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Saturday, 20 June 2015

दिल को छू लेने वाली एक प्रेरणादायी कहानी

दिल को छू लेने वाली एक प्रेरणादायी कहानी

एक बार एक बस कंडक्टर था जो कि दॅनिक मुसाफिरों के साथ बुरा व्यवहार करता था...
लोग भी उस बुरे कंडक्टर से बहुत नाराज रहते थे...
एक बार एक छोटा बच्चा उसकी बस में सफर कर रहा था... उस बच्चे के पास टिकट के पैसे नहीं थे...
ये जानकर कंडक्टर गुस्सा हो गया और बच्चे को गेट के बाहर फेंक दिया.. दुर्भाग्यपूणवश बच्चा चलती गाड़ी के नीचे आ गया और मर गया...
कंडक्टर को दोषी मानकर और उसके पिछले चाल चलन को ध्यान में रखकर जज ने उसे सजा ए मौत दी.
उसे एक कमरे में ले जाया गया जहां बिजली वाली कुर्सी पर बिठाकर दर्दनाक मौत दी जाती थी...
उसे कुर्सी पर बिठाकर करेंट उसके शरीर में दौड़ा दी गयी.. 
पर...ये क्या... उस आदमी को कुछ नहीं हुआ...वो बच गया...
कानूनन उसने सजा भुगत ली थी.. इसलिए उसे छोड़ दिया गया...
अगले दिन से वह फिर अपने काम पर लौट आया.. पर अब वो बदल चुका था.. एक अच्छा इन्सान बन गया था... लोग भी अब उस अच्छे कंडक्टर से खुश थे...
एक दिन एक बच्चा बस में चढ़ा... उसके पास बस का किराया नहीं था...लेकिन इस बार उस कंडक्टर नें अच्छाई का परिचय देते हुए बच्चे से कुछ नहीं कहा...और उसे एक चौकलेट दी...बच्चा खुशी से उछलने लगा... वो गेट पर ही खड़ा था...अचानक उसका पैर फिसला और बच्चा नीचे जा गिरा...और उसकी मौत हो गई...कंडक्टर को जब जज के पास लाया गया...तो जज आगबबूला हो गया...उसने कंडक्टर की एक भी बात नहीं सुनी...और सजा ए मौत का फरमान सुना दिया...उसे जब दोबारा उस बिजली वाली कुर्सी पर बिठाकर करंट दिया गया...तो ये क्या...उसकी कुछ पलों में ही मौत हो गयी...
ये कॅसे हुआ...आपको शायद समझ में न आया हो कि ये कैसे हुआ...पहली बार करंट देने पर वो नहीं मरा...
पर दूसरी बार कुछ पलों में वो मर गया...
चलिए मैं समझा देता हूं..
इसका जवाब कहानी में ही छुपा हुआ है..
पहले वो एक बुरा कंडक्टर था..
बाद में एक अच्छा कंडक्टर बन गया..
So according to electrical engineering... bad conductor opposes electrical current and gives less passage to current and a good conductor does not oppose current...
Its just a refresher course from IIN...

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