12 ज्योतिर्र्लिंगों में से एक है। तंग गलियों के बीच से होकर मंदिर तक जाना पड़ता है। मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर यहां सुरक्षा काफी कड़ी कर दी गई है। गली में भगवान को चढ़ाने के लिए फूल-प्रसाद के अलावा कपड़ों, रत्नों की भी दुकानें हैं। आगे पुलिस की तलाशी के बाद आप अन्नपूर्ण मंदिर के आगे से होकर बाबा विश्वनाथ मंदिर में पहुंचेगे। पंजाब के महाराजा रणीजत सिंह द्वारा स्वर्णाच्छादित कराए गए गुंबद के नीचे चांदी के अर्घे में श्यामवर्ण का शिवलिंग स्थापित है। यहां पांच बार आरती और पूजन होता है। मंदिर की व्यवस्था सरकार करती है। मंदिर सुबह 4 बजे से 11 बजे तक और फिर दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। रात 11 बजे भगवान की भव्य शयन आरती होती है। बाहर निकलकर मां अन्नपूर्णा मंदिर के दर्शन होते हैं।







ज्ञानवापी:
विश्वनाथ मंदिर के बगल स्थित मस्जिद में श्रृंगारगौरी मां की मूर्ति है। मस्जिद के बाहर मंदिर परिसर में विशाल कुंआ है और उसके बाहर विशालकाय नंदी है जो मस्जिद की ओर देख रहा है। यहां कुएं का जल लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।







काल भैरव:
काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। बाबा विश्वनाथ से लगभग एक किमी दूरी पर यह मंदिर स्थित है।






Story of Kala Bhairav*
kala bhairava was a mendicant(beggar) with a begging bowl in hand. the begging bowl was not just any vessel. it was the skull of brahma's fifth head. lord shiva cut it off to humble brahma and vishnu.
So here goes the story:
Brahmâ and Vishnu were disputing with each other for the status of supreme God and appealed to the testimony of the four Vedas, which unanimously proclaimed Rudra-Shiva as the Ultimate Truth of the Universe. But the disputants were unable to accept that Rudra, endowed with so many revolting symbols of impurity and degradation, could be identical with the Absolute Reality of Brahman. Brahmâ laughed scornfully: "How could the Brahman, free of all attachment, lustily sport with his wife in the company of his troop of deformed churn-goblins (pramatha)?" However, Rudra's supremacy was finally reconfirmed by the esoteric sound-syllable, Omkâra, quintessence of the Veda and most condensed symbol of Brahman, who pointed out that Shiva's wife is not adventitious to her husband but on the contrary embodies his own blissful essence. Just then an immense pillar of flame manifested itself in their midst, within which was recognized the towering figure of the three-eyed Rudra bearing his trident, serpents and crescent moon. But the fifth head of Brahmâ taunted him: "I know who you are, Rudra, whom I created from my forehead. Take refuge with me and I will protect you, my son!"
Overflowing with anger, Shiva created a blazing Bhairava in human form, addressing this Kâlabhairava as "Lord of Time-Death" (kâla) for he shone like the god of Death: "You are called Bhairava because you are of terrifying features and are capable of supporting the universe. You are called Kâla-Bhairava, for even Time-Death is terrified of you." He ordered him to chastise Brahmâ, promising him in return eternal suzerainty over his city of Kâshî (Vârânasî), the cremation-ground of the Hindu universe, where final emancipation is assured. In a trice, Bhairava ripped off Brahmâ's guilty head with the nail of his left thumb. Seeing this, the terrified Vishnu eulogized Shiva and devotedly recited his sacred hymns, followed in this by the repentant Brahmâ. Thereby they gained his protection by realizing and acknowledging the supreme reality of Shiva. The severed head immediately stuck to Bhairava's hand, where it remained in the form of the skull, destined to serve as his insatiable begging-bowl.Enjoining him to honor Vishnu and Brahmâ, Shiva then directed Bhairava to roam the world in this beggarly condition to atone for the sin of Brahmanicide. "Show to the world the rite of expiation for removing the sin of Brahmanicide. Beg for alms by resorting to the penitential rite of the skull (kapâlavrata)." Creating a maiden renowned as 'Brahmanicide' (brahmahatyâ), Shiva instructed her to relentlessly follow Bhairava everywhere until he reached the holy city of Kâshî to which she would have no access.
Observing the Kâpâlika rite with skull in hand and pursued by the terrible Brahmahatyâ, Bhairava sported freely, laughing, singing and dancing with his goblin horde (pramathas). Stealing more than the hearts of all women, even the chaste wives of the Seven Vedic Sages (sapta-rshi) as he passed through the Daru forest, the erotic ascetic arrived at Vishnu's door to seek redemption only to find his entry barred by the guard, Vishvaksena. Spearing the latter and heaving the corpse of this Brahman on his shoulder, he pressed before Vishnu with outstretched begging-bowl. Vishnu split his own forehead-vein (see pic 2) but the out-flowing blood, the only suitable offering, could not fill the skull though it flowed for eons. When Vishnu then tried to dissuade Brahmahatyâ from tormenting Bhairava, the criminal observed that "beggars are not intoxicated by the alms they receive as (are others) by drinking the wine of worldly honor." Vishnu venerated him as the Supreme Being, untainted by sins like Brahmanicide, and acknowledged that his dependence and degradation were a mere fancy. Before leaving joyously to beg elsewhere, Bhairava reciprocated by recognizing Vishnu as his foremost disciple and acknowledged the latter's status as "grantor of boons to all the gods." On arriving at Kâshî, Brahmahatyâ sank into the nether-world, and the holy ground on which the skull fell, freeing Bhairava from his Brahmanicide, came to be known as Kapâlamocana. It was on the eighth day (ashtamî) in the dark (waning moon) half of the month of Mârgashîrsha that Lord Shiva manifested himself as Bhairava. Ever since, by performing ablution at Kapâlamocana one is rid of even the worst sin of brahmanicide (brahmahatyâ); and whosoever fasts on this day (Bhairavâshtamî) in front of Kâlabhairava (temple at Kâshî) and stays awake at night is freed from great sins.

