Saturday, 2 May 2015

पुत्रजीवक बीज की सत्यता



पुत्रजीवक बीज की सत्यता 

स्त्री (माँ- बहन) को दवाइयाँ देकर लिंग का निर्धारण की अवधारणा ही मिथ्या है एवं भ्रामक है,क्योंकि ‘’पुत्रजीवक बीज’’ स्त्रियों को सेवन कराया जाता है, न की पुरुषों को। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के जेनेटिक्स साइंस के अनुसार x व y क्रोमोसोम से लिंग का निर्धारण होता है मानव के लिंग में जब x व y क्रोमोसोम मिलते हैं तो लड़का और यदि x व x क्रोमोसोम मिलते हैं तो लड़की पैदा होती है। विज्ञान द्वारा यह भी प्रमाणिक हो चुका है की यह लिंग निर्धारण पुरुष के y क्रोमोसोम पर निर्भर करता है। स्त्री का लिंग निर्धारण से कोई संबंध नहीं है। अत: शिवलिंगी बीज व पुत्रजीवक बीज या कोई भी दवा स्त्रियॉं को खिलाने से लिंग निर्धारण नहीं होता है। अनेक प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रन्थों में लिखा है कि इसका प्रयोग शिवलिंगी के बीजों के साथ करने से स्त्रियों का बांझपन दूर होता है। 
पुत्रजीवक पौधे से प्राप्त होने वाले बीज जिसका नाम ही पुत्रजीवक है तथा पौधे का बोटेनिकल नाम पुत्रजीवा रॉक्सबर्घी (PUTRANJIVA ROCXBURGHI)है। इसी के साथ बंगाली, मराठी, गुजरती, संस्कृत, तेलगु, नेपाली आदि भाषाओं में भी पुत्रजीवक के नाम मिलते-जुलते नाम से ही जाना जाता है। 
दिव्य फार्मेसी द्वारा इस दवा का प्रोसेसिंग करके निर्माण नहीं किया जाता, अपितु पुत्रजीवक पौधे से प्राप्त बीजों को आदिवासी, वनवासी व किसानों से खरीदकर केवल पैकिंग करके उपलब्ध काराया जाता है। भारत, मलेशिया, पाकिस्तान, नेपाल आदि कई देशों में भी यह पुत्रजीवक पौधा पाया जाता है तथा इसी प्रकार के नाम से जाना जाता है। पुत्रजीवक पौधे से प्राप्त होने के कारण इसके बीजों को उपरोक्त स्थानों के वैद्यों, नागरिकों, किसानों, वैज्ञानिकों के बीच हजार साल से यह औषधि पुत्रजीवक बीज के नाम से ही प्रचलित है यह नाम दिव्य फार्मेसी द्वारा नहीं रखा गया। 
कुछ लोग अज्ञान व स्वार्थ के कारण से हमें और आयुर्वेद को बदनाम करने के लिए सुनियोजित प्रयास कर रहे हैं। सत्यता यह है की आयुर्वेद में नि: संतानों व बांझपन के रोगियों की संतान प्राप्ति के लिए हजारों वर्ष पहले से यह बीज प्रयोग किए जा रहे हैं। 
पतंजलि व दिव्य फार्मेसी के सभी उत्पाद उसके आयुर्वेदिक शास्त्रीय नामों के साथ उपलब्ध करवाये जाते हैं शास्त्रों में पुत्रजीवक शब्द का प्रयोग संतान के लिए किया गया है। पतंजलि द्वारा उपलब्ध करवाये गए बीज बांझपन को दूर करने के लिए है लिंग निर्धारण के लिए नहीं। 
दिव्य फार्मेसी द्वारा पैकिंग किया गए पुत्रजीवक बीज के पैकेट पर कहीं भी यह नहीं लिखा गया कि इससे पुत्र कि प्राप्ति होती है केवल यह लिखा गया है कि यह बीज बंधत्व व स्त्री विकारों मे लाभप्रद है। 
अगर माननीय के॰ सी त्यागी जी को आपति है तो वह हिन्दी, अंग्रेजी व अन्य भाषाओं में व देशों में इस पौधे का प्रचलित नाम व बोटेनिकल नाम बदलवाने का अभियान चलाये।


4 comments:

  1. अब ये अफवाह कौन उड़ा रहा है बे कि पूत्रजीवक बीज का रायते के साथ सेवन करने से केजरीवाल पैदा होता है।

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  2. जाने 'दिव्य पुत्रजीवक बीज' की सच्चाई !!!!

