Friday, 28 November 2014

बुद्ध को एक सभा में भाषण करना था. by Osho

ओशो शरनम् गच्छामि"

बुद्ध को एक सभा में भाषण
करना था । जब समय
हो गया तो बुद्ध आए और बिना कुछ
बोले ही वहाँ से चल गए । तकरीबन एक
सौ पचास के करीब श्रोता थे । दूसरे
दिन तकरीबन सौ लोग थे पर फिर उन्होंने
ऐसा ही किया बिना बोले
चले गए ।इस बार पचास कम हो गए ।
तीसरा दिन हुआ साठ के करीब लोग
थे महात्मा बुद्ध आए, इधर – उधर
देखा और बिना कुछ कहे वापिस चले
गए । चौथा दिन हुआ तो कुछ लोग और कम हो गए
तब
भी नहीं बोले । जब
पांचवां दिन हुआ तो देखा सिर्फ़
चौदह लोग थे । महात्मा बुद्ध उस दिन
बोले और चौदोहों लोग उनके साथ
हो गए ।
किसी ने महात्मा बुद्ध को पूछा आपने चार
दिन कुछ
नहीं बोला । इसका क्या कारण
था । तब बुद्ध ने कहा मुझे भीड़
नहीं काम करने वाले चाहिए थे ।
यहाँ वो ही टिक सकेगा जिसमें धैर्य
हो । जिसमें धैर्य था वो रह गए। केवल भीड़
ज्यादा होने से कोई
धम्म
नहीं फैलता है । समझने वाले चाहिए,
तमाशा देखने वाले रोज इधर – उधर
ताक-झाक करते है । समझने
वाला धीरज रखता है । कई
लोगों को दुनिया का तमाशा अच्छा लगता है
। समझने
वाला शायद एक
हजार में एक
ही हो ऐसा ही देखा जाता है ।
osho 

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