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Monday, 21 September 2015

हर समस्या को दूर करें मां दुर्गा के ये मंत्र

हर समस्या को दूर करें मां दुर्गा के ये मंत्र 


सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोअस्तुते।। 


मार्कण्डेय पुराण में ब्रह्माजी ने मनुष्यों के रक्षार्थ परमगोपनीय साधन, कल्याणकारी देवी कवच एवं परम पवित्र उपाय संपूर्ण प्राणियों को बताया, जो देवी की नौ मूर्तियां-स्वरूप हैं, जिन्हें 'नवदुर्गा' कहा जाता है। उनकी आराधना प्रतिपदा से महानवमी तक की जाती है। श्री दुर्गा के निम्न मंत्र धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने में सक्षम है। ऐसे ही स्रोत एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत पारायण से इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है। 

* ऐश्वर्य, सौभाग्य, आरोग्य, संपदा प्राप्ति एवं शत्रु भय मुक्ति के लिए- 

ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः। 
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥ 

* विघ्ननाशक मंत्र- 

सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरी। 
एवमेव त्याया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्‌॥ 

* आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के चमत्कारिक फल देने वाले मंत्र को स्वयं देवी दुर्गा ने देवताओं को दिया है :-  

देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌। 
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥ 

* विपत्ति नाश के लिए- 

शरणागतर्द‍िनार्त परित्राण पारायणे। 
सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥ 

सर्वकल्याण हेतु - 

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । 
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥ 

* बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप फलदायी है- 

सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। 
मनुष्यों मत्प्रसादेन भव‍िष्यंति न संशय॥ 

अन्य श्री दुर्गा मन्त्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ 
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्ज्वल प्रज्ज्वल 
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट्‍ स्वाहा ॥ 
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनी । 
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनी ॥1॥ 

नमस्ते शुम्भहन्त्रयै च निशुम्भासुरघातिनी । 
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ॥2॥ 

ऐंकारी सृष्टिरुपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका । 
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ॥3॥ 

चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी । 
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणी ॥4॥ 

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी । 
क्रां क्रीं क्रं कालिकादेवि शां शीं शुभं कुरु ॥5॥ 

जाप विधि : -  


नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन घटस्थापना के बाद संकल्प लेकर प्रातः स्नान करके दुर्गा की मूर्ति या चित्र की पंचोपचार या दक्षोपचार या षोड्षोपचार से गंध, पुष्प, धूप दीपक नैवेद्य निवेदित कर पूजा करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। शुद्ध-पवित्र आसन ग्रहण कर रुद्राक्ष या तुलसी या चंदन की माला से मंत्र का जाप एक माला से पांच माला तक पूर्ण कर अपना मनोरथ कहें। पूरी नवरात्रि जाप करने से वांच्छित मनोकामना अवश्य पूरी होती है। समयाभाव में केवल दस बार मंत्र का जाप निरंतर प्रतिदिन करने पर भी मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं।

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