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Saturday, 8 August 2015

Jokes ...................... What is similarity between Sun & Wife .


एक बार एक अत्यंत गरीब महिला जो ईश्वरीय शक्ति पर बेइंतिहा विश्वास करती थी। एक बार अत्यंत ही विकट स्थिति में आ गई। कई दिनों से खाने के लिए पुरे परिवार को नहीं मिला।
एक दिन उसने रेडियो के माध्यम से ईश्वर को अपना सन्देश भेजा कि वह उसकी मदद करे।
यह प्रसारण एक नास्तिक  ,घमण्डी और अहंकारी उद्योगपति ने सुना और उसने सोचा कि क्यों न इस महिला के साथ कुछ ऐसा मजाक किया जाये कि उसकी ईश्वर के प्रति आस्था डिग जाय।
उसने आपने सेक्रेटरी को कहा कि वह ढेर सारा खाना और महीने भर का राशन उसके घर पर देकर आ जाये और जब वह महिला पूछे किसने भेजा है तो कह देना कि " शैतान" ने भेजा है।
जैसे ही महिला के पास सामान पंहुचा पहले तो उसके परिवार ने तृप्त होकर भोजन किया ।
फिर वह सारा राशन अलमारी में रखने लगी।
जब महिला ने पूछा नहीं कि यह सब किसने भेजा है
  तो सेक्रेटरी से रहा नहीं  गया और पूछा ,
आपको क्या जिज्ञासा नही होती कि यह सब किसने भेजा है।
उस महिला ने बेहतरीन
जवाब दिया ,
मैं इतना क्यों सोंचू  या पूंछू
मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है,
मेरा भगवान जब आदेश देते है तो
शैतानों को भी उस आदेश का पालन करना पड़ता है।
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महाकवि कालिदास अपने समय के महान
विद्वान थे। उनके कंठ में साक्षात सरस्वती का
वास था। शास्त्रार्थ में उन्हें कोई पराजित
नहीं कर सकता था। अपार यश, प्रतिष्ठा और
सम्मान पाकर एक बार कालिदास को अपनी
विद्वत्ता का घमंड हो गया। उन्हें लगा कि
उन्होंने विश्व का सारा ज्ञान प्राप्त कर
लिया है और अब सीखने को कुछ बाकी नहीं
बचा। उनसे बड़ा ज्ञानी संसार में कोई दूसरा
नहीं। एक बार पड़ोसी राज्य से शास्त्रार्थ
का निमंत्रण पाकर कालिदास महाराज
विक्रमादित्य से अनुमति लेकर अपने घोड़े पर
रवाना हुए।
गर्मी का मौसम था,
धूप काफी तेज़ और
लगातार यात्रा से कालिदास को प्यास लग
आई। जंगल का रास्ता था और दूर तक कोई
बस्ती दिखाई नहीं दे रही थी। थोङी तलाश
करने पर उन्हें एक टूटी झोपड़ी दिखाई दी।
पानी की आशा में वो उस ओर बढ चले। झोपड़ी
के सामने एक कुआं भी था। कालिदास जी ने
सोचा कि कोई झोपड़ी में हो तो उससे पानी
देने का अनुरोध किया जाए। उसी समय
झोपड़ी से एक छोटी बच्ची मटका लेकर
निकली। बच्ची ने कुएं से पानी भरा और जाने
लगी।
कालिदास उसके पास जाकर बोले " बालिके!
बहुत प्यास लगी है ज़रा पानी पिला दे।"
बच्ची ने कहा, "आप कौन हैं? मैं आपको जानती
भी नहीं, पहले अपना परिचय दीजिए।"
कालिदास को लगा कि मुझे कौन नहीं
जानता मुझे परिचय देने की क्या आवश्यकता?
फिर भी प्यास से बेहाल थे तो बोले, "बालिके
अभी तुम छोटी हो। इसलिए मुझे नहीं जानती।
घर में कोई बड़ा हो तो उसको भेजो। वो मुझे
देखते ही पहचान लेगा।
मेरा बहुत नाम और
सम्मान है दूर-दूर तक। मैं बहुत विद्वान व्यक्ति
हूं।"
कालिदास के बड़बोलेपन और घमंड भरे वचनों से
अप्रभावित बालिका बोली, "आप असत्य कह
रहे हैं। संसार में सिर्फ दो ही बलवान हैं और उन
दोनों को मैं जानती हूं। अपनी प्यास बुझाना
चाहते हैं तो उन दोनों का नाम बाताएं?"
थोङी देर सोचकर कालिदास बोले, "मुझे नहीं
पता, तुम ही बता दो। मगर मुझे पानी पिला
दो। मेरा गला सूख रहा है।"
बालिका बोली, "दो बलवान हैं 'अन्न' और 'जल'। भूख और प्यास में इतनी शक्ति है कि बड़े से
बड़े बलवान को भी झुका दें। देखिए तेज़ प्यास ने
आपकी क्या हालत बना दी है।"
कलिदास चकित रह गए। लड़की का तर्क
अकाट्य था। बड़े से बड़े विद्वानों को
पराजित कर चुके कालिदास एक बच्ची के सामने
निरुत्तर खङे थे।
बालिका ने पुनः पूछा, "सत्य बताएं, कौन हैं
आप?" वो चलने की तैयारी में थी, कालिदास
थोड़ा नम्र होकर बोले, "बालिके! मैं बटोही
हूं।"
मुस्कुराते हुए बच्ची बोली, "आप अभी भी झूठ
बोल रहे हैं।
संसार में दो ही बटोही हैं। उन दोनों को मैं जानती हूँ, बताइए वो दोनों कौन हैं?"
तेज़ प्यास ने पहले ही कालिदास जी की
बुद्धि क्षीण कर दी थी। लेकिन लाचार होकर
