Saturday, 22 August 2015

हिंदी चुटकुले और आज का ज्ञान ....... एक औरत ने पंडित जी से घर की खुशहाली का उपाय पूंछा ...

हिंदी चुटकुले और आज का ज्ञान ....... एक औरत ने पंडित जी से घर की खुशहाली का उपाय पूंछा ... 


दिल्ली के मेट्रो ट्रेन में एक लडका 
रोजाना बुजुर्ग महिला के लिये 
अपनी सीट खाली कर देता था 
बुढिया भी बडे स्नेह के साथ 
रोज उसे कुछ काजू किशमिश ओर 
पिस्ते के टुकड़े खाने को दिया 
करती थी लडका खा लेता था 
कई दिनो तक ऐसा ही चलता रहा आखिरकार एक दिन 
उसने बूढी अम्मा से पूछा :आप 
रोज मुझे ये मेवे क्यो खाने को देती 
है ।बूढी अम्मा भावुक हो कर 
बोली : मुझे केडबरी फ्रूटस एंड नट 
बहुत पसंद है ।अब दांत तो रहे 
नहीं तो चाकलेट चूस लेती हूं ओर 
ड्राई फ्रूटस तुम्हे दे देती हूं ।
लड़का अभी तक बेहोश है।
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कल राधे माँ का जन्मदिन है..
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यह SMS 9 लोगो को भेजो तो राधे माँ ख्वाब में आकर आपसे संग डांस करेगी..!!
एक लड़के ने इसे झूंठ समझ कर डिलीट कर दिया,
तो ख्वाब में
आशाराम बापु आकर kiss कर के भाग गए..!! 
आगे आपकी मर्जी.....??
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आज का का ज्ञान…… 
चाय में गिरी हुई 
बिस्किट को
दुसरी बिस्किट से
निकालनें की कोशिश ना करें...!

वरना …
जो हाथ मे है
उससे भी हाथ धो बैठोगे !! 
वेसे ही आपकी एक बीबी है उसी से खुश रहे
दूसरी के चक्कर मे ना पड़े 
नही 
तो पहली से भी हाथ धोना पड़ सकता है
ज्ञान समाप्त
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पती ओफीस से घर आया तो देखा ।
पत्नि सो रही थी और उनके पैरो के पास एक कोब्रा साप कुडी लगा के बैठा था ।

