Thursday, 23 July 2015

भैंस के चुटकले

रामू : यार श्यामू, मेरी भैंस का दूध निकाल दे। आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है।
श्यामू : ना भाई, मेरे होठों में दर्द है। रामू : यार होठों के दर्द का दूध से क्या संबंध?
श्यामू : अरे समझता नहीं है यार, अगर दूध निकालते हुए भैंस बिदक गई तो पुचकारना पड़ेगा कि नहीं?
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एक भैंस खरीद ली

एक बार एक फौजी छुट्टी में घर गया।घर जा के उस ने
एक भैंस खरीद ली।
भैंस को जब भी खोलता वा नयी जगह देख के भागने
लग जाती। उस की ये हरकत देख के
फौजी उसको पीटने लग गया।
फौजी की पत्नी बोली भैस
को पीटो मत नहीं तो दूध
नहीं देगी ये।
फौजी बोला मुझे दुध नहीं चाहिए…
discipline
चाहिए…
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एक बार एक व्यक्ति भैंस खरिदने के लिए उसके मालिक के घर गया।
हेमन्त: भाई साहब, इस भैस की किमत क्या है।
मालिक: तीन हज़ार रुपय।
हेमन्त: भैया, तीन हज़ार रुपये तो इस भैस के हिसाब से बहुत ज्यादा हैं
मालिक : वह कैसे?
हेमन्त: इस की एक आंख भी नही है।
मालिक: तुम्हे भैस दूध देने के लिए चाहिए या इससे कशिदाकारी करवानी है।
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एक बार एक व्यक्ति रेलयात्रा में लम्बे सफ़र पर जा रहा था, साथ में एक-दो किताबें थीं और उन्हें पढ़ते हुए वह चुपचाप अपना सफ़र तय कर रहा था। एक स्टेशन पर एक मुस्लिम यात्री भी चढ़ा और बराबर वाली सीट पर आकर बैठा। कुछ देर तो सफ़र शान्ति से कटा, लेकिन फ़िर मुस्लिम भाई ने उस पहले व्यक्ति से कहा कि आप बातें क्यों नहीं करते हैं, इतना लम्बा सफ़र है बातें करते-करते कट जायेगा। उस व्यक्ति ने कहा कि मुझे फ़िजूल की बातें करने में मजा नहीं आता, इसमें समय भी बरबाद होता है और बहसबाजी में कई बार मूड भी खराब हो जाता है। फ़िर भी मुस्लिम व्यक्ति बोला कि हाँ बात तो सही है, लेकिन टाइम पास करने के लिये हमें कुछ न कुछ तो करना ही होगा। पहले व्यक्ति ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं कि हमें किस विषय पर चर्चा करनी चाहिये? मुस्लिम व्यक्ति बोला कि वैसे तो काफ़ी विषय हैं, लेकिन मेरा पसन्दीदा विषय है धर्मग्रन्थों का अध्ययन, तो क्यों न हम वेदों और कुरान पर चर्चा और बहस करें…। अब तक वह पहला व्यक्ति उसे टालने की नाकाम कोशिश कर चुका था, अब उसका धैर्य जवाब दे गया, उसने कहा, ठीक है चलो हम वेदों और कुरान पर बहस करें, लेकिन पहले आपका ज्ञान परखने के लिये मैं एक सवाल पूछता हूँ, यदि आप उसका सही-सही जवाब दे सकें तब हम वेद-कुरान जैसे मुश्किल विषय पर बातें करेंगे…। मुस्लिम भाई ने कहा कि “ठीक है, पूछिये।

पहले व्यक्ति ने प्रश्न किया – एक बात बताईये, गाय-भैंस घास खाती है और गोबर करती है, उसी प्रकार हिरन और बकरी भी घास खाते हैं लेकिन वे छोटी-छोटी लेंडियाँ करते हैं, जबकि गधे-घोड़े भी घास खाते हैं तथा वे रेशेदार लीद निकालते हैं, ऐसा क्यों?

मुस्लिम व्यक्ति भौंचक हुआ और गड़बड़ाते हुए बोला- इस बारे में तो बताना मुश्किल है कि ऐसा क्यों होता है।

तब पहले व्यक्ति ने उसे कहा कि – भाई, जब आप जीवन की सबसे मूलभूत बात यानी “गू” के बारे में ही ठीक से नहीं जानते हैं, तब मैं आपसे वेद-कुरान पर क्या बहस करूं? और वह अपनी किताब निकालकर पढ़ने लगा।