उन्होंने फिर अनभिज्ञता व्यक्त कर दी।
बच्ची बोली, "आप स्वयं को बङा विद्वान बता रहे हैं और ये भी नहीं जानते? एक स्थान से
दूसरे स्थान तक बिना थके जाने वाला बटोही
कहलाता है। बटोही दो ही हैं, एक चंद्रमा और
दूसरा सूर्य जो बिना थके चलते रहते हैं। आप तो
थक गए हैं। भूख प्यास से बेदम हो रहे हैं। आप कैसे
बटोही हो सकते हैं?"
इतना कहकर बालिका ने पानी से भरा मटका उठाया और झोपड़ी के भीतर चली गई। अब तो कालिदास और भी दुखी हो गए। इतने
अपमानित वे जीवन में कभी नहीं हुए। प्यास से शरीर की शक्ति घट रही थी। दिमाग़ चकरा रहा था। उन्होंने आशा से झोपड़ी की तरफ़ देखा। तभी अंदर से एक वृद्ध स्त्री निकली। उसके हाथ में खाली मटका था। वो कुएं से पानी
भरने लगी।
अब तक काफी विनम्र हो चुके कालिदास बोले, "माते !प्यास से मेरा बुरा हाल है। भर पेट
पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा।"
बूढी माँ बोलीं, " बेटा मैं तुम्हे जानती नहीं।
अपना परिचय दो। मैं अवश्य पानी पिला दूँगी।"
कालिदास ने कहा, "मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें।" "तुम मेहमान कैसे हो सकते
हो?
संसार में दो ही मेहमान हैं। पहला धन और
दूसरा यौवन।
इन्हें जाने में समय नहीं लगता,सत्य बताओ कौन हो तुम?"
अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश कालिदास बोले "मैं सहनशील हूं। पानी पिला दें।"
"नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती
जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है,
उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज
के भंडार देती है।
दूसरे, पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच
बताओ कौन हो?"
कालिदास लगभग मूर्छा की स्थिति में आ गए
और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले, " मैं हठी
हूं।"
"फिर असत्य।
हठी तो दो ही हैं, पहला नख और दूसरा केश।
कितना भी काटो बार-बार
निकल आते हैं।
सत्य कहें ब्राह्मण कौन हैं आप?"पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके
कालिदास ने कहा, "फिर तो मैं मूर्ख ही हूं।"
"नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो। मूर्ख दो ही हैं।
पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है, और दूसरा दरबारी पंडित
जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।"
कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास
वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे।
उठो वत्स… ये आवाज़ सुनकर जब कालिदास ने
ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां
खड़ी थी।
कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए।
"शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार। तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा
को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे।
इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा।"
कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और
भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।
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तू तो 0nline होने पर भीReply नहीं करती... पगली,और हम कमबख्त,:
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हिचकियाँ आने पर भी Data 0n कर देते हैं ।।
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नई दिल्ली (1 अगस्त): सॉफ्ट ड्रिंक से जुड़ी एक खबर ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। ब्रिटेन के पूर्व फार्मासिस्ट नीरज नाइक ने 'दी रेनिगेड फार्मासिस्ट' नाम के अपने ब्लॉग में कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद शरीर के अंदर होने वाले प्रभावों को सबके सामने लाया है। इस ब्लॉग में उन्होंने दिखाया है कि कोका कोला पीने के 1 घंटे के अंदर शरीर में क्या-क्या होता है। सोशल साइट्स पर भी यह जानकारी काफी वायरल हो रही है।
डेली मेल के मुताबिक, नीरज नाइक ने एक ग्राफिक के माध्यम से बताया कि कैसे ये ड्रिंक्स शरीर से जरूरी खनिज तत्व बाहर कर देते हैं और आदमी मानसिक व शारीरिक रूप से बदलने लगता है:

