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Tuesday, 21 July 2015

हिंदी चुटकुले "छोटी ड्रेस में बॉम्ब लगदी मैनु"

हिंदी चुटकुले "छोटी ड्रेस में बॉम्ब लगदी मैनु"



 We, Indians are total geniuses. Not only we have an opinion on anything & everything but the way we see & perceive things is also quite unique. For starters, certain words that globally is known for something takes a whole new meaning for Indians. Don't believe us? This list will tell you how certain international words get a desi twist when Indians get to use them.

AUTO
What the world understands?
Auto (n): Def: Working by itself with little or no direct human control.
What Indians understand?
Auto (n): A rickety 'threewheeler' whose driver never agrees to go by meter.

CHANGE
What the world understands?
Change (v): Make or become different.
What Indians understand?
Change (n):  Chillar.

RUBBER
What the world understands?
Rubber (n): Def: A tough elastic polymeric substance or eraser.
What Indians understand?
Rubber (n): Scented pieces of eraser 'rubbad' lost & bought on daily basis in school.

HORN
What the world understands?
Horn (n): A hard permanent outgrowth, often curved and pointed, found in pairs on the heads of cattle, sheep, goats, giraffes, etc.
What Indians understand?
Horn (v) : "Gaadi hata b*****d".

LINE
What the world understands?
Line (n): A straight or curved continuous extent of length without breadth.
What Indians understand?
Line (v) : A way to approach girls, mostly in a cheesy way, Line maarna.

SHOW
What the world understands?
Show (v): Be, allow, or cause to be visible (n): stage performance.
What Indians understand?
Show (v): An act imposed on you while a game of 'Teen patti.'

PICTURE
What the world understands?
Picture (n): A painting or drawing.
What Indians understand?
Picture (v): An act of 3 hour entertainment in a cinema hall, pronounced as 'picchur.'

PASTE
What the world understands?
Paste (n): A thick, soft, moist substance/ often used as an adhesive especially for sticking papers.
What Indians understand?
Paste (v): The thing you try to put on your brush in the morning while you are half asleep.

ENJOY
What the world understands?
Enjoy (v): Take delight or pleasure in (an activity or occasion)
What Indians understand?
Enjoy (v): The joy you experience often termed as 'Rang raliyan manana or Gulcharey udaana.'
 
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लापरवाह दोस्तों को मैसेज करने से बेहतर है,
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कुत्ते को पत्थर मार लो।
कम से कम जवाब तो देता है।
 
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लड़कियां भी अजीब होती हैं,
तैयार होने के लिए पार्लर जाती हैं और...
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पार्लर जाने के लिए भी तैयार होती हैं।
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लोगों को पता नहीं कैसे सच्चा प्यार मिल जाता है...
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हमें तो सुबह पलंग के नीचे उतारी चप्पल नहीं मिलती।
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कौन कहता है कि सिर्फ मोहब्बत में ही दर्द होता है,
कमबख्त....
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अपनी तो दरवाज़े में ऊँगली आ जाये तो भी जान निकल जाती है....।
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जब तक जिंदा हूँ मैसेज करता रहूँगा,
जिस दिन ना करूँ समझ लेना...
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कि अगले दिन करूँगा।
और क्या....मार दो जालिमो अभी मेरी  ऊमर ही क्या हुई है जो मैं मरुँ?
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अगर आप कहीं जल्दी में जा रहे हों और 'काली बिल्ली' आपके आगे से गुज़र जाये तो इसका मतलब....
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'काली बिल्ली' आपसे ज्यादा जल्दी में है।
 
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समोसा आलू से: जब मैं फ्राई होता हूँ तो तुम्हें ढक कर गरम तेल से बचा लेता हूँ, क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
आलू: जब लोग तुम्हें फ्राई होने के फौरन बाद खाते हैं तो मैं उनका मुँह जला देता हूँ, क्योंकि मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ।
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शिक्षा: इनकी प्रेम कहानी पर ना जायें;
समोसा ठंडा करके खायें।
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अगर आपने अपनी शट॔ का पहला बटन गलत लगाया है तो निसंदेह बाकी सभी बटन गलत ही लगेंगे ।
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      - घनश्याम टेलर
जरूरी नही है हर बात म. गांधी या शेक्सपीयर ने कही हो ।।।
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अगर आपकी राह में छोटे छोटे पत्थर आये तो समझ लेना।।।