The original Kâla Bhairava temple was located on the banks of the Kapâlamocana Tîrtha itself, in the Omkâreshvara area north of Maidâgin in Vâranasî, where Bhairava remained as the 'Sin-Eater' (Pâpa-Bhakshana) par excellence to devour the accumulated sins of devotees and pilgrims. If the pilgrims to Kâshî do not fear death there, this would be because their pilgrimage to the Mahâshmashâna is conceived on the ritual model of Bhairava's own arrival at Kâshî for absolution from his terrible sin and his subsequent establishment there. The paradox of Bhairava's scapegoat function even after his 'purification' can be explained as a 'lawful irregularity' resulting from the two opposing valorizations, diachronically disjoined in the myth, of his transgressive essence; it matches the complementary paradox of the pure Kâshî-Vishvanâtha himself being identified esoterically with the impure criminal Bhairava.


दुर्गाकुंड:
आदिशक्ति मां दुर्गा का यह मंदिर पवित्र सरोवर दुर्गाकुंड के किनारे है। मान्यता है कि यहां मां की मूर्ति को स्थापित नहीं किया गया था बल्कि स्वयं प्रकट हुई थी। नवरात्रि में यहां दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।





तुलसी मानस मंदिर:
दुर्गाकुंड के नजदीक ही सफेद संगमरमर से बना विशाल तुलसी मानस मंदिर है। भगवान राम को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 1964 में हुआ था। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण उसी जगह पर किया गया है जहां पर बैठकर तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना की थी। मानस मंदिर की दीवारों पर रामचरित मानस की चैपाइयां लिखी है।






