Sunday, 22 March 2015

आइये जानें सर्वप्रथम होली किसने और कैसे खेली ? लट्ठ मार होली की परंपरा कैसे शुरू हुई ?

आइये जानें सर्वप्रथम होली किसने और कैसे खेली ? लट्ठ मार होली की परंपरा कैसे शुरू हुई ?


फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा पर आप एक – दूसरे को रंग – गुलाल आदि लगाते हैं। इस अवसर पर रंग या गुलाल का इस्तेमाल कलर थैरेपी का काम करता है, जिससे शरीर की विभिन्न कष्टों से रक्षा होती है। इस दिन लोग धूल-क्रीड़ा करते हैं। शहरों में यह कम, किंतु गांवों में जोर-शोर से होती है। इस समय धूल का यह खेल ऋतु परिवर्तन के कारण होने वाले कष्ट से शरीर की रक्षा के उद्देश्य से खेला जाता है।



जीवन में उमंग, आशा, उत्साह आदि के संचार के लिए और नए मौसम के दुष्प्रभाव से बचाव के लिए इन दिनों लोग पानी, रंग, अच्छे खान-पान, गीत-संगीत आदि का आनंद उठाते हैं। होलिका में स्वांग रचने की परंपरा है। गर्ग संहिता के अनुसार, सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण राधाजी के विशेष आग्रह पर होली खेलने के लिए गए। भगवान को इस समय मजाक करने तथा वातावरण को हास्यप्रद बनाने की सूझी, इसलिए वह स्त्री वेश धारण कर राधाजी से मिलने गए। राधाजी को जब पता चला, तो उन्होंने भगवान को कोड़े लगाए। कहा जाता है कि इसी कारण लट्ठ मार होली की परंपरा शुरू हुई। लट्ठामार होली कान्हा की नगरी ब्रज में होती है। ऐसे में दुनिया भर के होली प्रेमी ब्रज के गांवों का कूच करते हैं। होली का उत्सव क्रमश: बरसाना, मथुरा, वृंदावन, गोकुल और नंदगांव में संमन्न होता है।

No comments:

Post a Comment