Wednesday, 22 October 2014

Narkachaturdashi, also known as Choti Diwali



 Today is Narkachaturdashi, a day before Diwali.Also called as Kali Chaudas, it is the day allotted to the worship of Mahakali or Shakti and is believed that on this day Kali killed the most wicked Narakasura. Some believe that Shri Krishna killed Narkasura on this day. Naraka-Chaturdashi or Kali Chaudas is day to abolish laziness and evil which create hell in our life and shine light on life.

On this day people get up earlier than usual. The men will rub their bodies in perfumed oils before bathing (Abhyanga Snan). A large breakfast is enjoyed with relatives and friends. In the evening, a mix of bright and loud fireworks are set off in an atmosphere of joyful fun and noise. Special sweet dishes are served as part of the midday meal. House are lit with oil lamps during the evening.

In Goa,on this day, paper-made effigies of Narakasura, filled with grass and firecrackers symbolising evil, are made.These effigies are burnt at around four o'clock in the morning the following day/ Firecrackers are burst, and people return home to take a scented oil bath. Lamps are lit in a line.The women of the house perform aarti of the men, gifts are exchanged, a bitter berry called kareet is crushed under the feet in token of killing Narkasur, symbolising evil and removal of ignorance. Different varieties of Poha and sweets are made and eaten with family and friends.

Narak Chaturdashi day is also known as Choti Diwali, Roop Chaturdashi and Roop Chaudas.
In Tamil Nadu, Diwali is traditionally celebrated on Naraka Chaturdasi day. While the rest of India celebrates it on the new moon night, in Tamil Nadu, Diwali is celebrated Chaturdasi tithi. People get up earlier than usual and celebrate with oil baths, pooja, and festivals. Firecrackers are usually lit on Diwali. Some Tamil homes observe "nombu" and do Lakshmi Pooja on this day

1 comment:

  1. दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा. इस पर्व का जो महत्व और महात्मय है उस दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण पर्व व हिन्दुओं का त्यहार है. यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा. दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली (Narak Chaturdahi or Choti Deepawali) फिर दीपावली और गोधन पूजा (Godhan Pooja), भाईदूज (Bhai Dooj).

    छोटी दीपावली यम दीया (Choti Deepawali Yam Diya)

    नरक चतुर्दशी की जिसे छोटी दीपावली भी कहते हैं. इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के अंधाकर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात. इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं हैं. इस रात घर के बाहर दीप जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु का भय टलता है. कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी के दिन इसी मान्यता के अनुसार घर के बाहर या आंगन में यमराज को ध्यान कर दीप भेंट करना चाहिए.

    एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दु्र्दान्त असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक स कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था. इस उपलक्ष में दीयों की बारत सजायी जाती है.

    छोटी दीपावली कथा (Choti Deepawali Katha)

    इस दिन के व्रत और पूजा के संदर्भ में कथा यह है कि रन्ति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे. उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समझ यमदूत आ खड़े हुए. यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा. आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है. पुण्यात्मा राज की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लट गया यह उसी पापकर्म का फल है.

    दूतों की इस प्रकार कहने पर राजा ने यमदूतों से कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे वर्ष का और समय दे दे. यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी. राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचा और उन्हें सब वृतान्त कहकर उनसे पूछा कि कृपया इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय है. ऋषि बोले हे राजन् आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे अनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें.

    राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया. इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ. उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है. इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करने का बड़ा महात्मय है. स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायक कहा गया है. इससे पाप कटता है और रूप सन्दर्य की प्राप्ति होती है.

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