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Sunday, 26 July 2015

प्यार क्या है ? विस्तार से बताइये ??

 एक बार एक कवि हलवाई की दुकान पहुँचे, जलेबी और दही ली और वहीं खाने बैठ गये। इतने में एक कौआ कहीं से आया और जलेबी की परात में चोंच मारकर उड़ चला। हलवाई को बड़ा गुस्सा आया उसने पत्थर उठाया और कौए को दे मारा। कौए की किस्मत ख़राब, पत्थर सीधे उसे लगा और वो मर गया।
- कवि महोदय का ये घटना देख हृदय जगा । वो जलेबी , दही खाने के बाद पानी पीने पहुँचे तो उन्होने एक कोयले के टुकड़े से वहाँ एक पंक्ति लिख दी।
"काग दही पर जान गँवायो"
- तभी वहाँ एक लेखपाल महोदय जो कागजों में हेराफेरी की वजह से निलम्बित हो गये थे, पानी पीने पहुँचे। कवि की लिखी पंक्तियों पर जब उनकी नजर पड़ी तो अनायास ही उनके मुँह से निकल पड़ा , कितनी सही बात लिखी है! क्योंकि उन्होने उसे कुछ इस तरह पढ़ा-
"कागद ही पर जान गँवायो"
- तभी एक मजनू टाइप लड़का पिटा-पिटाया सा वहाँ पानी पीने पहुँचा। उसे भी लगा कितनी सच्ची बात लिखी है काश उसे ये पहले पता होती, क्योंकि उसने उसे कुछ यूँ पढ़ा था-
"का गदही पर जान गँवायो"
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शायद इसीलिए तुलसीदास जी ने बहुत पहले ही लिख दिया था,
"जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी"
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ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है "साहिब"..
वरना गरीब तो सङको से थैलीयाँ तक उठा लेते है..
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 नदी में पानी मीठा रहता है
क्योंकि वो देती रहती है,
सागर का पानी खारा रहता है
क्योंकि वो लेता रहता है,
नाले का पानी दुर्गन्ध पैदा करता है
क्योंकि वो रुका रहता है..!
अपना जीवन भी वैसा ही है,
देते रहेंगे तो मीठे लगेंगे
लेते रहेंगे तो खारे लगेंगे
रुके रहेंगे तो बेचारे लगेंगे..!
"हर रिश्ते में विश्वास रहने दो;
जुबान पर हर वक़्त मिठास रहने दो;
यही तो अंदाज़ है जिंदगी जीने का;
न खुद रहो उदास, न दूसरों को रहने दो..
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12वीं' कक्षा का एक प्रश्न ~~~~~~~~~~~~~
प्रश्न : प्यार क्या है ? विस्तार से बताइये!
(20 अंक)
अमरीकी विद्यार्थी का उत्तर:
प्यार 'दर्द' को कहते हैं
(परीक्षा परिणाम: प्राप्तांक 9/20)
इंग्लैंड के विद्यार्थी का उत्तर:
प्यार 'ज़िन्दगी' को कहते हैं
(परीक्षा परिणाम: प्राप्तांक 5/20)
UAE के विद्यार्थी का उत्तर:
प्यार 'खुदा' को कहते हैं
(परीक्षा परिणाम: प्राप्तांक 7/20)
भारतीय विद्यार्थी का उत्तर:
प्यार की परिभाषा:-
'प्यार' के द्वारा एक महिला और पुरुष के मध्य, उपजे प्रेम-सम्बन्ध से दिल की गंभीर बीमारी हो जाती है। और अगर ये प्रेम परवान ना चढ़े तो दोनों में से किसी एक की मृत्यु भी हो जाती है।
प्यार के प्रकार :
(1)- एक तरफ़ा प्यार।
(2)- दो तरफ़ा प्यार।
आयु :-
आमतौर पर यह 15 से 25 की उम्र के बीच होता है। लेकिन आजकल यह किसी भी उम्र में हो जाता है।
लक्षण :
(1)- अनिद्रा।
(2)- दिन में सपने देखना।
(3)- फेसबुक, व्हाटसएप के बिना
एक-एक पल दूभर हो जाना
(4)- फ़ोन की लत।
मूल कारण/मूल्यांकन:
(1)- फोन पे चेटींग से
(2)- तस्वीरों से
(3)- मोबाईल द्वारा ज्यादा फैलता है।
इलाज:-
(1)- पिता के जूते द्वारा एंटी लव
चिकित्सा !