इसके बाद उसका बाकी का सफ़र शान्ति से कटा।
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भैंस चालीसा
महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंस
अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा
कोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावे
अक्ल घास जब चरने जाये- हार जाय नर अति दुख पाये
भैंस का चारा लालू खायो- निज घरवारि सी.एम. बनवायो
तुमहू भैंस का चारा खाओ- बीवी को सी.एम. बनवाओ
मोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस दूध अति होई
अकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये
अकल तो ले मोबाइल घूमे- एस.एम.एस. पा पा के झूमे
भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे- कबहूँ मिस्ड काल ना मारे
भैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीती
भैंस कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहाये
शक्तिशालिनी शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारी
अकलमन्द को कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचाने
जाकी अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक सर रोये
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारी
भैंस मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते
अकल को कोई देख ना पावे- भैंस दरस साक्षात दिखावे
अकल पढाई करन से आवे- भैंस कभी स्कूल ना जावे
भैंस के डाक्टर मौज उङावैं- अकल के डाक्टर काम ना पावैं
अकलमन्द जग से डरै,भैंस मस्त पगुराय
भैंस चलाये सींग तो, अकलमन्द भग जाय
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस कभी ना बकती गारी
भैंस कभी अतंक ना करती- भैंस मेरी भगवान से डरती
तासौं भैंस सदा मुसकावै- अकल लङे ओर अति दुख पावै
अकल तो एटम बम्ब बनाये- झटके मे संसार उङाये
भैंस दूध दे हमको पाले- बिना दूध हों चाय के लाले
अकल विभाजन देश का कीन्ही- पाक बांग्लादेश ये दीन्ही
भैंस अभी तक फर्क ना जाने- एक रूप में सबको माने
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई- भैंस सभी को दूध पिलायी
भैंस न कोइ इलैक्शन चाहे- भैंस ना कोइ सेलेक्शन चाहे
इसकी नज़र मे एक हैं सारे- मोटे पतले गोरे कारे
भेदभाव नहिं भैंस को भाया- भैंस मे ही जनतन्त्र समाया
भैंस ना कोई करै हवाला- भैंस करै ना कोइ घोटाला
पासपोर्ट ना वीजा पाती- जब चाहे विदेश हो आती
फिर भी स्मगलिंग ना करती- भैंस मेरी कानून से डरती
ता सौं भैंस हमें है प्यारी- मंगल भवन अमंगल हारी
अकल बेअकल जो मरै, अन्त सवारी भैंस
भैंस बङी है अकल से, फईनल हो गया केस
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लालू की भैंस 

मायावती लालू के घर एक बकरी के साथ आई.

लालू : भैंसवा के साथ आई हो.

मायावती : नहीं, गोटवा के साथ आई हूं.

लालू: मैं तुमसे नहीं गोटवा से पूछ रहा हूं.
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क्या आप ने चलान भुगता है ?
राहुल भैंस के ऊपर बैठ कर घूम रहा था। 
रमेश : तेरा चालान होगा। 
राहुलः क्यों ? 
रमेशः हेलमेट नहीं पहना है इसीलिए ! 
राहुलः जरा , नीचे देख , मैं फोर वीलर चला रहा हूं।
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नन्ही निष्ठा बेहद ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी...


मां ने देखा, दौड़कर पास आई, सीने से लगाया, और सिर पर हाथ फिराते हुए पूछा, "क्या हुआ मेरी गुड़िया-सी बेटी को, रो क्यों रही है...?"


निष्ठा ने सुबकते हुए सवाल किया, "मम्मी, क्या मैं डरावनी चुड़ैल जैसी लगती हूं...?"


मम्मी ने तुरंत कहा, "नहीं बेटी, बिल्कुल नहीं..."


निष्ठा ने फिर पूछा, "क्या मेरी आंखें मेंढकी जैसी हैं...?"


मम्मी ने फिर कहा, "अरे, कौन कहता है... मेरी गुड़िया तो मृगनयनी है, मृगनयनी..."


निष्ठा के सवाल अब भी खत्म नहीं हुए थे, "क्या मेरी नाक भैंस जैसी है...?"


मम्मी ने बिटिया के सिर पर हाथ फिराते हुए बेहद प्यार से कहा, "हरगिज़ नहीं, मेरी बच्ची, तेरी नाक तो बिल्कुल सुतवां और बहुत सुन्दर है..."


निष्ठा का सुबकना तब भी बन्द नहीं हुआ, बोली, "क्या मैं गैण्डे की तरह बेडौल हूं...?"


मम्मी ने अब भी धैर्य नहीं खोया, और बोली, "ऐसा कतई नहीं है, निष्ठा... तू तो बार्बी डॉल जैसी प्यारी है..."


अब निष्ठा के चेहरे पर गुस्से के भाव आए, और ज़ोर से बोली, "अब नहीं छोड़ूंगी उस पड़ोसन को... वह कह रही थी, मैं बिल्कुल अपनी मम्मी जैसी दिखती हूं..."
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एक बार एक भैंस गधे के ऊपर चढ़ गई । गधा - यह क्या कर रही हो ? भैंस - मैं तो मजाक कर रही हूँ ।
गधा - अगर मैंने मजाक किया । तो फिर तुम पछताओगी 
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टीचर - छोटी मधुमक्खी तुम्हें क्या देती है?
बच्चे - शहद!
टीचर - पतली बकरी?
बच्चे - दूध!
टीचर - और मोटी भैंस?
बच्चे - होमवर्क! दे...थप्पड़ पे थप्पड़....
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रेल ड्राइवर मेवालाल के इंजन से भैंस कट गई। उस पर केस हो गया।
जज : जब यह भैंस कटी तो यह पटरियों पर थी?

मेवालाल : न जी खेत में चर रही थी। वह तो इंजन की नीयत खराब हो गई थी।
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customer ने कस्टमर केयर फोन किया और बोला - “मेरी भैंस सिम खा कर भाग गई !”

कस्टमर केयर - ”तो मैं क्या करूं ?”


customer - “मुझे यह बताओ कि कहीं रोमिंग तो नहीं लग रही है ?”
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