Saturday, 13 December 2014

मोदी जी! डॉक्टरों के अच्छे दिन कब आएँगे?

मोदी जी!
डॉक्टरों के अच्छे दिन कब आएँगे?
ज़हरीली दवा से मौत; नतीज़ा- डॉक्टर जेल में!
अस्पताल में परीज़न नाराज़; नतीज़ा - डॉक्टर की पिटाई!
हॉस्पिटल में नई मशीनों पर करोड़ों खर्च: डॉक्टर को सेलरी कितनी? 500० रुपए मासिक .
कुछ समय बाद घटिया मशीन खराब कौन ज़िम्मेदार: डॉक्टर!
अस्पताल की छत का प्लास्टर टूटा हो, औज़ारों में जंग लगा हो, ऑपरेशन थियेटर में मक्खी - मच्छर, कुत्ते - बिल्ली सैर कर रहें हों - कौन ज़िम्मे................र.
मरीज़ के वास्ते रात दिन, जी जान कौन लगाता है? ..........डॉक्टर
मंत्री जी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इत्यादि हस्तियाँ जब अचानक हॉपिटल का निरीक्षण करते है तो उसके बाद किसे दोषी पाते है? (डॉक्टर को)
दवा की कमी, स्टाफ की कमी, डॉक्टर की कमी, बिस्तर, चादर, पानी, सफाई की कमी; कौन ज़िम्मेदार? बेचारा फिर वही..
हरेक निरीक्षण के बाद मीडीया कहता है अब "सुधरेगी अस्पताल की हालत" मंत्री जी ने भरोसा दिलाया.
ऐसी खबरें सुर्ख़ियो में साल में ८-१० बार आती है और एक नई रोशनी मन में जगा जाती है जो कुछ समय बाद फिर किसी "मरीज की मौत के बाद परिजनों की अस्पताल में तोड़फोड़, डॉक्टरो की पिटाई, लापरवाही का आरोप" और आख़िर में "पुलिस द्वारा लापरवाही का मामला दर्ज".
किसके खिलाफ ? वही ... डॉक्टर और कौन. तो वो रोशनी फिर से बुझ जाती है.
और तो और पिटने के बाद, डाक्टरो का हड़ताल करना भी मानवता के खिलाफ और मरीज़ो की अनदेखी माना जाता है.
किसी भी सरकारी अफ़सर को उँची आवाज़ में भी बोल दिया तो "सरकारी कार्य मे बाधा" के इल्ज़ाम मे क्या हो सकता है आप को पता है. लेकिन पिटने के बाद, दुर्व्यवहार के बाद भी डॉक्टर को ऐसी कोई सुरक्षा प्रदान नही है. क्यूँकी उसे सिर्फ़ सेवा करनी है मुह पर पट्टी बाँध कर.
प्राइवेट डॉक्टर की क्लिनिक या प्राइवेट हॉस्पिटल में कोई ऐसी दुर्घटना हो जाए तो और भी बुरा. अस्पताल का लाखों का नुकसान, १०-२० दिन हॉस्पिटल के दरवाजे बंद, पुलिस केस. आदि आदि कई झंझट. कौन भुगतता है? डॉक्टर!
और सभी लोगो के अच्छे दिन आने वाले है ऐसी चर्चा ज़ोरों पर है,
पर डॉक्टरों के अच्छे दिन कब आएँगे??????

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