संकटमोचन मंदिर:
मानस मंदिर से आधा किमी की दूरी पर स्थित संकटमोचन मंदिर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। यहां साल में एक बार संगीत समारोह आयोजित होता जिसमें विख्यात कलाकार प्रस्तुति देते हैं।








भारतमाता मंदिर:
कैंट स्टेशन से लगभग दो किमी दूर भारत माता को समर्पित यह एक अनोखा मंदिर है। 1936 में इस मंदिर का निर्माण बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने करवाया था। मंदिर में अविभाजित भारत का नक्शा बना है। संगमरमर से बने इस नक्शे में, मैदान, नदियों, पहाड़ों और समुद्र को बहुत ही बारीकी से उकेरा गया है। इसके अलावा काशी कई छोटे-बड़े अन्य मंदिर भी हैं।





~बनारस के घाट~

बनारस शहर को चंद्राकार घेर हुए गांगा के छोटे-बड़े 84 घाट हैं। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक पैदल घूमने का अपना ही मजा है। अस्सी घाट के नजदीक ही महारानी लक्ष्मीबाई का जन्मस्थल है। आगे दसाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट और भी.....। सुबह-शाम इन घाटों पर घूमने का अपना ही आनंद है। बनारस के घाट पर बैठकर सूर्योदय देखना अपने आप में अद्भुद अनुभव है। फिर शाम को गंगा आरती। आध्यात्म और संगीत का अनुपम संगम। सूर्याेदय और गंगा आरती देखने के लिए प्रतिवर्ष लाखों लोग आते हैं। यहां नाव से भी आरती का आनंद लिया जा सकता है। यहीं बीच में है मणिकर्णिका घाट। जहां से गुजरते हुए बरबस संसार के सबसे बड़े सच से साक्षात्कार होता है। कहते हैं इस महाश्मशान में जिसका अंतिम संस्कार होता है उसे स्वर्ग में जगह मिलती है।

बनारस में चर्च और कई प्रसिद्ध मसि्जद भी हैं। हां, बनारस आएं है तो कबीर की जन्मस्थली, लहरतारा और रविदास मंदिर देखकर ही जाएं।

देव दीपावली :
कार्तिक पूर्णिमा के दिन वाराणसी में देव दीपावली मनाई जाती है। यह उत्सव बहुत ही अद्भुत और दुर्लभ है। इस दिन शहर के सभी घाटों को मिट्टी के दीये जलाकर सजाया जाता है। इस दृश्य को देखकर ऐसा लगता है कि मानों आकाश के सारे तारे बनारस के घाट पर उतरकर भगवान शिव की महाआरती कर रहे हैं।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय:
वाराणसी को 'सर्वविद्या की राजधनी' कहा जाता है। महामना पंडित मदनमोहन मालवीय ने 1916 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। 1300 एकड़ में फैला विश्वविद्यालय एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विवि है। इसके परिसर में स्थित नया विश्वनाथ मंदिर भी अच्छा दर्शनीय स्थल है। यह भव्य मंदिर परिसर की शान है। बनारस जाएं तो यहां जरूर जाएं। दुनिया भर में बीचएयू नाम से प्रसिद्ध इस विवि में देश सहित दुनिया के कई देशों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

बनारस में काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विवि और सारनाथ में तिब्बत उच्च शिक्षण संस्थान भी है।

भारत कला भवन:
काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में स्थित यह कला और शिल्प संग्रहालय विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां 15वीं और 16वीं शताब्दी की कई शिल्पकारियां रखी हैं। इसके साथ ही मुगलकाल तथा अन्य राजाओं के शासन काल की पेंटिंगों का विशाल संग्रह है। इस संग्रहालय में पुराने सिक्कों का भी बहुत अच्छा संग्रह है।