।।।।।रोड का काम चल रहा हे।।।
 भंवरलाल  ठेकेदार
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जिंदगी में सिर्फ पाना ही सबकुछ नहीं होता,




























I
उसके साथ नट बोल्ट भी चाहिए...
-महादेव मिस्त्री
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"अगर बसंती की मौसी, ठाकुर को राखी बांधे तो बसंती और ठाकुर का क्या रिश्ता हुआ ?
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अपना-अपना काम करो कोई रिश्ता नहीं बनता; क्योंकि ठाकुर के हाथ ही नहीं थे.".
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तुम मुझे खून दो...
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मैं तुम्हे ३ बजे तक
रिपोर्ट दूंगा...!!
'गुप्ता पैथोलॉजी'
Very Touchy lines. ....
यहाँ खुदा है, वहाँ खुदा है
आस पास खुदा ही खुदा है
जहाँ खुदा नहीं है, वहाँ कल खुदेगा
           
  --नगरपालिका--
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Arj kiya hai
जिस ने ज़ल्द बाज़ी में शादी की
उसने अपना जीवन बिगाड़ लिया।।
वाह! वाह!
वाह! वाह!
और जिसने सोच समझ कर की
उसने कौन सा तीर मार लिया।।*
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मित्रों इस संवाद को ध्यान से पढ़ें और मनन भी करें।
एक संवाद......
मुशीं फैज अली ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा :
"स्वामी जी हमें बताया गया है कि अल्लहा एक ही है।
यदि वह एक ही है, तो फिर संसार उसी ने बनाया होगा ?
"स्वामी जी बोले, "सत्य है।".
मुशी जी बोले ,"तो फिर इतने प्रकार के मनुष्य क्यों बनाये।
जैसे कि हिन्दु, मुसलमान, सिख्ख, ईसाइ और सभी को अलग-अलग धार्मिक ग्रंथ भी दिये।
एक ही जैसे इंसान बनाने में उसे यानि की अल्लाह को क्या एतराज था।
सब एक होते तो न कोई लङाई और न कोई झगङा होता।
".स्वामी हँसते हुए बोले, "मुंशी जी वो सृष्टी कैसी होती जिसमें एक ही प्रकार के फूल होते।
केवल गुलाब होता, कमल या रंजनिगंधा या गेंदा जैसे फूल न होते!".
फैज अली ने कहा सच कहा आपने यदि एक ही दाल होती तो खाने का स्वाद भी एक ही होता।
दुनिया तो बङी फीकी सी हो जाती!
स्वामी जी ने कहा, मुंशीजी! इसीलिये तो ऊपर वाले ने अनेक प्रकार के जीव-जंतु और इंसान बनाए ताकि हम पिंजरे का भेद भूलकर जीव की एकता को पहचाने।
मुशी जी ने पूछा, इतने मजहब क्यों ?
स्वामी जी ने कहा, " मजहब तो मनुष्य ने बनाए हैं,
प्रभु ने तो केवल धर्म बनाया है।
"मुशी जी ने कहा कि, " ऐसा क्यों है कि एक मजहब में कहा गया है कि गाय और सुअर खाओ और दूसरे में कहा गया है कि गाय मत खाओ, सुअर खाओ एवं तीसरे में कहा गया कि गाय खाओ सुअर न खाओ;
इतना ही नही कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि मना करने पर जो इसे खाये उसे अपना दुश्मन समझो।"
स्वामी जी जोर से हँसते हुए मुंशी जी से पूछे कि ,"क्या ये सब प्रभु ने कहा है ?"
मुंशी जी बोले नही,"मजहबी लोग यही कहते हैं।"
स्वामी जी बोले, "मित्र! किसी भी देश या प्रदेश का भोजन वहाँ की जलवायु की देन है।
सागरतट पर बसने वाला व्यक्ति वहाँ खेती नही कर सकता, वह सागर से पकङ कर मछलियां ही खायेगा।
उपजाऊ भूमि के प्रदेश में खेती हो सकती है।
वहाँ अन्न फल एवं शाक-भाजी उगाई जा सकती है।