(2)- माँ की चप्पल की अंधाधुंध मार ||
परीक्षा परिणाम: (प्राप्तांक 20/20)
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बचपन  में  माँ  कहती  है ,
            तुझे  कुछ  समझ  नहीं  आता।
जवानी  में  बीवी  कहती  है ,
        आपको  कुछ  समझ  नहीं  आता।
बुढ़ापे  में  बच्चे  कहते  है ,
       आपको  कुछ  समझ  नहीं  आता ।
समझने  की  उम्र  कौनसी ,
             ये  समझ  नहीं  आता।
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रसोई घर को चौका कहा जाता है क्योंकि।
जहाँ चार बातों का विचार किया जाता है
वह है चौका।
चार बातें हैं -- 1..कब, 2..कितना,
3..कैसे, और 4..क्या।
मतलब ~कब खाना ?,
कितना खाना ?,
कैसे खाना ?
और क्या खाना ?
कल तक चौके को रसोईघर भी कहा जाता था, आज वह किचन हो गया है।.
रसोई घर और किचन में अन्तर है।
जहाँ रस बरसे वह रसोई है तथा
जहाँ किच-किच हो वह किचन है।
भारतीय संस्कृति के हिसाब से अच्छे शब्द सोच समझ के दिए गए है उन्हें वही रहने दे
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वह लड़की जिसे मैं ब्याह के लाया था -
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नहीं मिलती है।
ढूंढता हूँ तो भी,
और नहीं तो भी,
वो लड़की जिसे मैं ब्याह के लाया था
घिरी रहती है तेल नून के चक्करों में।
बच्चों की पढाई या उनकी दवाइयों के schedule में,
मसरूफ सी कोई मिलती तो ज़रूर है
पर नहीं मिलती मुझे वो लड़की जिसे मैं ब्याह के लाया था
जो बिना बात किये रह न पाती थी,
आज कल सिर्फ एक ही सवाल पूछती 'कल tiffin में क्या ले जाओगे?
याद है मुझे वह बातूनी
पर नहीं मिलती मुझे वो लड़की जिसे से मैं ब्याह के लाया था
कतई ऐतियात से काजल लगाने का था शौक़ जिसे,
आजकल दिनों तक बालों के गिरहन भी नहीं सुलझाती,
याद है मुझे वह अल्ल्हड़
पर नहीं मिलती मुझे वो लड़की जिसे से मैं ब्याह के लाया था
नए जूते की मामुली सी खारिश ने रुलाया था जिसे घंटो,
बेपरवाह लेकर घूमती है हाथों पर, रसोई के छाले वह आज,
याद है मुझे वह नाज़ो से पली
पर नहीं मिलती मुझे वो लड़की जिसे से मैं ब्याह के लाया था
लेकिन यह देखा है मैंने,
की ज़िंदगी की हर चीज़ में अपवाद होता है
इतवार की शाम चौक से गुज़रते समय,
जब पानी के बताशों के ठेलों की तरफ देखती है
तो उसकी लालची निगाहों में,
दिख जाती है वो लड़की जिसे मैं ब्याह के लाया था
मैं आज भी अक्सर बैठक के सोफे, पर ही पसर जाता हूँ ।
रात भर ठण्ड में ठिठुरता हूँ,
और सुबह अपने को, ख्याल से डाले हुए कम्बल में ढका पाता हुँ.
सुबह की हड़बड़ी में शरारत से ही सही पर पूछता ज़रूर हूँ
आखिर पिछली रात किसने की थी मेहरबानी;
और फिर उसकी दबी सी लाज भरी हंसी में आखिर
पा ही जाता हूँ वो लड़की जिसे मैं ब्याह के लाया था
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Dedicated to all the beautiful n cool life partners
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कुछ हिंदी फ़िल्मी गीत जो कुछ बीमारियों का वर्णन करते हैं:
 
गीत – जिया जले, जान जले, रात भर धुआं चले
बीमारी – बुखार
गीत – तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही
बीमारी – हार्ट अटैक
गीत – सुहानी रात ढल चुकी है, न जाने तुम कब आओगे
बीमारी – कब्ज़
गीत – बीड़ी जलाई ले जिगर से पिया, जिगर म बड़ी आग है
बीमारी – एसिडिटी
गीत – तुझमे रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
बीमारी – मोतियाबिंद😎
गीत – तुझे याद न मेरी आई किसी से अब क्या कहना
बीमारी – यादाश्त कमज़ोर
गीत – मन डोले मेरा तन डोले
बीमारी – चक्कर आना😇
गीत – टिप-टिप बरसा पानी, पानी ने आग लगाई
बीमारी – यूरिन इन्फेक्शन
गीत – जिया धड़क-धड़क जाये
बीमारी – उच्च रक्तचाप
गीत – हाय रे हाय नींद नहीं आये
बीमारी – अनिद्रा
गीत – बताना भी नहीं आता, छुपाना भी नहीं आता
बीमारी – बवासीर
और अंत में
गीत – लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
बीमारी – दस्त
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वकील-तुमने पुलिस ऑफिसर की जेब मे जलती हुई माचिस क्यू रखी....?? 