~आसपास~

रामनगर किला:
शहर से 14 किलोमीटर दूर गंगा के पूर्वी किनारे पर महाराजा काशी का किला है। इसका निर्माण महाराजा बलवंत सिंह ने करवाया था। लाल पत्थरों से निर्मित इस किले को संग्रहालय में बदलकर आम जनों के लिए खोल दिया गया है। इस संग्रहालय में राजसी ठाठबाट की तमाम चीजें गाडिय़ां, गहने, कपड़े आदि के अलावा अस्त्र-शस्त्र का विशाल संग्रह है। अपनी तरह का यह एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय है।

~सारनाथ~

बौद्धध्र्मावलम्बियों के लिए विशेष महत्व रखने वाला यह स्थल कई मायनों में महत्वपूर्ण है। भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश यहीं दिया था।

धमेक स्तूप:
यह स्तूप सारनाथ की पहचान है। 43.6 मीटर लम्बा यह स्तूप ईंट और पत्थरों से बना हुआ है। इसमें भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष रखे गए हैं।

मूलगंध कुटी विहार:
महात्मा बुद्ध का यह आधुनिक मंदिर महाबोधि सोसाइटी द्वारा बनवाया गया है। जिसमें भगवान बुद्ध की मनमोहक मूर्ति स्थापित है। कुछ पुराने मंदिर यहां जर्जर भी हो चुके हैं जिनका पुनरोद्धार कराया जा रहा है। यहां एक छोटा सा चिडिय़ा घर और पुराने अवशेष हैं।

सारनाथ संग्रहालय:
इस संग्रहालय में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ संरक्षित है। इसके अलावा यहां बुद्ध और बोध्सित्व की मूर्तिकला का विशाल और दुर्लभ संग्रह है।
,
.
.
.
काशी में भगवान ''शिव'' ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रगट हुए थे। सम्राट विक्रमादित्य ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। 
मंदिर को लूटने आए महमूद गजनवी के भांजे सालार मसूद को सम्राट सुहेल देव पासी ने मौत के घाट उतारा था। 
मंदिर को 1194 में कुतुबब्दीन ने तोड़ा। मंदिर फिर से बना।
1447 में जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह ने फिर इसे तोड़ा। 
1494 में मुस्लिम शासको ने काशी के विश्वनाथ मंदिर सहित सभी मंदिरों को तोड़ दिया.काशी में एक भी मंदिर नहीं बचा था.
1585 में राजा टोडरमल की सहायता से फिर मंदिर बना।
काशी विश्वनाथ के मूल मंदिर के स्थान पर आज ज्ञानवापी मस्जिद है.>>>
2.9.1669 को औरंगजेब ने काशी-विश्वनाथ मन्दिर फिर से ध्वस्त करा दिया और उसी जगह मस्जिद का निर्माण करा दिया.जिसका नाम आज ज्ञानवापी मस्जिद है.
औरंगजेब ने ही मथुरा में कृष्णजी का मंदिर तोड़वा कर वहां ईदगाह बनवाई थी।
1752 से लेकर 1780 के बीच मराठा सरदार दत्ता जी सिंधिया व मल्हार राव होल्कर ने काशी विश्वनाथ मन्दिर की मुक्ति के प्रयास किए।
मूल मंदिर के थोड़ी दूर पर वर्तमान काशीविश्वनाथ मंदिर है >>>>
7 अगस्त, 1770 में महाद जी सिन्धिया ने दिल्ली के बादशाह शाह आलम से मन्दिर तोडऩे की क्षतिपूर्ति वसूल करने का आदेश जारी करा लिया। 
लेकिन तब तक काशी पर ईस्ट इंडिया कम्पनी का प्रभाव हो गया था, इसलिए मंदिर का नवीनीकरण रुक गया।
इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 में विश्वनाथ मंदिर बनवाया, जिस पर पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने 9 क्विंटल सोने का छत्र बनवाया। ग्वालियर की महारानी बैजाबाई ने ज्ञानवापी का मंडप बनवाया और महाराजा नेपाल ने वहां नन्दी की विशाल प्रतिमा स्थापित करवाई।
काशी विश्वनाथ मंदिर का मुकदमा मुस्लमान हार चुके है >>>>
11 अगस्त, 1936 को दीन मुहम्मद, मुहम्मद हुसैन और मुहम्मद जकारिया ने स्टेट इन काउन्सिल में प्रतिवाद संख्या-62 दाखिल किया और दावा किया कि सम्पूर्ण परिसर वक्फ की सम्पत्ति है। लम्बी गवाहियों एवं ऐतिहासिक प्रमाणों व शास्त्रों के आधार पर यह दावा गलत पाया गया और 24 अगस्त 1937 को वाद खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील संख्या 466 दायर की गई लेकिन 1942 में उच्च न्यायालय ने इस अपील को भी खारिज कर दिया। कानूनी गुत्थियां साफ होने के बावजूद मंदिर-मस्जिद का मसला आज तक फंसा कर रखा गया है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास >>>>

