Saturday, 4 April 2015

हनुमानजी की तीन सौ साल पुरानी रहस्यमयी मूर्ति का राज़ ............

हनुमानजी की तीन सौ साल पुरानी रहस्यमयी मूर्ति का राज़ ............


पवनपुत्र हनुमान की कई मूर्तियां आपने देखी होगी। कुछ पत्थर के बने होंगे तो कुछ धातु के। मिट्टी के बने हनुमान और प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां भी आपने देखी होगी लेकिन 300 साल पुरानी यह मूर्ति ऐसी चीज से बनी है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।




उत्तर प्रदेश के निगोहां में 300 वर्ष पुराने एक मंदिर में अंजनी पुत्र हनुमान की ऐसी प्रतिमा है जो गाय के गोबर से निर्मित है। यह मंदिर भक्तों के बीच अस्था का केंद्र है और इसका अपना ही महत्व है।

निगोहा के उतरावां गांव के मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति लगभग 300 वर्ष पुरानी है। यह प्रतिमा गाय के गोबर और मिट्टी से निर्मित है। मान्यता है कि गाय की पूंछ में हनुमान जी का वास होता है और इस मंदिर में स्थापित गाय के गोबर और मिट्टी से निर्मित हनुमान प्रतिमा के दर्शन मात्र से ही लोगों के कष्ट दूर हो जाते हैं।

मंदिर प्रांगण में ही शिवालय भी है जिसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी है। हनुमान जी की मूर्ति और शिवालय की गुंबद व दीवारों की स्थिति को देखकर मंदिर की प्राचीनता का अनुमान हो जाता है। कहते हैं कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भक्तों ने पिछले चार दशकों में मंदिर का जीर्णोद्धार करने का प्रयास किया, लेकिन जीर्णोद्धार करते समय अड़चनें आ जाती हैं और काम बीच में रुक जाता है।

ग्रामीण बताते है कि वर्ष 2012 में मंदिर के जीर्णोंद्धार के लिए जेसीबी मशीन खुदाई हेतु लाई गई, लेकिन जैसे ही जेसीबी मशीन आई और खुदाई शुरू की गई जेसीबी मशीन खराब हो गई। यही सिलसिला दो बार हुआ। नागा समुदाय महात्माओं ने बताया कि मंदिर प्रांगण में ही चार साधुओं की समाधि है यदि समाधि और साधना स्थल अलग-अलग कर निर्माण कराया जाए तो समस्या नहीं होगी।तब श्रद्धालु भक्तों ने रूद्राभिषेक करवाया और गौ माताओं को भोजन आदि करवाकर मंदिर के जीर्णोद्धार में कोई भी रूकावट न आने की प्रार्थना की. इसके बाद कार्य सुचारू रूप से प्रारम्भ हुआ और मंदिर की बाउन्ड्री बनकर तैयार हो गयी. अभी भी धीरे-धीरे मदिर में कार्य समय-समय पर हो रहा है.

नव जीवन इंटर कालेज मोहनलालगंज, लखनऊ के पूर्व प्रवक्ता और कवि राम कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि मंदिर में पहली समाधि बाबा जगन्नाथ दास की है जिन्होंने 1835 में अपना शरीर छोड़ा था।

उतरावां गांव की निवासिनी रामकुमारी सिंह बताती है कि इस मंदिर में भोलेनाथ और बजरंग बली के दर्शन मात्र से ही सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को श्रद्धालुओं द्वारा सुंदरकांड का पाठ किया जाता है और बजरंगबली की मूर्ति का चमेली के तेल और सिंदूर से अभिषेक किया जाता है।

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