पती : डस ले.... डस ले.... 
कोब्रा : डस नही रहा हु , चरन स्पषॅ करने आया हु।.....गुरुजी है हमारे ।
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उबलते पानी मे मेंढक.  
अगर मेंढक को गर्मा गर्म उबलते पानी में डाल दें तो वो छलांग लगा कर बाहर आ जाएगा और उसी मेंढक को अगर सामान्य तापमान पर पानी से भरे बर्तन में रख दें और पानी धीरे धीरे गरम करने लगें तो क्या होगा ?
मेंढक फौरन मर जाएगा ?
जी नहीं....
ऐसा बहुत देर के बाद होगा...
दरअसल होता ये है कि जैसे जैसे पानी का तापमान बढता है, मेढक उस तापमान के हिसाब से अपने शरीर को Adjust करने लगता है।
पानी का तापमान, खौलने लायक पहुंचने तक, वो ऐसा ही करता रहता है।अपनी पूरी उर्जा वो पानी के तापमान से तालमेल बनाने में खर्च करता रहता है।लेकिन जब पानी खौलने को होता है और वो अपने Boiling Point तक पहुंच जाता है, तब मेढक अपने शरीर को उसके अनुसार समायोजित नहीं कर पाता है, और अब वो पानी से बाहर आने के लिए, छलांग लगाने की कोशिश करता है।
लेकिन अब ये मुमकिन नहीं है। क्योंकि अपनी छलाँग लगाने की क्षमता के बावजूद , मेंढक ने अपनी सारी ऊर्जा वातावरण के साथ खुद को Adjust करने में खर्च कर दी है।
अब पानी से बाहर आने के लिए छलांग लगाने की शक्ति, उस में बची ही नहीं I वो पानी से बाहर नहीं आ पायेगा, और मारा जायेगा I
मेढक क्यों मर जाएगा ?
कौन मारता है उसको ?
पानी का तापमान ?
गरमी ?
या उसके स्वभाव से ?
मेढक को मार देती है, उसकी असमर्थता सही वक्त पर ही फैसला न लेने की अयोग्यता । यह तय करने की उसकी अक्षमता कि कब पानी से बाहर आने के लिये छलांग लगा देनी है।
इसी तरह हम भी अपने वातावरण और लोगो के साथ सामंजस्य बनाए रखने की तब तक कोशिश करते हैं, जब तक की छलांग लगा सकने कि हमारी सारी ताकत खत्म नहीं हो जाती ।
लोग हमारे तालमेल बनाए रखने की काबिलियत को कमजोरी समझ लेते हैं। वो इसे हमारी आदत और स्वभाव समझते हैं। उन्हें ये भरोसा होता है कि वो कुछ भी करें, हम तो Adjust कर ही लेंगे और वो तापमान बढ़ाते जाते हैं।
हमारे सारे इंसानी रिश्ते, राजनीतिक और सामाजिक भी, ऐसे ही होते हैं, पानी, तापमान और मेंढक जैसे। ये तय हमे ही करना होता है कि हम जल मे मरें या सही वक्त पर कूद निकलें।
(विचार करें, गलत-गलत होता है, सही-सही, गलत सहने की सामंजस्यता हमारी मौलिकता को ख़त्म कर देती है)
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एक औरत ने पंडित जी से घर की खुशहाली 
का उपाय पूंछा ... 
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पंडित जी ... बेटी पहली रोटी गाय को खिलाया करो 
और आखिरी रोटी कुत्ते को ...  
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औरत... पंडित जी मैं ऐसा ही करती हूँ ... 
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पहली रोटी खुद खाती हूँ ...और ...
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आखिरी रोटी अपने पति को खिलाती हूँ .. 
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पंडित बेहोश ..... एक Confession पेज पर लड़की ने किये ये Confession, आखरी तक पढ़ेंगे तो हस हस क़े पागल हो जायेंगे......
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आज ऑफिस छुटने के बाद एक सहेली के साथ वडापाव की गाडी पर रुकी,
गरमा गरम पेट भर लगातार वडापाव खाये और फिर घर की और मै चल दी..,
घर पहुँचने पर मेरे पति घर पर ही थे, उन्होने दरवाजा खोला और बोले तुम्हारे लिए एक Surprize हे । और दरवाजे पर ही उन्होनें मेरी आँख पर पट्टी बांध दी और डायनिंग टेबल के पास ले गया और कुर्सी पर बैठा दिया.
तभी....
टेलिफोन की घंटी बजी, पति बोले मेरे आने तक आँखों से पट्टी नहीं हटाना..!
वो गए दूसरे रूम में, फोन पर बोलने की आवाज सुनाई दे रही थी मुझे..
4-5 वडापाव खाकर पेट खूब भर चुका था, सोचा इन्होंने कुछ न कुछ खाने के लिए बनाया होगा, जब तक वो आते है तब तक हलकी हो लेती हू..!
फिर क्या, बैठे बैठे ही धीरे से एक पैर ऊपर किया और
'पुरररररररर्र'..पट पट पट

जरा अच्छा लगा लेकिन बदबू बहुत आ रही थी इसलिए अपने रुमाल से थोड़ी हवा लेकर बदबूदार gas को हटाया....
उनका फ़ोन पर बोलना चल ही रहा था, उतने में दूसरा पेर ऊपर किया और एक बार फिर 'पुररररररररररररर्र'... 
बहुत ज़्यादा बदबू आ रही थी...! फिर से थोड़ी हवा लेली....इतने में उन्होंने फ़ोन रखा और वो आने लगे..!मैंने अपना रुमाल निचे रखा, दोनों हाथ टेबल पर रखे और भोला चेहरा बनाकर शांत बैठ गयी, जैसे की कुछ हुआ ही ना हो..!
वो आये, उन्होंने पूछा पट्टी तो नहीं हटाई न आँख से...
मैंने भी प्यार से बोला, नहीं मेरे जानू.....
उसने धीरे से मेरे आँख से पट्टी हटाई और मै देखती क्या हूँ...!!
डायनिंग टेबल पर उसके सभी दोस्त नाक पर हाथ लगाये बैठे थे और ज़ोर से चिल्लाये...,
Happy Birthday Bhabhi

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