    आजकल संसद और टी वी चैनलों पर एक आयुर्वेद औषधि के नाम पर घमासान मचा हुआ है. जिस औषधि को लेकर कुछ लोग भ्रम फैलाकर अनावश्यक विवाद कर रहे हैं उसका नाम है “पुत्रजीवक”. आइये जाने कि वास्तव में ये क्या है?

    नाम- इसका वानस्पतिक नाम Putranjihva roxburghii (syn. Drypetes roxburghii, Nageia putranjiva) है.

    Bengali : putranjiva ; Hindi: पुत्रजीव putrajiv; Gujarati: પુત્રંજીવા putranjiva

    Kannada : ಮೆಣಸಿನಕಲೆ menasinakale, ಪುತ್ರಮ್ಜೀವ putramjiva ; Konkani : saman

    Malayalam : പുത്തിലഞ്ഞി puththilanji ; Marathi : जीवपुत्रक jivputrak, पुत्रजीवी putrajivi

    Oriya: poilundia, sutajivah; Sanskrit: अपत्यम्जीवः apatyamjivah, पुत्रंजीवः putranjivah, श्लीपदमपहःshripadamapah

    Tamil : கறிப்பாலை kari-p-palai, புத்திரசீவி puttira-civi ; Telugu : పుత్రజీవిక putra-jivika

    अन्य नाम- child's amulet tree, child-life tree, lucky bean tree, officinal drypetes, spurious wild olive

    आयुर्वेद ग्रंथों में वर्णन
    आयुर्वेदिक ग्रंथों में एक बहुत ही विशिष्ट प्रक्रिया का वर्णन आता है जिसे पुंसवन संस्कार कहते हैं. इस प्रक्रिया का उद्देश्य आगे आने वाली पीढ़ी में उत्तम गुणों वाली संतान उत्पन्न करना होता है. इस प्रक्रिया से गर्भ को स्थिरता मिलती है ऐसा माना जाता है. इसीलिए इस औषधि को गर्भदा और गर्भकरा के नाम से जाना जाता रहा है.सुश्रुत संहिता में पुत्रजीवक का उल्लेख कुल दो बार आया है. अष्टांग संग्रह और अष्टांग ह्रदय के रचियता वाग्भट्ट और सुश्रुत ने इसे तापसीवृक्ष कहा है. दोनों आचार्यों ने इसे अर्कादि गण नाम के औषध समूह में रखा है. इस औषधि के यष्टिपुष्पा और श्लीपदापहा भी नाम कहे गए हैं.

    सामान्य प्रयोग
    प्राचीन काल से ही इस औषधि का प्रयोग बन्ध्यत्व ही नहीं बल्कि अनेक रोगों जैसे फाइलेरिया, मूत्ररोग, जलन और तृष्णा आदि में किया जाता रहा है. इसके बीजरहित फल का उपयोग खांसी, जुखाम और सामान्य बीमरियों में करते थे. लेकिन इसके नाम के कारण अधिकाँश आयुर्वेदज्ञों ने इसका उपयोग बन्ध्यत्व में अधिक किया है. इसका उपयोग pre-conception stage में vaginal infections, genitourinary diseases और skin eruptions में भी किया जा सकता है. हालांकि सत्यता यह भी है कि इसकी बंध्यतव में अचूक क्षमता का सिद्ध होना आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से होना बाकी है.

    Morphology - पुत्र्जीवक एक मध्यम आकार का और सदाबहार वृक्ष है जिसकी ऊंचाई 12 मीटर होती है. शाखाएं और छाल गहरे भूरे रंग की, पत्तियां साधारण, गहरे हरे रंग की चमकदार, अण्डाकार-आयताकार, दाँतेदार होती हैं. नर पुष्प समूह में, और मादा पुष्प संख्या में 1 से 3 तक होते हैं.