पहले 10 मिनट: जब आप कोक का1 कैन पीते हैं तो आपके शरीर में 10 चम्मच शुगर एकसाथ जाती है। ये मात्रा 24 घंटे में लिए गए शुगर के बराबार होती है। अचानक इतना मीठा खाने से आपको उलटी भी हो सकती है लेकिन इसमें मिले फॉस्फोरिक एसिड के कारण ऐसा नहीं होता।

20 मिनट बाद: पीने के 20 मिनट बाद ही पीने वाले की ब्लड शुगर एकदम से बढ़ जाती है, जिसके कारण शरीर से इंसुलिन तेजी से निकलता है। शरीर का लिवर इस पर प्रतिक्रिया करता है और इसे फैट में बदलने लगता है।

40 मिनट बाद: पीने वालों के शरीर में कैफीन की काफी मात्रा चली जाती है। दूसरी तरफ ब्लड प्रेशर भी बढने लगता है। इसे देखते हुए आपका लिवर खून में और शुगर भेजता है। मस्तिष्क में खून जाना कम होता है।

45 मिनट बाद: इतने समय बाद आपके शरीर को हेरोइन (मादक पदार्थ) लेने जैसा लगने लगता है। शरीर डोपामाइन का उत्पादन बढ़ा देता है, जिससे दिमाग का खुशी देने वाला हिस्सा सक्रिय हो जाता है।

60 मिनट बाद: पीने के 1 घंटे के बाद 3 प्रक्रियाएं होती हैं-
फॉस्फोरिक एसिड आपके शरीर के निचली आंत में कैल्शियम, मैग्निशियम और जिंक को इकट्ठा करता है। इससे मेटाबोलिज्म बढ़ता है। शुगर और अन्य आर्टिफिशियल स्वीटनर्स की बढ़ी मात्रा के कारण मेटाबोलिज्म और बढ़ता है। इसके बाद लोग पेशाब के लिए जाते हैं, जिसमें कैल्शियम बाहर निकलता है।

2- कैफीन का तरल करने वाला गुण अपना असर दिखाना शुरु करता है और आप बार-बार पेशाव के लिए जाते हैं, जिससे शरीर से कैल्शियम, मैग्निशियम, जिंक, सोडियम और पानी बाहर चला जाता है जो वास्तव में आपकी हड्डियों में जाना था।

3- जैसे ही यह प्रक्रिया होती है मीठेपन का अहसास बढ़ जाता है। आप चिड़चिड़े और आलसी हो जाते हैं। कोक में वास्तव में मौजूद पानी यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है। इस तरह कोक पीने से आपके शरीर में हड्डियों और दांतों के लिए आवश्यक खनिज शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

