Saturday, 16 May 2015

हरयाणा ग़ज़ब है !! अच्छा चलिए : आप कैसे पता करेंगें कि आप हरयाणा के किस कोने में हैं

 
Haryana
  हरयाणा अजब है !
हरयाणा ग़ज़ब है !!
अच्छा चलिए : आप कैसे पता करेंगें कि आप हरयाणा के किस कोने में हैं  ???

1) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
उन्हें देखता है
और
चला जाता है... ये भिवानी है.

2) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है, उन्हें समझाने की कोशिश करता है, फलस्वरुप दोनों लड़ना छोड़ कर समझाने वाले को मारने लग जाते हैं...
ये 'सोनीपत' है.

3) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी अपने घर से आवाज़ देता है :
"मेरे घर के आगे मत लड़ो, कहीं और जाओ".... ये झज्झर है.

4) दो आदमी लड़ रहे हैं, पूरी भीड़ देखने के लिये इकट्ठी हो जाये
और
एक आदमी चाय की दुकान लगा दे....
तो ये रोहतक है.

5) दो आदमी लड़ रहे हैं, दोनों मोबाइल से कॉल कर
दोस्तों को बुलाते हैं,
थोड़ी देर में 50 आदमी लडने लगते हैं...
ये 'करनाल' है.

6) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी ढेर सारी बीयर ले आता है,
तीनों एक साथ बीयर पीते हुए एक-दूसरे को गाली देते हैं...!
ये 'यमुनानगर है.

7) दो आदमी लड़ रहे हैं,
दो आदमी और आते हैं,
वो आपस में बहस करने लगते हैं कि कौन सही है कौन गलत, देखते देखते भीड़ जमा हो जाती है,
पूरी भीड़ बहस करती है, लड़ने वाले दोनों खिसक लेते हैं....!
ये "हिसार " है.

8) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
गन निकालता है
और
🔫ढिचकांव🔫...
और सब शान्त हो जाता है..! यानि कि
आप "पानीपत" पहुँच गए...
ओर अगर.. 
  दो आदमी लड़ रहे हैं, उन दोनो कि लडाइ मे तिसरा मार कर चला जाए तो फिर यह समझ  लीजिए :  जींद मे आपका स्वागत है !!!  


कङवी सच्चाईँ...
.
नदी तालाब मेँ नहाने मेँ शर्म आती है, और
स्विमिँग पूल मेँ तैरने को फैशन कहते हो....
.
गरीब को एक रुपया दान नहीँ कर सकते, और
वेटर को टीप देने मेँ गर्व महसूस करते हो..
.
माँ बाप को एक गिलास पानी भी नहीँ दे सकते, और
नेताओँ को देखते ही वेटर बन जाते हो....
.
बड़ोँ के आगे सिर ढकने मेँ प्रॉबलम है, लेकिन
धूल से बचने के लिए 'ममी' बनने को भी तैयार हो..
.
पंगत मेँ बैठकर खाना दकियानूसी लगता और
पार्टियोँ मेँ खाने के लिए लाइन लगाना अच्छा लगता है...
.
बहन कुछ माँगे तो फिजूल खर्च लगता है, और
गर्लफ्रेँड की डिमांड को अपना सौभाग्य समझते हो..
.
गरीब की सब्जियाँ खरीदने मेँ इंसल्ट होती है, और
शॉपिँग मॉल मेँ अपनी जेब कटवाना गर्व की बात है...
.
बाप के मरने पर सिर मुंडवाने मेँ हिचकते हो, और
'गजनी' लुक के लिए हर महीने गंजे हो सकते हो....
.
कोई पंडित अगर चोटी रखे तो उसे एंटीना कहते हो, और
शाहरुख के 'डॉन' लुक के दीवाने बने फिरते हो....
.
किसानों के द्वारा उगाया अनाज खाने लायक नहीँ लगता, और
उसी अनाज को पॉलिश कर के कंपनियाँ बेचेँ तो क्वालिटी नजर आने लगती है..
.


.
.
.
.
.

कोई सोना चढाए , कोई चाँदी चढाए ;
कोई हीरा चढाए , कोई मोती चढाए ;

चढाऊँ क्या तुझे भगवन ; कि ये निर्धन का डेरा है ;
अगर मैं फूल चढाता हूँ , तो वो भँवरे का झूठा है ;
अगर मैं फल चढाता हूँ , तो वो पक्षी का झूठा है ;
अगर मैं जल चढाता हूँ , तो वो मछली का झूठा है ;
अगर मैं दूध चढाता हूँ , तो वो बछडे का झूठा है ;

चढाऊँ क्या तुझे भगवन ; कि ये निर्धन का डेरा है ;
अगर मैं सोना चढ़ाता हूँ , तो वो माटी का झूठा है ;
अगर मैं हीरा चढ़ाता हूँ , तो वो कोयले का झूठा है ;
अगर मैं मोती चढाता हूँ , तो वो सीपो का झूठा है ;
अगर मैं चंदन चढाता हूँ , तो वो सर्पो का झूठा है ;

चढाऊँ क्या तुझे भगवन, कि ये निर्धन का डेरा है ;
अगर मैं तन चढाता हूँ , तो वो पत्नी का झूठा है ;
अगर मैं मन चढाता हूँ , तो वो ममता का झूठा है ;
अगर मैं धन चढाता हूँ , तो वो पापो का झूठा है ;
अगर मैं धर्म चढाता हूँ , तो वो कर्मों का झूठा है ;

चढाऊँ क्या तुझे भगवन , कि ये निर्धन का डेरा है ;
तुझे परमात्मा जानू , तू ही तो है - मेरा दर्पण ;
तुझे मैं आत्मा जानू , करूँ मैं आत्मा अर्पण.

No comments:

Post a Comment