    Phytochemical Analysis - इसके बीजों की गुठली में से वाष्प आसवन से बीज सरसों के तेल के सामान तेज महक वाला essential oil निकलता है. रिसर्च से पता चलता है कि इसमें दर्दनाशक, ज्वरहर और सूजन नाशक गुण होते हैं. इसके फल के गूदे में mannitol और अल्प मात्रा में saponin glucoside होता है. इसके तेल में मुख्य रूप से isopropyl 2-butyl isothio-cyanate और अल्प मात्रा में 2-methyl-butyl isothiocyanate होता है. इसमें उपस्थित iso-thiocyanates glycosidic progenitors के enzymic hydrolysis से उत्पन्न होते हैं जो कि मुख्य रूप से glucoputranjivin, gluco- cochlearin and glucojiaputin होते हैं. इसके बीज में gluco- cleomin नाम का अतिरिक्त glucoside भी पाया है जिसमे non- volatile mustard oil, cleomin उपस्थित होता है. इसके बीज के आवरण में putranjivoside, putranoside A, B, C and D, beta- sitosterol और tis beta-D-glucoside नामक chemical पाए जाते हैं. पत्तियों में amentoflavone और इसके अवयव जैसे , beta-amyrin and its palmite, polyphenols, putranjiva sa-ponin A,B,C, and D and stigmasterol होते हैं. इसकी छाल में contains friedelin, friede- lanol, friedelanone, friedelan-3,7-di- one (putranjivadione), 3-alpha-hydro- xy friedelan- 7-one (roxburgholone), carboxylic acid, putric acid, putran- jivic acid नामक केमिकल होते हैं. इसके तेल में Rhizoctonia solani नामक fungus के विरुद्ध mild antifungal activity भी खोजी गयी है.

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  3. पुत्र जीवक के औषधीय गुणों पर रिसर्च के प्रमाण....
    American Journal of PharmTech Research (AJPTR) में पुत्र्जीवक पर रिसर्च प्रकाशित हो चुकी है.

    1-Purification, characterisation and cloning of a 2S albumin with DNase, RNase and antifungal activities from Putranjiva roxburghii.
    Tomar PP, Chaudhary NS, Priyadarshi P, Gahloth D, Patel GK, Selvakumar P, Kumar P, Sharma AK.
    Appl Biochem Biotechnol. 2014 Sep;174(2):471-82. doi: 10.1007/s12010-014-1078-9. Epub 2014 Jul 31. Erratum in: Appl Biochem Biotechnol. 2014 Oct;174(4):1695. Mishra, Pushkar [corrected to Priyadarshi, Pushkar].

    2- A new ellagic acid glycoside and DNA topoisomerase IB inhibitory activity of saponins from Putranjiva roxburghii.
    Kumar A, Chowdhury SR, Chakrabarti T, Majumdarb HK, Jha T, Mukhopadhyay S.
    Nat Prod Commun. 2014 May;9(5):675-7.

    3- Fabrication, characterization and mosquito larvicidal bioassay of silver nanoparticles synthesized from aqueous fruit extract of putranjiva, Drypetes roxburghii (Wall.).
    Haldar KM, Haldar B, Chandra G.
    Parasitol Res. 2013 Apr;112(4):1451-9. doi: 10.1007/s00436-013-3288-4. Epub 2013 Jan 22.

    4- Putralone, a novel 10alpha-hydroxy-25-nor D:A friedo-oleanane triterpenoid from Putranjiva roxburghii.
    Mukherjee T, Sarkar T, Paul P, Chakraborty AK, Jaisankar P, Mukhopadhyay SB.
    Nat Prod Commun. 2012 Apr;7(4):511-3.

    5- Characterization of a thermostable family 1 Glycosyl Hydrolase enzyme from Putranjiva roxburghii seeds.
    Patel GK, Kar B, Sharma AK.
    Appl Biochem Biotechnol. 2012 Feb;166(3):523-35. doi: 10.1007/s12010-011-9445-2. Epub 2011 Nov 16.

