Saturday, 8 November 2014

जानिये मोदी के गाँव जयापुरा को ..... मोदी के गांव जयापुरा ने किया था ऎसा कारनामा, आज भी होते हैं चर्चे

जानिये मोदी के गाँव जयापुरा को 




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जिस गांव को सांसद आर्दश ग्राम के तहत गोद लेने वाले हैं, उस गांव ने 450 साल पहले एक ऎतिहासिक कारनामा किया था।

जयापुरा गांव ने 450 साल पहले मुगलकाल में अपने पराक्रम का लोहा औरंगजेब को भी मानने पर विवश कर दिया था, जिसका जिक्र आज भी इतिहास के पन्नों में मौजूद है। उसके बाद से एक बार फिर यह गांव देश के अखबारों की सुर्खियां बन रहा है।

बीएचयू में राजनीति विभाग के प्रमुख प्रोफेसर के के मिश्रा का कहना है कि 17वीं सदी में जब औरंगजेब ने मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था तब उसके सैनिकों की नजर इस गांव के हनुमान मंदिर पर पड़ी थी। उस मंदिर की खासियत यह थी कि वहां के हनुमान की मूर्ति काले रंग की थी। इस कारण से उस मंदिर को "काले हनुमान का मंदिर" कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि तब गांव के लोगों ने अपनी बहादुरी से उन सैनिकों को वहां से खदेड़ दिया था।

उस घटना के बाद एक बार फिर यह गांव सुर्खियों में आया जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए गांव के सपूत अजय कुमार सिंह शहीद हो गए, वे सेना में थे।

राजनीतिक महत्व भी है इस गांव का

ऎतिहासिक महत्व के साथ साथ 3500 आबादी वाले इस गांव का राजनीतिक महत्व भी है। शिवपुरी ब्लॉक में आने वाले इस गांव में पटेल जाति के लोग काफी संख्या में हैं, इस क्षेत्र में "अपना दल" के स्वर्गीय नेता सोनेलाल पटेल का प्रभाव था। लोकसभा चुनाव से ही अपना दल ने भाजपा का दामन थाम लिया है।

इस गांव में गन्ने की पैदावार काफी होती है। गांव के लोग अपना गन्ना वाराणसी के अलावा पूर्वी बिहार के जिलों में जूस बिके्रताओं को बेचते हैं।

पीएम मोदी इस गांव को गोद लेकर इसे एक आदर्श गांव के तौर पर विकसित करेंगे। 

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