Popads

Friday, 14 August 2015

jokes............ Ladies k Blouse:


 टीचर :- चुम्बकीय शक्ति प्रभाव किसे कहते हैं..?
.
.
.
.पप्पू :- जब कोई लड़की स्कूटी पर जाते हुए किसी बाइक सवार लड़के के पास से गुजरती है तो उस लड़के की बाइक की गति स्वत: ही बढ़ जाती है..लड़की द्वारा उत्पन्न किये गये इस गति परिवर्तन को ही" चुम्बकीय शक्ति प्रभाव" कहते हैं।
.और ..यदि ये प्रक्रिया नहीं होती है ..तो...इसका सीधा अर्थ ये है ..कि .लड़के में आयरन की कमी है ........
.
.
 एक टीचर ने बच्चे से पूछा :
स्कूल क्या है ….??
.
.
बहुत ही शानदार जवाब मिला
.
.
स्कूल वो जगह है ..
.
.
.
जहाँ पर हमारे पापा को लूटा जाता है
और
हमें कूटा जाता है ..!!
 
.
.
.
.
 Ladies k Blouse:
Yahan se Less,
Wahan se Less,
Kabhi sleeveLess,
Toh kabhi backLess,
Aur agar koi Aadmi ghoor k dekhe toh wo
Kutta Kamina Characterless...
.
.
.

मारवाड़ी व्यक्ति ने रेल में खाने का डिब्बा खोला और चूरमा खाने लगा पास में बैठे अंग्रेज ने पुछा - (what ) "वॉट" वॉट.
मारवाडी बोला बॉटवा वास्ते नही है खावा वास्ते लाया हूँ.......मंगता
.
.
.
.
जाने कैसे कैसे रूप, दिखाती हैं ये पत्नियाँ
फिर भी सबके मन को भाती हैं ये पत्नियाँ
भोला भोला पति बेचारा समझ नहीं पाता
किस बात पर कब रूठ जाती हैं ये पत्नियाँ
थोड़ी सी तकरार है, है फिर थोड़ा प्यार भी,
रुलाकर हमें, प्यार से, हंसाती हैं ये पत्नियाँ
भोर में थकावट है, शाम को सजावट है
सारे रिश्ते प्यार से, निभाती हैं ये पत्नियाँ
थोड़ी सी नजाकत है, है थोड़ी शरारत भी
नाज नखरे भी कभी, दिखाती हैं ये पत्नियाँ
सुबह शाम पूजा करतीं, और रसोई में लगतीं
खाने में जाने क्या क्या पकाती हैं ये पत्नियाँ
ख्यालों में कभी खोयीं, या रातों में नहीं सोयीं
अपने सारे गम हमसे, छुपातीं हैं ये पत्नियाँ
मांगें लम्बी उमर पति की, सारे व्रत रख कर
कभी पति से व्रत नहीं, रखातीं हैं ये पत्नियाँ
मन कभी उदास हो, या सोच में डूबे हों हम
होकर भावुक सीने से, लगाती हैं ये पत्नियाँ
छोड के बाबुल का घर, सपने आँखों में लिये
सजाने को घर पिया का, आतीं हैं ये पत्नियाँ
ना दिन में आराम है, ना रात को विश्राम है
कुछ भी हो, घर को घर बनाती हैं ये पत्नियाँ.
.
.
.
.
.
नहीं चाहिए मुझको हिस्सा माँ-बाबा की दौलत में 
चाहे वो कुछ भी लिख जाएँ भैया मेरे ! वसीयत में
नहीं चाहिए मुझको झुमका चूड़ी पायल और कंगन
नहीं चाहिए अपनेपन की कीमत पर बेगानापन
मुझको नश्वेर चीज़ों की दिल से कोई दरकार नहीं
संबंधों की कीमत पर कोई सुविधा स्वीकार नहीं
माँ के सारे गहने-कपड़े तुम भाभी को दे देना
बाबूजी का जो कुछ है सब ख़ुशी ख़ुशी तुम ले लेना
चाहे पूरे वर्ष कोई भी चिट्ठी-पत्री मत लिखना
मेरे स्नेह-निमंत्रण का भी चाहे मोल नहीं करना
नहीं भेजना तोहफे मुझको चाहे तीज-त्योहारों पर
पर थोडा-सा हक दे देना बाबुल के गलियारों पर
रूपया पैसा कुछ ना चाहूँ..बोले मेरी राखी है
आशीर्वाद मिले मैके से मुझको इतना काफी है
तोड़े से भी ना टूटे जो ये ऐसा मन -बंधन है
इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षाबंधन है
तुम भी इस कच्चे धागे का मान ज़रा-सा रख लेना
कम से कम राखी के दिन बहना का रस्ता तक लेना 

No comments:

Post a Comment