Tuesday, 23 June 2015

जौहर वीर गोगाजी चौहान

राजा हर्षवर्धन के समय में ही हिन्दुस्तान के पश्चिमी भू भाग बलूचिस्तान के कोने में एक बादल मंडरा ने लगा था। ये संकेत था हिन्दुस्तान में पर आने वाले उस मजहबी बवण्डर का जिसका इंसानियत से कोई वास्ता ही नहीं था। लूटमार दरिद्रता वेश्यावृत्ति कि कुरीतियों से जकङे अफगानी कबिलो ने इस मजहब का नकाब पहनकर हिन्दुस्तान मे जो हैवानियत का खेल खेला उसे युगों युगों तक भुलाया नहीं जा सकता । एक हाथ में इस्लाम का झंडा व दुसरे हाथ में तलवार से बेगुनाह इन्सानो के खुन की नदियाँ बहाता हिन्दुस्तान। आया वो था गजनी का सुल्तान मुहम्मद वो हर साल हिन्दुस्तान आता था आैर। लूटमार कर गजनी भाग जाता था!?
पहली बार जब मुहम्मद हिन्दुस्तान में लुट के इरादे से आया तो उसका मुकाबला राजा जयपाल शाही से हुआ। धोखाधड़ी से उसने जयपाल को हराया था राजा जयपाल शाही ने अपनी सेना के साथ अन्तिम साँस तक मुकाबला किया और विरगती प्राप्त की मुहम्मद लूटमार करते हुए सोमनाथ की और बढ़ रहा था बीच में ही एक छोटा सा राज्य गोगामढी था वहा के शासक गोगाजी चौहान थे जब इस बात की खबर लगी गोगाजी को । की मुहम्मद उनके राज्य के रास्ते ही सोमनाथ मन्दिर लूटने जा रहा है तो नब्बे (90) साल के बूढे गोगा बप्पा का शरीर क्रोध से थर्रा ने लगा खुन खोलने लगा उन्होंने मुहम्मद की फौज से लोहा लेने का निश्चय किया । उन्होंने अपने पोते को (जिनका नाम सामंत चौहान था) जो बहुत ही चतुर था उन सभी राजाओं के पास सहायता हेतु भेजा जिनके राज्यों के रास्ते लूटमार करते हुए मुहम्मद को सोमनाथ मन्दिर लूटने जाना था। सामंत सहायता के लिए सभी राजाओ से मिला लेकिन हर जगह उसे निराशा ही हाथ लगी । 

मुहम्मद की फौज गोगामढी से गुजर रही थी। मदद की कोई। आशा नहीं देखकर गोगा बप्पा ने अपने चौहान भाईयो के साथ केसरिया बाना पहनकर 900 सिपाहियों के साथ मुहम्मद। की फौज का पीछा किया और रास्ता रोका भयंकर युद्ध हुआ मुहम्मद के लाखों सिपाहियों से लोहा लेते हुए। अपनी सेना के साथ गोगा बप्पा भी विरगती को प्राप्त हो गये । ये समाचार जब सामंत को मिला तो मुहम्मद। की फौज का खात्मा करने की योजना बनाई। उसने ऊटनी पर सवार होकर मुहम्मद की फौज का पीछा किया और मुहम्मद कि फौज में शामिल हो गया भीषण तेज गर्मी और आँधियों के कारण मुहम्मद और उसकी फौज सोमनाथ। का रास्ता भटक गयी तब सामंत ने कहा कि वो सोमनाथ मन्दिर का दूसरा एक और रास्ता जानता है जो कम समय मे ही सोमनाथ मन्दिर पहुंचा जा सकता है मुहम्मद के पास कोई सारा न था। उसने पैदल फौज को सामंत के साथ जाने का हुक्म दिया फिर क्या था सामंत चौहान अपनी योजना अनुसार। फौज को गुमराह करते हुए। जैसलमेर के रेतीले टीलों में ले गया जहां कोसो की दूरी तय करने पर पानी नसीब न हो सके अवसर मिला और सावंत चौहान ने अपनी शमशेर खींच ली हर हर महादेव का नारा बुलंद करते हुए। शत्रु ओ पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा भगवान् सोमनाथ को याद आँधी ने विकराल रूप धारण कर लिया रेतीले टीलों में पहले पीले साँप पाये जाते थे जिन्होंने शत्रु ओ का डस डस कर वध कर दिया बचे वे रेतीले तूफान भीषण गर्मी में जलकर स्वाहा हो गये ईस प्रकार सावंत चौहान मुहम्मद की आधी फौज के साथ लङता हुआ रेगिस्तान में धरती माता की गोद में समा गया।।
शत् शत् नमन उन माँताओ को जिन्होंने ऐसे शूरवीर योद्धाओ को जन्म दिया
http://rajputanasoch-kshatriyaitihas.blogspot.in/2015/06/guga-ji-chauhan-story-of-great-rajput.html

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