Tuesday, 23 June 2015

अमरनाथ में शेषनाग का महत्व....यात्रा के लिए क्या है सबसे जरूरी.......

अमरनाथ में शेषनाग का महत्व

 

 

 



बर्फानी बाबा के दर्शनों के लिए अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है। हजारों की तादाद में देश भर के शिव भक्त अमरनाथ की पवित्र गुफा के दर्शन को जम्मू कश्मीर पहुंच रहे हैं। भगवान शिव की आस्था के इस मार्ग में जहां यात्रियों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है वहीं यहां आने पर प्रकृति की सुंदरता के अद्भुत दर्शन भी करने को मिलते हैं।


अमरनाथ यात्रा में शेषनाग झील का धार्मिक महत्व है। यह कश्मीर वैली के लोकप्रिय टूरिस्ट जगहों में से एक हैं। यह पहलगाम से लगभग 23 किलोमीटर जबकि श्रीनगर से लगभग 120 किलोमीटर दूर है। यहां से अमरनाथ गुफा 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यह झील जमीन से 3658 की ऊंचाई पर स्थित है। शेषनाग झील की अधिकतम लंबाई 1.1 किलोमीटर है जबकि इसकी चौड़ाई 0.7 किलोमीटर है। इस चारों ओर चौदह-पन्द्रह हजार फीट ऊंचे-ऊंचे पर्वत हैं।

शेषनाग झील हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। सर्दियों में यह झील जम जाती है जहां पहुंचना कठिन हो जाता है। इस झील को चारो ओर से कई ग्लेशियरों ने अपने आगोश में ले रखा है। यहीं से लिद्दर नदी निकलती है जो पहलगाम की सुन्दरता में चार चांद लगा देती है।

भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार शेषनाग का मतलब सांपों के राजा से लिया जाता है। ऐसी धारणा है कि जब शिव जी माता पार्वती को अमरकथा सुनाने अमरनाथ ले जा रहे थे, तो उनका इरादा था कि इस कथा को कोई ना सुने इसलिए शेषनाग को इस झील में छोड़ दिया। ताकि कोई इस झील को पार करके आगे न जा पाए। आज भी कहा जाता है कि कभी-कभी झील के पानी में शेषनाग दिखाई देते हैं।

यह इलाका दुर्गम होने की वजह से यहां न तो कोई होटल है और न ही कोई गेस्ट हाउस। अधिकतर यात्री चन्दनवाड़ी ठहरते हैं और वहां से 16 किलोमीटर पैदल चलकर या फिर पोनी पर बैठकर इस झील के दर्शन करने आते हैं। अगर यात्री इस झील के आसपास रुकना भी चाहते हैं तो यहां कई तरह के तम्बू उपलब्ध हैं और राज्य सरकार द्वारा प्रबंध किए जाते हैं। यह तम्बू अप्रैल से जून महीने तक उपलब्ध रहते हैं। इस तरह के तम्बुओं की कीमत एक रात के लिए 400 रुपए तक है।

यहां आते समय ध्यान रखें कि आपके पास पानी की बोतल और बरसात से बचने के लिए छाता और रेनकोट जरूर हो। आप ठंड से बचने का सभी सामान साथ ले जाएं। साथ ही चेहरे और शरीर पर लगाने के लिए क्त्रीम का भी प्रबंध करने के बाद ही जाएं। खाने में आप सूखे मेवे और चॉकलेट रखना ना भूलें।
.
.
.
.
..
..

अमरनाथ यात्रा के लिए क्या है सबसे जरूरी


आपकी यात्रा सुखमय हो, इसके लिए आप यात्रा पर निकलने से पहले जानें कुछ जरूरी बातें..

जम्मू-कश्मीर से बाहर के प्रीपेड सिम लखनपुर सीमा में प्रवेश करते ही बंद हो जाते हैं, जबकि पोस्टपेड मोबाइल चलते रहते हैं। इस बार प्रशासन की ओर से आधार शिविर भगवती नगर में ही प्रीपेड सिम उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिनकी वेलिडिटी पांच से सात दिन तक रहेगी।

यह एक रोमांचकारी एवं दुर्गम यात्रा है, इसलिए इसकी तैयारी के लिए श्रद्धालुओं को रोजाना 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास करना चाहिए। साथ ही योग आदि से शारीरिक क्षमता में वृद्धि करने का भी प्रयास करना चाहिए।

यात्रा के दौरान मौसम बेहद सर्द रहता है। इसलिए यात्रियों को अपने साथ पर्याप्त ऊनी कपड़े, बिस्तर बंद, गर्म मोजे, ट्रैकिंग शूज, कोल्ड क्रीम, मंकी कैप, रेनकोट, टॉर्च, छड़ी, दस्ताने आदि भी रखने चाहिए। यहां तापमान कभी-कभी पांच डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे चला जाता है। वहीं बारिश कभी भी अचानक हो सकती है। इसलिए आपका सारा सामान प्लास्टिक अथवा वॉटर प्रूफ बैग में बंद होना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर में पॉलीथिन पर प्रतिबंध है, इसलिए प्रकृति के संरक्षण हेतु इस का ध्यान रखें।

साड़ी पारंपरिक भारतीय परिधान है, लेकिन यात्रा की दृष्टि से यह सुविधाजनक नहीं है। इसलिए बेहतर है कि महिलाएं सलवार-कमीज, पैंट-जींस अथवा ट्रैक सूट आदि का चयन करें।

यह दुर्गम यात्रा है, इसलिए छह सप्ताह से अधिक गर्भवती महिलाओं, 75 वर्ष से ऊपर के वृद्ध और 13 साल से छोटी उम्र के बच्चों को इस बार यात्रा करने की अनुमति नहीं है।

यात्रा के दौरान कुली या घोड़े वाले को अपने साथ रखें, क्योंकि यात्रा के दौरान आपको किसी भी चीज की अचानक जरूरत पड़ सकती है। घोड़ा अथवा खच्चर लेने से पूर्व मोलभाव भी कर लें।

यात्रा के दौरान इस्तेमाल के लिए एक पानी की बोतल, सूखे मेवे, भुने हुए चने, टॉफी, गुड़, चॉकलेट आदि भी अपने साथ रखें।

ध्यान रहे, यात्रा कभी अकेले न करें, बल्कि समूह के साथ रहें। अजनबी व्यक्ति पर विश्वास कर कोई भी वस्तु ग्रहण न करें।

अपनी जेब में सदैव अपना आई कार्ड अथवा किसी पर्ची पर अपना और अपने साथी-समूह का नाम, पता तथा फोन नंबर लिखकर रखें।

पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश सभी शिव-तत्व हैं, इसलिए यात्रा के दौरान शिव और प्रकृति दोनों का सम्मान करें। शॉर्ट कट का इस्तेमाल करने से बचें।

No comments:

Post a Comment