अमेरिका के लेखक तथा साहित्यकार मार्क ट्विन ने काशी कि यात्रा के बाद लिखा कि ''बनारस'''' इतिहास से भी पुराना नगर है. वह परंपराओं से पुराना है। वह कहावतों और कहानियों से भी पुराना है। विश्व कि समस्त सभ्यताओ से पुराना है. यहां भूत, वर्तमान, शाश्वत तथा निरंतरता साथ-साथ विद्यमान हैं। काशी गंगा के पश्चिम किनारे पर स्थित है।
चीनी यात्री हुएन सांग (629-675) ने अपनी काशी यात्रा के उल्लेख में 100 फुट ऊंची शिव मूर्ती वाले विशाल तथा भव्य मंदिर का वर्णन किया है.
बौद्ध धर्म के प्रभाव को कम करने के लिए शंकराचार्य का आगमन भी यहीं हुआ और उन्होंने वैदिक धर्म की स्थापना की।
महर्षि पतंजलि ने अपना काव्य यहीं लिखा था। संत कबीर ने संत मत की स्थापना यहीं की।
मीरा बाई के गुरु संत रैदास (रविदास) भी काशी के निवासी थे। 
रामचरितमानस और अन्य ग्रंथों की रचना गोस्वामी तुलसी दास ने यहीं पर की थी।
काशी नागरी प्रचारिणी सभा, भारतेंदु हरिचंद्र, मुंशी प्रेमचंद्र अैर जयशंकर प्रसाद आदि अन्य विद्वान भी काशी की ही देन हैं।
काशी के गंगा तट पर लगभग सौ घाट हैं।
इनमें से एक पर स्वयं हरिश्चंद्र ने श्मशान का मृतक दाह संस्कार लगान वसूलने का कार्य किया था।
आधुनिक शिक्षा का विश्वविद्यालय-बनारस हिंदू युनिवर्सिटी पं मदन मोहन मालवीय ने यहीं स्थापित किया था.
जयपुर के शासक जय सिंह ने एक वेधशाला भी बनवायी थी। यह 1600 सन में बनी थी। इसके यंत्र आज भी ग्रहों की सही नाप और दूरी बतलाते हैं।
स्कंध पुराण में 15000 श्लोको में काशी विश्वनाथ का गुणगान मिलता है। इससे सिद्ध होता है कि यह मंदिर हजारो वर्ष पुराना है.
इसके उत्तर में वारान तथा दक्षिण में आसी नदियां बहती हैं।
इसको काशी का, यानी प्रकाश का नगर भी कहते हैं। प्रकाश ज्योति शिव को भी कहते हैं। इसको ‘अविमुक्त’, अर्थात जिसको शिव ने कभी भी नहीं छोड़ा, भी कहते हैं। इसको ‘आनंद वन’ और ‘रुद्रवास’ भी कहते हैं।
भारत के सांस्कृतिक तथा धार्मिक ग्रंथो में ज्योति प्रकाश का विशेष अर्थ है ‘ज्योति’, जो अंधकार को मिटाती है, ज्ञान फैलाती है, पापों का नाश करती है, अज्ञान को नष्ट करती है आदि। काशी अज्ञान, पाप का नाश करने वाली है, मोक्ष और समृद्धि प्रदान करने वाली है.
