Sunday, 28 December 2014

।। जॉर्जियन : पुनर्पाठ 2014 ।।

।। जॉर्जियन : पुनर्पाठ 2014 ।।




इक शहर लखनऊ बड़ा पुराना था 
सत्तर-अस्सी का ग़दर ज़माना था 

हम ताल ठोक के करते दंगे थे 
लेकिन हमाम में सारे नंगे थे

जी वैसे अपनी काफ़ी इज़्ज़त थी
किरदार में कोई कुत्ती हरक़त थी

हर सुंदरता से हमें मुहब्बत थी 
जी गंज हमारे बाप की दौलत थी

जी बाप हमारे हम जैसे ही लल्लू 
जैसे अब हैं, तब भी वैसे ही लल्लू 
इन हमशक्लों का श्यापा मत कर लल्लू
आने वाले सब भी वैसे ही लल्लू

था परम्परा से हमको प्यार बहुत 
भाषा पे करते अत्याचार बहुत 
हम महिलाओं को गली दे सकते थे 
था वैसे हममें शिष्टाचार बहुत

हम गब्बर से खूंख्वार जॉर्जियन थे 
हम तलवारों की धार जॉर्जियन थे

बिल्ली भी हमको बहुत डरती थी 
हम लड़ने को तैयार जॉर्जियन थे

हम शेरों जैसी मूंछ जॉर्जियन लल्लू
हम गीदड़ जैसी पूंछ जॉर्जियन लल्लू
हम महाकाल से भी लड़ जाते लल्लू 
हम वी एल के आगे घिघिआते लल्लू

कुछ सूखे-सूखे ठूंठ जॉर्जियन थे
कुछ लम्बे-लम्बे ऊंट जॉर्जियन थे
कुछ मरिअल ख़स्ताहाल जॉर्जियन थे
कुछ मस्त गुरूघण्टाल जॉर्जियन थे

कुछ बीटल कट के बाल जॉर्जियन लल्लू
कुछ मरी-मरी सी चाल जॉर्जियन लल्लू 
कुछ जादूगर कुछ सैयाँ जैसे लल्लू
कुछ छोड़ो मोरी बैंयां जैसे लल्लू

कुछ गुमसुम पैसीमिस्ट जॉर्जियन थे
कुछ लस्सू से आर्टिस्ट जॉर्जियन थे

कुछ काम्पोज़ के बिना नहीं जी सकते 
कुछ होलसेल कैमिस्ट जॉर्जियन थे

कुछ मामू और दीवान जॉर्जियन लल्लू 
कुछ सचमुच बड़े महान जॉर्जियन लल्लू
जब भी देखो तब वहीँ खड़े रहते थे 
कुछ वी एल के दरबान जॉर्जियन लल्लू

कुछ रौशन और नौशाद जॉर्जियन थे
कुछ तबले के उस्ताद जॉर्जियन थे
कुछ आज तलक मधुबाला के दीवाने 
जी ऐसे भी बरबाद जॉर्जियन थे

कुछ फूल और कुछ घास जॉर्जियन लल्लू
कुछ एल एल बी तक पास जॉर्जियन लल्लू
कुछ पच्छिम वाले बोस जोर्जियन लल्लू
कुछ पूरब वाले बास जार्जियन लल्लू

कुछ ऋषियों की सन्तान जॉर्जियन थे
कुछ सट्टे के सुल्तान जॉर्जियन थे
कुछ गांजा, बीड़ीबिच्छू, चिलमचमेली 
कुछ ज़हरीले इन्सान जॉर्जियन थे

कुछ ऋद्धि-सिद्धि के औघड़ स्वामी थे 
कुछ लुच्चे, नीच, अधम, खल, कामी थे
कुछ शिरोमणी-हर्राफ़, झण्ड-भण्डारी 
कुछ महा-लफंटर, महा-हरामी थे

किस नामुराद ने लखनऊ आन बसाया 
किस नामुराद ने के. जी. को बनवाया 
जो किया, ना किया ये तो अल्ला जाने 
उसके निज़ाम में लक्कड़ ख़ूब फंसाया

वो शिव जी की बारात देखिए मामू 
फिर टी जी के हालात देखिए मामू
जो यहां-वहां उंगल करता फिरता है 
इस लोंडे की औक़ात देखिए मामू ।।

By Dr Sanjay Chaturvedi 

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