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Monday, 14 September 2015

।।चिकित्सकों को समर्पित ।।


उखड़ती साँसों को, वो अक्सर संभाल लेता है ! 
अच्छे अच्छों को, मौत के मुँह से निकाल लेता है !! 

न वो हिन्दू देखता है, न कभी मुसलमान देखता है ! 
खुदा का बंदा है वो, हर शख्स में बस इंसान देखता है !! 

जख्म  कितना भी गहरा हो, वो हिचकिचाता नहीं कभी ! 
घाव की गंदगी देखकर, वो सकुचाता नहीं कभी !! 

उसके हाथों में जो हुनर है, बखूबी जानता है वो ! 
अपने पेशे को खुदा की, इबादत मानता है वो !! 

जब भी जाता है वो ओ.टी., खुदा को याद करता है ! 
सफल हो जाए ऑपरेशन, यही फरियाद करता है !! 

रोग कितना भी बड़ा हो, वो जी जान लगा देता है ! 
मरीज को ठीक करने में, वो पूरा ज्ञान लगा देता है !! 

अगर हो जाए सफल तो, हजारों दुआएँ लेता है ! 
अगर वो हार जाए तो, लोगों का क्रोध सहता है !! 

खरी खोटी वो सुनता है, फिर भी खामोश रहता है ! 
अपनी असफलता का उसको, बहुत अफसोस रहता है !! 

वो जानता नहीं किसी को, मगर धीरज बंधाता है ! 
निरंतर कर्म के पथ पर, वो बढ़ते ही जाता है !! 

उसे मालूम है कि जिन्दगी, उस खुदा की रहमत है ! 
खुदा के बंदों की सेवा, मगर उसकी भी हसरत है

।।चिकित्सकों को समर्पित ।।

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