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Wednesday, 26 August 2015

-हास्य कविता-

 एक बार एक मास्टर साहब अपनी क्लास के बच्चो से पूछने लगे-:
बच्चो को जिस तरह 20 - 20 क्रिकेट आने से क्रिकेट देखने का मजा बढ़ गया , उसी तरह तुम्हारे पेपर लेने का तरीका किस तरह से रोमांचक बनाया जा सकता है ?
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जब कोई नहीँ बोला तो हमारा एडमिन इस सवाल का जवाब देने के लिए खड़ा हो गया ।
मास्टर जी उसके खुराफाती दिमाग को जानते थे ।
आंखें तरेरी पर फिर बोले - जल्दी से बता ।
एडमिन गम्भीर हो बोला -
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मास्टरजी हमारा पेपर एक घंटा 20 मिनट का होना चाहिए,
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हर बीस मिनट के बाद छात्रों को आपस मेँ बात करने के लिए के लिए दो मिनट का
"टाईम आफ़ "
मिलना चाहिए ।
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बच्चों को एक
" free hit"
मिलनी चाहिए , जिसमेँ बच्चे किसी भी एक सवाल का अपनी मर्जी से उत्तर लिख सकेँ।
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पहले 20 मिनट मेँ
"पावर प्ले "
होना चाहिए जिसमे ड्यूटी वाला मास्टर कमरे से बाहर रहे
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LAST
BUT NOT LEAST....
और हर एक सही उत्तर लिखने पर
"चीयर लीडर "
आकर कमरे मेँ डान्स करेँ !!!! हमारे एडमिन की जय उसकी सोच की जय
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पति: आज ४ बजे कुतों की रेस है, मुझे वहां जाना है।
पत्नि: आप भी ना हद करते हो, ठीक से चला जाता नही और रेस लगाने की पडी है।
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Found an awesome message  
गुमान ना कर अपने दिमाग पर ऐ दोस्त...
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जितना तेरे पास है.. उतना तो मेरा खराब रहता है....
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 -हास्य कविता- 


मुश्किल है अपना मेल प्रिये,
----ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,

तुम एम.ए. फर्स्ट डिवीजन हो,
----मैं हुआ मैट्रिक फेल प्रिये,

तुम फौजी अफसर की बेटी,
----मैं तो किसान का बेटा हूँ,

तुम रबड़ी खीर मलाई हो,
----मैं तो सत्तू सपरेटा हूँ,

तुम ए.सी. घर में रहती हो,
----मैं पेड़ के नीचे लेटा हूँ,

तुम नई मारूति लगती हो
----मैं स्कूटर लेम्ब्रेटा हूँ,

इस तरह अगर हम छुप छुप,
-----कर आपस में प्यार बढाएंगे,

तो एक रोज़ तेरे डैडी
----अमरीश पुरी बन जाएंगे,
सब हड्डी पसली तोड़,
----मुझे भिजवा देंगे वो जेल प्रिये,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये,
----ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम अरब देश की घोड़ी हो,
----मैं हूँ गदहे की नाल प्रिये,

तुम दीवाली का बोनस हो,
----मैं भूखों की हड़ताल प्रिये,

तुम हीरे जड़ी तश्तरी हो,
----मैं एल्युमिनियम का थाल प्रिये,

तुम चिकन, सूप, बिरयानी हो,
----मैं कंकड़ वाली दाल प्रिये,

तुम हिरन चौकड़ी भरती हो,
----मैं हूँ कछुए की चाल प्रिये,

तुम चन्दन वन की लकड़ी हो,
----मैं हूँ बबूल की छाल प्रिये,
मैं पके आम सा लटका हूँ,
----मत मारो मुझे गुलेल प्रिये,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये,
----ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
मैं शनिदेव जैसा कुरूप,
----तुम कोमल कंचन काया हो,

मैं तन से, मन से कंगला हूँ,
----तुम महाचंचला माया हो,

तुम निर्मल पावन गंगा हो,
----मैं जलता हुआ पतंगा हूँ,

तुम राजघाट का शान्ति मार्च,
----मैं हिन्दू-मुस्लिम दंगा हूँ,

तुम हो पूनम का ताजमहल,
----मैं काली गुफा अजन्ता की,

तुम हो वरदान विधाता का,
----मैं गलती हूँ भगवन्ता की,
तुम जेट विमान की शोभा हो,
----मैं बस की ठेलमपेल प्रिये,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये,
----ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम नई विदेशी मिक्सी हो,
----मैं पत्थर का सिलबट्टा हूँ,

तुम ए.के. सैंतालिस जैसी,
----मैं तो इक देसी कट्टा हूँ,

तुम चतुर राबड़ी देवी सी,
----मैं भोला-भाला लालू हूँ,

तुम मुक्त शेरनी जंगल की,
----मैं चिड़ियाघर का भालू हूँ,

तुम व्यस्त सोनिया गाँधी सी,
----मैं अडवाणी सा खाली हूँ,

तुम हँसी माधुरी दीक्षित की,
----मैं पुलिसमैन की गाली हूँ,
गर जेल मुझे हो जाए तो,
----दिलवा देना तुम बेल प्रिये,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये,
----ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
मैं ढाबे के ढांचे जैसा,
----तुम पाँच सितारा होटल हो ,

तुम चित्रहार का मधुर गीत,
----मैं कृषि दर्शन की झाड़ी हूँ,

तुम विश्व सुंदरी सी महान,
----मैं ठेलिया छाप कबाड़ी हूँ,

तुम सोनी का मोबाइल हो,
----मैं टेलीफोन वाला चोंगा,

तुम मछली मानसरोवर की,
----मैं सागर तट का हूँ घोंघा,
दस मंजिल से गिर जाऊँगा,
----मत आगे मुझे ढकेल प्रिये,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये,
----ये प्यार नहीं है खेल प्रिये,
तुम जयाप्रदा की साड़ी हो,
----मैं शेखर वाली दाढी हूँ,

तुम सुषमा जैसी विदुषी हो,
----मैं लल्लू लाल अनाड़ी हूँ,

तुम जया जेटली सी कोमल,
----मैं सिंह मुलायम सा कठोर,

तुम हेमा मालिनी सी सुन्दर,
----मैं बंगारू की तरह बोर,

तुम सत्ता की महारानी हो,
----मैं विपक्ष की लाचारी हूँ,

तुम हो ममता जयललिता सी,
----मैं क्वाँरा अटल बिहारी हूँ,
तुम संसद की सुन्दरता हो,
----मैं हूँ तिहाड़ की जेल प्रिये,

मुश्किल है अपना मेल प्रिये,
----ये प्यार नहीं है खेल प्रिये ।


वाकई
बहुत ही मुश्किल है,
               अपना मेल प्रिये..!

 !हँसते रहें,
            हँसाते रहें..! 

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