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Wednesday, 19 August 2015

"गोल गप्पे वाला"

"गोल गप्पे वाला"

रविवार का दिन था, परिवार वालों की डिमांड हुई की आज गोल गप्पे खाने की इच्छा है । मैंने भी कह दिया चलो शाम को 6 बजे चलते है ।
शाम के 6 बजे गोलगप्पे का ठेला जो की हमारी कॉलोनी के बहार रोड पर ही खड़ा रहता है वहीँ चले गए और देखा तो वहाँ काफी भीड़ थी...लोग हाथ में प्लेट लेकर line में लगे हुए थे।

तकरीबन 15 मिनिट के बाद हमारा भी नम्बर आ गया.... लेकिन उस 15 मिनिट के दौरान हम यह सोचते रहे की बेचारा क्या कमाता होगा ??
बेचारा बड़ी मेहनत करता है ??
बेचारा घर का गुजारा कैसे चलाता होगा ??

जब हमारी बारी आई तो मैंने गोल गप्पे वाले से यूँही पूछ लिया -" भाई क्या कमा लेते हो दिन भर में" (मुझे यह उम्मीद थी की 300-400₹ बन जाता होगा गरीब आदमी का )

गोल गप्पे वाला - "साहब जी भगवान की कृपा से माल पूरा लग जाता है "

मैंने पुछा - "मेंरे समझ नही आई भाई, मतलब जरा अच्छे से समझाओ"

गोल गप्पे वाला - " साहब हम सुबह में 7 बजे घर से 3000 खाली गोलगप्पे की पूरिया लेकर के निकलते है और शाम को 7 बजने से पहले भगवान की किरपा से सब माल लग जाता है "

मैंने हिसाब लगाया की यह 10 ₹ में 6 गोल गप्पे खिलाता है मतलब की 3000 गोल गप्पे बिकने पर उसको 5000 ₹ मिलते होंगे और अगर 50 % उसका प्रॉफिट समझे तो वह दिन के 2500 ₹ या उससे भी ज्यादा कमा लेता है...!!! 

यानी की महीने के 75,000 ₹ !!!

यह सोचकर तो मेरा दिमाग चकराने लगा.... अब मुझे गोलगप्पे वाला बेचारा नजर नही आ रहा था...बेचारे तो हम हो गये थे ..!!

एक 7-8 क्लास पढ़ा इन्सान इज्जत के साथ महीने के 75,000 ₹ कमा रहा है... उसने अपना 45 लाख का घर ले लिया है...और 4 दुकाने खरीद कर किराये पर दे रखी है जिनका महीने का किराया 30,000₹ आता है...।

और हमने बरसो तक पढ़ाई की, उसके बाद 20-25 हजार की नौकरी कर रहे है.... किराये के मकान में रह रहे है... यूँही टाई बांधकर झुठी शानमें घूम रहे हैं... 

दिल तो किया की उसी गोलगप्पे में कूदकर डूब जाऊं...
किसी ने सही कहा है ...


"DON'T UNDER ESTIMATE POWER OF THE COMMON MAN "

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