संता-ये मुझे बोला कि ज़मानत करवाना हो तो पहले जेब गरम करो.....
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प्रेरणादायक कहानी ::
---------------------पिज्जा---- ---------------
पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…
पति- क्यों??
उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं
आएगी…
पति- क्यों??
पत्नी- नवरात्रि के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…
पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…
पत्नी- और हाँ!!! नवरात्रि के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस..
पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे
देंगे…
पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती के यहाँ जा रही है, तो उसे भी अच्छा लगेगा… और इस महँगाई के दौर में उसकी पगार से त्यौहार कैसे मनाएगी बेचारी!!
पति- तुम भी ना… जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो जाती हो…
पत्नी- अरे नहीं… चिंता मत करो…
मैं आज का पिज्जा खाने का कार्यक्रम रद्द कर देती हूँ… खामख्वा पाँच सौ रूपए उड़ जाएँगे, बासी पाव के उन आठ टुकड़ों के पीछे…
पति- वा, वा… क्या कहने!!
हमारे मुँह से पिज्जा छीनकर बाई की थाली में??
तीन दिन बाद… पोंछा लगाती हुई कामवाली बाई से...
पति ने पूछा...
पति- क्या बाई?, कैसी रही छुट्टी?
बाई- बहुत बढ़िया हुई साहब… दीदी ने पाँच सौ रूपए दिए थे ना.. त्यौहार का बोनस..
पति- तो जा आई बेटी के यहाँ…मिल ली अपने नाती से…?
बाई- हाँ साब… मजा आया, दो दिन में 500 रूपए खर्च कर दिए…
पति- अच्छा!! मतलब क्या किया 500 रूपए का??
बाई- नाती के लिए 150 रूपए का शर्ट,
40 रूपए की गुड़िया,
बेटी को 50 रूपए के पेढे लिए,
50 रूपए के
पेढे मंदिर में प्रसाद चढ़ाया,
60 रूपए किराए के लग गए..
25 रूपए की चूड़ियाँ बेटी के लिए
और जमाई के लिए 50 रूपए का बेल्ट लिया अच्छा सा…
बचे हुए
75 रूपए नाती को दे दिए कॉपी-पेन्सिल खरीदने के लिए…
झाड़ू-पोंछा करते हुए पूरा हिसाब उसकी ज़बान
पर रटा हुआ था…
पति- 500 रूपए में इतना कुछ???
वह आश्चर्य से मन ही मन विचार करने
लगा...
उसकी आँखों के सामने आठ टुकड़े किया हुआ
बड़ा सा पिज्ज़ा घूमने लगा,
एक-एक टुकड़ा उसके
दिमाग में हथौड़ा मारने लगा…
अपने एक पिज्जा के
खर्च की तुलना वह कामवाली बाई के त्यौहारी खर्च से करने लगा…
पहला टुकड़ा बच्चे की ड्रेस का,
दूसरा टुकड़ा पेढे का,
तीसरा टुकड़ा मंदिर का प्रसाद,
चौथा किराए का,
पाँचवाँ गुड़िया का,
छठवां टुकड़ा चूडियों का,
सातवाँ जमाई के बेल्ट का
और आठवाँ
टुकड़ा बच्चे की कॉपी-पेन्सिल का..
आज तक उसने
हमेशा पिज्जा की एक ही बाजू देखी थी,
कभी पलटाकर नहीं देखा था कि पिज्जा पीछे से कैसा दिखता है…
लेकिन आज कामवाली बाई ने उसे
पिज्जा की दूसरी बाजू दिखा दी थी…
पिज्जा के आठ टुकड़े उसे जीवन का अर्थ समझा गए थे…
"जीवन के लिए खर्च" या "खर्च के लिए
जीवन"  का नवीन अर्थ एक झटके में उसे समझ आ गया…।

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