    6-Antinociceptive, antipyretic, and anti-inflammatory activities of Putranjiva roxburghii Wall. leaf extract in experimental animals.
    Reanmongkol W, Noppapan T, Subhadhirasakul S.
    J Nat Med. 2009 Jul;63(3):290-6. doi: 10.1007/s11418-009-0336-6. Epub 2009 Apr 23.

    7- Seasonal variations of airborne pollen in Allahabad, India.
    Sahney M, Chaurasia S.
    Ann Agric Environ Med. 2008 Dec;15(2):287-93.

    8- Purification and characterization of a trypsin inhibitor from Putranjiva roxburghii seeds.
    Chaudhary NS, Shee C, Islam A, Ahmad F, Yernool D, Kumar P, Sharma AK.
    Phytochemistry. 2008 Aug;69(11):2120-6. doi: 10.1016/j.phytochem.2008.05.002. Epub 2008 Jun 16.

    9-Assessment of allergenicity to Mallotus phillipensis pollen in atopic patients in India: a new allergen.
    Rawat A, Singh A, Roy I, Kumar L, Gaur SN, Ravindran P, Bhatnagar AK, Singh AB.
    J Investig Allergol Clin Immunol. 2004;14(3):198-207.

    10- Cytogenetic toxicity of leaf extract of Putranjiva roxburghii, a medicinal plant.
    Awasthy KS, Chaurasia OP, Sinha SP.
    J Toxicol Sci. 2000 Aug;25(3):177-80.

    11-Some novel folk treatments among the tribes of uttar pradesh.
    Singh H, Bisht GS.
    Anc Sci Life. 1999 Jan;18(3-4):250-3.

    12-Immunobiochemical characterization of Putranjiva roxburghii pollen extract and cross-reactivity with Ricinus communis.
    Singh BP, Verma J, Sridhara S, Rai D, Makhija N, Gaur SN, Gangal SV.
    Int Arch Allergy Immunol. 1997 Nov;114(3):251-7.

    13-Putranjiva roxburghii. 3. Structure of putranjivanonol.
    Garg HS, Mitra CR.
    Planta Med. 1971 Apr;19(4):352-62.

    14-The Wealth of India, Raw Materials, Vol-8: Ph-Re,
    edition, 2005, page-325-326

    15-PMID: 19387768, J Nat Med. 2009 Jul;63(3):290-6.
    Epub 2009 Apr 23.

    16- http://www.ajptr.com/…/vol…/february-2014-issue-1/41032.html

    17-http://ijpsr.com/…/microscopical-and-physico-chemical-inve…/

    18- http://ijpsr.com/…/hypoglycemic-activity-of-putranjiva-rox…/

    19-http://connection.ebscohost.com/…/microscopical-physico-che…

    20- http://www.jourlib.org/paper/2263478#.VUNmetKqqko

    21- http://www.ssjournals.com/index.php/ijbar/article/view/426

    22- http://www.efloraofgandhinagar.in/tree/putranjiva-roxburghii

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  4. निष्कर्ष -तो देखा आपने जिस आयुर्वेदिक औषधि के बारे में इतना विवाद खड़ा किया जा रहा है वो कोई विवादास्पद औषधि नहीं है बल्कि विश्व के अनेक देशों में इसके औषधीय गुणों पर खोज की जा चुकी है और अभी भी चल रही है. इसलिए स्वयं अपने से ही इसके बारे में आप लोग कुछ भी न सोच लें . आयुर्वेद हमारे ऋषियों द्वारा दी गयी अमूल्य धरोहर है जो पूरी तरह से सिद्ध की गयी जानकारी ही देता है . इसके बारे में कुछ भी कहने सुनने से पहले इसका अच्छी तरह से अध्ययन कर लें या फिर किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से इसके बारे में जानकारी प्राप्त करें उसके बाद ही अपनी कोई धारणा बनाएँ.
    जो लोग गुलाब जामुन में गुलाब और जामुन, कश्मीरी पुलाव में कश्मीर, हॉट डोग में गर्म कुत्ता और दारुहरिद्रा नाम की आयुर्वेदिक दवा में दारु, अश्वगंधा में घोडा, सर्पगंधा में सांप ढूंढते है, वही लोग पुत्रजीवक में पुत्र को ढूंढते हैं !!!!

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