Tuesday, 6 January 2015

क्या आप जानते है की दुनिया का पहला ‪#‎हवाई‬ ‪#‎जहाज‬ किसने बनाया

क्या आप जानते है की दुनिया का पहला ‪#‎हवाई‬ ‪#‎जहाज‬ किसने बनाया





अगर आज किसी को पूछा जाये के सबसे पहला हवाई
जाहाज किसने बनाया? तो ले दे के एक नाम लेते है Write Brothers ने बनाया और उनके नाम से दर्ज है यह अविष्कार।
हम बचपन से यह पढ़ते आये है के 17 दिसम्बर सन 1903 को अमेरिका के कैरोलिना के समुद्रतट पर Write Brothers ने पहला हवाई जाहाज बना कर उड़ाया जो 120 फिट उड़ा और गिर
गया| और उसके बाद फिर आगे हवाई जाहाज
की कहानी शुरू होती है|

पर अभी दस्ताबेज मिले है और वो यह बताते है के
1903 से कई साल पहले सन 1895 मे हमारे देश के एक बहुत बड़े विमान वैज्ञानिक ने हवाई जाहाज बनाया और मुंबई के चौपाटी की समुद्रतट पर उड़ाया और
वो 1500 फिट ऊपर उड़ा और उसके बाद निचे गिर गया|
जिस भारतीय वैज्ञानिक ने यह करामात
की उनका नाम था “शिवकर बापूजी तलपडे”
वे मराठी व्यक्ति थे। मुंबई मे एक छोटा सा इलाका है
जिसको चिर बाज़ार कहते है, उहाँ उनका जन्म हुआ और पढाई लिखाई की , एक गुरु के सान्निध्य मे रहके संस्कृत साहित्य का अध्ययन किया| अध्ययन करते समय उनकी विमान शास्त्र मे रूचि पैदा हो गयी|

हमारे देश मे विमान शास्त्र के जो सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते है वो है “महर्षि भरद्वाज” | महर्षि भरद्वाज ने विमान शास्त्र की सबसे पहली पुस्तक लिखी, उस पुस्तक के आधार पर फिर सेकड़ो पुस्तकें
लिखी गयी| भारत मे जो पुस्तक उपलव्ध
है उसमे सबसे पुरानी पुस्तक 1500 साल
पुरानि है और महर्षि भरद्वाज तो उसके
भी बहुत साल पहले हुए|
शिवकर बापूजी तलपडे जी के हाथ मे
महर्षि भारद्वाज के विमान शास्त्र पुस्तक लग
गयी और इस पुस्तक को आद्योपांत उन्होंने पड़ा | इस
पुस्तक के बारे मे तलपडे जी ने कुछ रोचक बातें
कहीं है जैसे –
> “इस पुस्तक के आठ अध्याय मे विमान बनाने
की तकनिकी का हि वर्णन है”
> “आठ अध्याय मे 100 खंड है जिसमे विमान बनाने
की टेक्नोलॉजी का वर्णन है”
> “महर्षि भारद्वाज ने
अपनी पूरी पुस्तक मे विमान बनाने के 500 सिद्धांत लिखे है”
प्रत्येक सिद्धांत से एक अलग प्रकार का विमान बनाया जा सकता है

> “इन 500 सिद्धांतो के 3000 श्लोक है ”
उन्होंने (Technology)
तकनिक को (Process) प्रक्रिया नाम दिया है
महर्षि भारद्वाज ने 32 प्रक्रियाओं का वर्णन किया है|
यानि 32 तरह से 500 किस्म के विमान बनाए जा सकते है
जिसमे 3000 श्लोक है 100 खंड है और 8 अध्याय है| आप सोचिये यह
किनता बड़ा ग्रन्थ है!
इस ग्रन्थ को शिवकर बापूजी तलपडे
जी ने
अपनी विद्यार्थी जीवन
में पढ़ा और पढ़ कर परिक्षण किये, और परिक्षण करते करते 1895 मे वो सफल हो गए और उन्होंने पहला विमान बना लिया और उसको उड़ा कर भी दिखाया| इस परिक्षण को देखने के लिए भारत के बड़े बड़े लोग गए| हमारे देश के उस समय के एक बड़े व्यक्ति हुआ करते थे ‘महादेव गोविन्द रानाडे’
जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था मे जज
की हैसियत से काम किया करते थे मुम्बई हाई कोर्ट
में थेे और बड़ोदरा के एक बड़े रजा हुआ करते थे ‘गायकोवाड’ नाम के तो वो दोनों उसको देखने के लिए| ऐसे बहुत से लोगों के सामने और
हजारो साधारण लोगोंकी उपस्थिति मे शिवकर
बापूजी तलपडे ने अपना विमान उड़ाया| और
हैरानी की बात यह
थी उस विमान को उन्होंने उड़ाया उसमे खुद
नही बैठे, बिना चालक के उड़ा दिया उसको| यानि उस
विमान को उड़ाया पर कण्ट्रोल सिस्टम तलपडे
जी के हाथ मे था और विमान हवा मे उड़ रहा था। उस विमान को उड़ाते उड़ाते वो 1500 फिट तक लेके गए फिर उसके बाद उन्होंने उसको उतारा,
और बहुत सकुशल उतारकर विमान को जमीन पर
खड़ा कर दिया| माने वो विमान टुटा नही, उसमे आग
लगी नही उसके साथ कोई दुर्घटना हुई
नही, वो उड़ा 1500 फिट तक गया फिर निचे
कुशलता से उतरा और सारी भीड़ ने
तलपडे जी को कंधे पर उठा लिया| महाराजा गायकोवाड
जी ने उनके लिए इनाम
की घोषणा की, एक जागीर
उनके लिए घोषणा कर दी और गोविन्द रानाडे
जी जो वहां पर थे उन्होंने इनाम की घोषणा की,