उन्हे अपनी खेती के लिए गाय और बैल बहुत उपयोगी लगे।
उन्होने गाय को अपनी माता माना, धरती को अपनी माता माना और नदी को माता माना ।
क्योंकि ये सब उनका पालन पोषण माता के समान ही करती हैं।"
"अब जहाँ मरुभूमि है वहाँ खेती कैसे होगी?
खेती नही होगी तो वे गाय और बैल का क्या करेंगे? अन्न है नही तो खाद्य के रूप में पशु को ही खायेंगे।
तिब्बत में कोई शाकाहारी कैसे हो सकता है?
वही स्थिति अरब देशों में है। जापान में भी इतनी भूमि नही है कि कृषि पर निर्भर रह सकें।
"स्वामी जी फैज अलि की तरफ मुखातिब होते हुए बोले, " हिन्दु कहते हैं कि मंदिर में जाने से पहले या पूजा करने से पहले स्नान करो।
मुसलमान नमाज पढने से पहले वाजु करते हैं।
क्या अल्लहा ने कहा है कि नहाओ मत, केवल लोटे भर पानी से हांथ-मुँह धो लो?
"फैज अलि बोला, क्या पता कहा ही होगा!
स्वामी जी ने आगे कहा,नहीं, अल्लहा ने नही कहा!
अरब देश में इतना पानी कहाँ है कि वहाँ पाँच समय नहाया जाए।
जहाँ पीने के लिए पानी बङी मुश्किल से मिलता हो वहाँ कोई पाँच समय कैसे नहा सकता है।
यह तो भारत में ही संभव है, जहाँ नदियां बहती हैं,
झरने बहते हैं, कुएँ जल देते हैं।
तिब्बत में यदि पानीहो तो वहाँ पाँच बार व्यक्ति यदि नहाता है तो ठंड के कारण ही मर जायेगा।
यह सब प्रकृति ने सबको समझाने के लिये किया है।
"स्वामी विवेका नंद जी ने आगे समझाते हुए कहा कि," मनुष्य की मृत्यु होती है।
उसके शव का अंतिम संस्कार करना होता है। अरब देशों में वृक्ष नही होते थे, केवल रेत थी। अतः वहाँ मृतिका समाधी का प्रचलन हुआ, जिसे आप दफनाना कहते हैं। 
भारत में वृक्ष बहुत बङी संख्या में थे, लकडी.पर्याप्त उपलब्ध थी अतः भारत में अग्नि संस्कार का प्रचलन हुआ। 
जिस देश में जो सुविधा थी वहाँ उसी का प्रचलन बढा।
वहाँ जो मजहब पनपा उसने उसे अपने दर्शन से जोङ लिया।
"फैज अलि विस्मित होते हुए बोला!
"स्वामी जी इसका मतलब है कि हमें शव का अंतिम संस्कार प्रदेश और देश के अनुसार करना चाहिये। मजहब के अनुसार नही।
"स्वामी जी बोले , "हाँ! यही उचित है।
" किन्तु अब लोगों ने उसके साथ धर्म को जोङ दिया। मुसलमान ये मानता है कि उसका ये शरीर कयामत के दिन उठेगा इसलिए वह शरीर को जलाकर समाप्त नही करना चाहता। 
हिन्दु मानता है कि उसकी आत्मा फिर से नया शरीर धारण करेगी इसलिए उसे मृत शरीर से एक क्षंण भी मोह नही होता।
"फैज अलि ने पूछा कि, "एक मुसलमान के शव को जलाया जाए और एक हिन्दु के शव को दफनाया जाए तो क्या प्रभु नाराज नही होंगे?
"स्वामी जी ने कहा," प्रकृति के नियम ही प्रभु का आदेश हैं।
वैसे प्रभु कभी रुष्ट नही होते वे प्रेमसागर हैं, करुणा सागर है।
"फैज अलि ने पूछा तो हमें उनसे डरना नही चाहिए?
स्वामी जी बोले, "नही! हमें तो ईश्वर से प्रेम करना चाहिए वो तो पिता समान है, दया का सागर है फिर उससे भय कैसा।
डरते तो उससे हैं हम जिससे हम प्यार नही करते।
"फैज अलि ने हाँथ जोङकर स्वामी विवेकानंद जी से पूछा, "तो फिर मजहबों के कठघरों से मुक्त कैसे हुआ जा सकता है?
"स्वामी जी ने फैज अलि की तरफ देखते हुए मुस्कराकर कहा,
"क्या तुम सचमुच कठघरों से मुक्त होना चाहते हो?"
फैज अलि ने स्वीकार करने की स्थिति में अपना सर हिला दिया।
