Saturday, 22 November 2014

Hindi Hasya Poem......हुई जबसे शादी, जीरो वाट के बल्ब की तरह जलता हूँ, .... by पी.सी.गोदियाल "परचेत"






जोरू-दासत्व 


हुई जबसे शादी, जीरो वाट के बल्ब की तरह जलता हूँ,   
यूं पैरों पे तो अपने ही खड़ा हूँ मगर रिमोट से चलता हूँ।

माँ-बाप तो पच्चीस साल तक भी नाकाम रहे ढालने में,
अब मोम की तरह बीवी के बनाये, हर साँचे में ढलता हूँ।  

न ही काला हूँ, कलूटा हूँ,  न ही गंजा हूँ और न लंगड़ा हूँ ,
फिर भी उससे दहशतज़दा हूँ, उसकी नजरों में खलता हूँ।
    
डोर से बँधी इक पतंग सी बन कर  रह गई है जिंदगी , 
सब ठीक हो जाएगा यही समझाकर दिल को छलता हूँ।  

हकीकत तो ये है कि खुद कमाकर पकाता हूँ अपनी रोटी,
किंतु एहसास ये मिलता है,किसी के टुकड़ों पर पलता हूँ।   

जोड़ी थी जिसने जन्मपत्री, बेड़ा-गरक हो उस पंडत का,   
उजला भी काला दिखे अब तो 'परचेत',  आँखें मलता हूँ।    





2 comments:

  1. Thanx Puneet ji.कार्टून उम्दा जोड़े है आपने :-)

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