तलपडे जी का यह कहना था की मैं ऐसे
कई विमान बना सकता हूँ, मुझे पैसे की कुछ जरुरत
है, आर्थिक रूप से
मेरी अच्छी स्थिति नही है| तो लोगोने
इतना पैसा इकठ्ठा करने की घोषनाये की के
आगे उनको कोई जरुरत नही थी लेकिन
तभी उनके साथ एक धोका हुआ|
अंग्रेजो की एक
कंपनी थी उसका नाम था ‘Ralli
Brothers’ वो आयी तलपडे जी के पास
और तलपडे जी को कहा यह जो विमान आपने
बनाया है इसका ड्रइंग हमें दे दीजिये| तलपडे
जी ने कहा की उसका कारण बताइए,
तो उन्होंने कहा की हम आपकी मदद
करना चाहते है, आपने यह जो अविष्कार किया है
इसको सारी दुनिया के सामने लाना चाहते है, आपके
पास पैसे की बहुत कमी है,
हमारी कंपनी काफी पैसा इस
काम मे लगा सकती है, लिहाजा हमारे साथ आप
समझोता कर लीजिये, और इस विमान
की डिजाईन दे दीजिये| तलपडे
जी भोले भाले सीधे साधे
आदमी थे तो वो मान गए और कंपनी के
साथ उन्होंने एक समझोता कर लिया| उस समझोते मे Ralli
Brothers जो कंपनी थी उसने विमान
का जो मोडेल था उनसे ले लिया, ड्रइंग ले ली और
डिजाईन ले ली; और उसको ले कर यह
कंपनी लन्दन चली गयी और
लन्दन जाने के बाद उस समझोते को वो कंपनी भूल
गयी| और वोही ड्रइंग और वो डिजाईन
फिर अमेरिका पहुँच गयी | फिर अमेरिका मे Write
Brothers के हाथ मे आ गयी फिर Write
Brothers ने वो विमान वनाकर अपने नाम से
सारी दुनिया मे रजिस्टर करा लिया|

तलपडे जी की गलती क्या थी की उनको चालाकी नही आती थी, ज्ञान तो बहुत था उनके पास।

एक
गाना है ‘सबकुछ सीखा हमने न
सीखी होसियारी’ यह
हम भारतवासीयों पर बिलकुल फिट है,

अंग्रेजो और अमेरिकिओ को कुछ नही आता सिर्फ
चालाकी आती है। उनके पास न ज्ञान
है न उनके पास कोई आधार है उनको एक हि चीज
आती है चालाकी और चालाकी मे वो नंबर 1 है| 
उनकी सोच है की "दुनिया मे कुछ भी नया मिले उसे चालाकी से हासिल कर
लो और अपने नाम से उसको प्रकाशित कर दो|”

शिवकर बापूजी तलपडे जी के द्वारा 1895 मे बनाया हुआ विमान सारी दुनिया के सामने अब यह घोषित करता है के विमान सबसे पहले
अमेरिकी Write Brothers ने बनाया और 1903 मे
17 दिसम्बर को उड़ाया ।

Ralli Brothers कंपनी से धोका खाने के कुछ दिन बाद तलपडे जी की मृत्यु हो गयी और उनकी मृत्यु के बाद सारी कहानी ख़तम हो गयी|
तलपड़े जी की मृत्यु का कारण कभी स्पष्ट ना हो सका ।

आने वाले दिनों में तलपडे जी पर बनाई गई एक फ़िल्म भी आने वाली है

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