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पति  अब तो मुझे शान्ति के साथ रहने दो
पत्नी आप शान्ति के साथ रहना चाहते हो तो
मुझे भी आनंद के साथ रहना हैं
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For a married man, the meaning of
'Aji Sunte ho' is
just like
'Big Boss Chahte hain.....'
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 लिखने वाले ने क्या खूब लिखा हे जिंदगी जब
'मायूस' होती हे तभी 'महसूस' होती हे...!
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Ek doctor ek din shayeri ke mood me tha .......ab Dekhiye usne davai kaise samjhayi
¤ दिल बहला के मोहब्बत को ना धमाल करें।
सीरप को अच्छी तरह से हिला के इस्तेमाल करें॥
¤ दिल मेरा टूट गया उठी जब उसकी डोली।
सुबह दोपहर शाम बस एक एक गोली॥
¤ लौट आओ कि मोहब्बत का सुरूर चखें।
तमाम दवायें बच्चों की पहुँच से दूर रखें॥
¤ दिल मेरा इश्क़ करने पे रज़ामंद रहेगा।
इतवार के दिन अस्पताल बन्द रहेगा॥
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संता कढ़ी चावल खा रहा था ।
तभी एक मक्खी कढ़ी चावल
पर आकर बैठ गई ।
संता : अरे कितनी भोली है तू !!
ये वो नहीं है जो तू समझ रही है !!
चल उड़ यहाँ से !!
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लडकों से निवेदन है कि
मेहरबानी कर के लड़कियों जैसे बाल ना रखें ......!
अभी अभी हमारा DOST एक activa के पीछे 5 किलोमीटर फालतू घूम के आया है.....!!
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Dad- beta tu bade hoke kya banna chahta hai?
Son- papa doctor
Dad- beta bade hoke pucha hai, buddha hoke nahi
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डॉक्टर - आपकी बीवी अब सिर्फ दो दिन की मेहमान
है। आई एम सॉरी..... ! 
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चम्पू - इसमें सॉरी की क्या बात है डॉक्टर साहब। निकाल
लेंगे ये दो दिन भी जैसे-तैसे...।
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What is similarity between
Sun    &   Wife  ......


Aap in dono ko
Ghoor k nahi dekh sakte......
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टीचर : अगर कोई स्कूल के सामने बम रखता
है तो क्या करोगे ?
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स्टूडेंट : 1-2 घंटे देखंगे
अगर कोई ले जाता है तो ठीक है
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वरना Staff Room में रख देंगे ! .
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 Examination Hall
Boy - Date?
Girl - No
Boy -आज की Date?
Girl - Exams चल रहे है अभी तो exams तक नो Date ok
Boy -दीदी आज की तारीख बता दो pls
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सबसे छोटी कविता...
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जिन्दगी एक जंग है,
जबतक बीवी संग है..
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जिस तेजी से टूथ पेस्ट में नमक, पुदीना, नींबू, बबूल
अदरख मिलाए जा रहे हैं...!!
जल्द ही इसे
"राष्ट्रीय चटनी" घोषित कर देना चाहिए।.
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जली को आग कहते हैं,
बुझी को राख कहते हैं,
Wah! Wahh!
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जिसका missed call देखते ही दारू उतर जाये,
उसे better half कहते हैं।.
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पति.. ( अपनी पत्नी से )- प्रिये । मैं तुम्हें बहुत
प्यार करता हूँ ?
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पत्नी - तो क्या मैं आपको नहीं करती ? मै तो
तुम्हारे लिये सारी दुनिया से लड सकती हूँ ..
...
पति- लेकिन तुम तो दिन रात मुझसे ही लडती
रहती हो ?
....
पत्नी - जानू.. तुम्ही तो मेरी दुनिया हो..
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मुजरेवाली
: हम ने आप को खुश किया
अब आप हम को खुश कर
दो हुज़ूर ...
संता भावुक हो गया और बोला:
अच्छा बहिन....
अब तू बैठ, मैं नाचता हूँ।..
 

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