स्वामी जी ने आगे समझाते हुए कहा,"फल की दुकान पर जाओ, तुम देखोगे वहाँ आम, नारियल, केले, संतरे,अंगूर आदि अनेक फल बिकते हैं; किंतु वो दुकान तो फल की दुकान ही कहलाती है।
वहाँ अलग-अलग नाम से फल ही रखे होते हैं। 
" फैज अलि ने हाँ में सर हिला दिया।
स्वामी विवेकानंद जी ने आगे कहा कि ,"अंश से अंशी की ओर चलो।
तुम पाओगे कि सब उसी प्रभु के रूप हैं।
"फैज अलि अविरल आश्चर्य से स्वामी विवेकानंद जी को देखते रहे और बोले "स्वामी जी मनुष्य ये सब क्यों नही समझता?
"स्वामी विवेकानंद जी ने शांत स्वर में कहा, मित्र! प्रभु की माया को कोई नही समझता।
मेरा मानना तो यही है कि, "सभी धर्मों का गंतव्य स्थान एक है।
जिस प्रकार विभिन्न मार्गो से बहती हुई नदियां समुंद्र में जाकर गिरती हैं, उसी प्रकार सब मतमतान्तर परमात्मा की ओर ले जाते हैं।
मानव धर्म एक है, मानव जाति एक है।"...
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आज का ज्ञान :
ईगो और तोंद अगर न हो
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तो दो व्यक्ति आपस में कभी भी गले मिल सकते हैं ।।.
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मन की बात...
आज कल के बच्चे रिफ्रेश होने के लिए जहाँ वाटर पार्क, गेम सेंटर जाने की जिद करते हैं ...
वहीं हम ऐसे बच्चे थे जो मम्मी-पापा के एक झापङ से ही फ्रेश हो जाते थे.!
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वो भी क्या दिन थे....????
जब बच्चपन में कोई रिश्तेदार जाते समय 10 ₹ दे जाता था..
और माँ 8₹ टीडीएस काटकर 2₹ थमा देती थी....!!!
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घर का T.V बिगड़ जाए
तो माता-पिता कहते हैं..
बच्चों ने बिगाड़ा है;
और अगर बच्चे बिगड़ जाएं तो
कहते है..
T.V. ने बिगाड़ा है !!!
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आज कल के माँ बाप सुबह स्कूल बस में बच्चे को बिठा के ऐसे बाय बाय करते हैं जैसे पढ़ने नहीं विदेश यात्रा भेज रहें हो....
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एक हम थे जो रोज़ लात खा के स्कूल जाते थे...
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4-4साल के बच्चे गाते फिर रहे हैं
"छोटी ड्रेस में बॉम्ब लगदी मैनु"
साला जब हम चार साल के थे तो 1 ही वर्ड याद था..
वही गाते फिरते थे...
"शक्ति शक्ति शक्तिमान-शक्तिमान"
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भला हो हनी सिंह और जॉन सीना का..
जिसने आज के बच्चो को फैशन के नाम पे बाल बारीक़ छोटे रखना सीखा दिया..
हमारी तो सबसे ज्यादा कुटाई ही बालो को लेके हुई थी।।
हम दिलजले के अजय देवगन बनके घूमते थे,
और जिस दिन पापा के हाथ लग जाते उस दिन नाईं की दुकान से ओमकारा का लंगड़ा त्यागी बनाके ही घर लाते थे
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Biwi के साथ बहस करना और
किसी software का license
agreement पढना एक
जैसा होता है,
अंत में आप सबकुछ ignore करके
click करते हैं - "I Agree"
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हो गई है पीर पर्वत-सी
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

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