प्रलयकाल में भी काशी का लोप नहीं होता। उस समय भगवान [शंकर]] इसे अपने [त्रिशूल] पर धारण कर लेते हैं और सृष्टि काल आने पर इसे नीचे उतार देते हैं। आदि सृष्टि स्थली भी यहीं भूमि बतलायी जाती है। इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने सृष्टि उत्पन्न करने का कामना से तपस्या करके आशुतोष को प्रसन्न किया था और फिर उनके शयन करने पर उनके नाभि-कमल से ब्रह्मा उत्पन्न हुए, जिन्होने सारे की रचना की। अगस्त्य मुनि ने भी विश्वेश्वर की बड़ी आराधना की थी और इन्हीं की अर्चना से श्रीवशिष्ठजी तीनों लोकों में पुजित हुए तथा राजर्षि विश्वामित्र ब्रह्मर्षि कहलाये।
सर्वतीर्थमयी एवं सर्वसंतापहारिणी मोक्षदायिनी काशी की महिमा ऐसी है कि यहां प्राणत्याग करने से ही मुक्ति मिल जाती है। भगवान भोलानाथ मरते हुए प्राणी के कान में तारक-मंत्र का उपदेश करते हैं, जिससे वह आवगमन से छुट जाता है, चाहे मृत-प्राण्ाी कोई भी क्यों न हो। मतस्यपुराण का मत है कि जप, ध्यान और ज्ञान से रहित एवंम दुखों परिपीड़ित जनों के लिये काशीपुरी ही एकमात्र गति है।
वामपंथी (हिन्दू विरोधी), सेक्युलर विचारधारा के इतिहासकार मंदिर को तोडना सही ठहराते है ये देश द्रोही इतिहासकार विदेशी मजहब से पैसे लेकर यही लिखे है >>>>>
सन 1669 ईस्वी में औरंगजेब अपनी सेना एवं हिन्दू राजा मित्रों के साथ वाराणसी के रास्ते बंगाल जा रहा था.रास्ते में बनारस आने पर हिन्दू राजाओं की पत्नियों ने गंगा में डुबकी लगा कर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने की इच्छा व्यक्त की …जिसे औरंगजेब सहर्ष मान गया, और, उसने अपनी सेना का पड़ाव बनारस से पांच किलोमीटर दूर ही रोक दिया !
फिर उस स्थान से हिन्दू राजाओं की रानियां पालकी एवं अपने अंगरक्षकों के साथ गंगाघाट जाकर गंगा में स्नान कर विश्वनाथ मंदिर में पूजा करने चली गई !
पूजा के उपरांत सभी रानियां तो लौटी लेकिन कच्छ की रानी नहीं लौटी , जिससे औरंगजेब के सेना में खलबली गयी और, उसने अपने सेनानायक को रानी को खोज कर लाने का हुक्म दिया …!
औरंगजेब का सेनानायक अपने सैनिकों के साथ रानी को खोजने मंदिर पहुंचा … जहाँ, काफी खोजबीन के उपरांत “”भगवान गणेश की प्रतिमा के पीछे”” से नीचे की ओर जाती सीढ़ी से मंदिर के तहखाने में उन्हें रानी रोती हुई मिली…. जिसकी अस्मिता और गहने मंदिर के पुजारी द्वारा लुट चुके थे …!
इसके बाद औरंगजेब के लश्कर के साथ मौजूद हिन्दू राजाओ ने मंदिर के पुजारी एवं प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम करवाई की मांग की.

जिससे विवश होकर औरंगजेब ने सभी पुजारियों को दण्डित करने एवं उस “”विश्वनाथ मंदिर”” को ध्वस्त करने के आदेश देकर मंदिर को तोड़वा दिया !उसी जगह ज्ञानवापी मस्जिद बना दी.