Thursday, 16 October 2014

Jokes...............एक शख्स ने ज़िन्दगी से तंग आकर.. मुहब्बत कर ली

ज़ज: ना जाने क्यों मुझे
तुम्हारी शक्ल
जानी पहचानी सी लग
रही है?
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मुजरिम: हुज़ूर, मैं मुन्नी बाई के
कोठे पर तबला बजाता हूँ।
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Classical insult
एक लड़का परफ्यूम लगा कर बस मेँ चढ़ा ,
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एक लड़की ने कमेँट पास किया :- आजकल
फिनायल का यूज ज्यादा होता है ,
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लड़का :- फिर
भी मक्खियाँ पीछा नहीँ छोड़तीँ
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एक बुढिया का दामाद बहुत काला था,
वो पहली बार ससुराल गया !
बुढिया :-- दामाद जी, कम से कम एक महिना तुम यहाँ रुको, दूध, दही खाओ मौज करो...
इसी बहाने हमें भी दूध, दही मिल जायेगा !
दामाद :-- क्या बात है सासु माँ, आज बहुत प्यार जता रही हो मुझ पर ?
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बुढिया :-- ऐसी कोई बात नहीं है, दरअसल कल हमारी भैस का बच्चा मर गया तुम्हे देखकर भैस कम से कम दूध तो दे देगी
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एक बार एक चीनी , 
एक पाकिस्तानी और
एक भारतीय अरब देश में शराब पीते हुए पकड़े गए ,
इसके लिए वहां की सरकार ने उन्हें 20-20 कोड़े मारने की सजा सुनाई ,
सजा से पहले जेलर ने कहा
की " आज मेरी बेगम की सालगिरह है 
और वो चाहती है की अपनी सजा से पहले 
तुम लोग एक एक मन्नत मांग लो ".......
चीनी ने कहा की मेरी पीठ पर एक तकिया बाँध दिया जाये......
लेकिन तकिया ज्यादा देर तक नही टिका 
5 कोड़ो में फट गया 
और उसे 15 कोड़े अपनी पीठ पर ही खाने ...पड़े....
पाकिस्तानी ये देखकर डर गया और बोला की मेरी पीठ पर 2 तकिये बाँधे जाएँ......
लेकिन वो भी ज्यादा देर नही चले और उसे 10 कोड़े अपनी पीठ पर खाने पड़े .......
जब भारतीय की बारी आई तो जेलर ने कहा की 
तुम दुनिया के बेहद खूबसूरत देश से आये हो जो अपनी वीरता के लिए जाना जाता है ,
तुम एक नही दो मन्नत मांग सकते हो......
भारतीय ने सर उठाकर बहुत नरमी से कहा
में आपका एहतराम करता हूँ और इस नवाजिश के बदले 20 नही , 100 कोड़ों की मांग करता हूँ.......
जेलर ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा की तुम्हारी दूसरी ख्वाहिश क्या है ?
भारतीय ने फिर से सर उठाकर मुस्कराते हुए कहा ......
मेरी दूसरी ख्वाहिश ये है की ...........
मेरी पीठ पर पाकिस्तानी को बाँध
दिया जाये!!!!!!
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मैखाने मे आऊंगा मगर...
पिऊंगा नही साकी...
ये शराब मेरा गम मिटाने की औकात
नही रखती......

"खामोश बैठें तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं, ज़रा सा हँस लें तो मुस्कुराने की वजह पूछ लेते हैं" !!

हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली।
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली।
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ।
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली।।....

तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी;
एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे!

हजार जवाबों से अच्छी है खामोशी,
ना जाने कितने सवालों की आबरू रखती है !

"सूरज ढला तो
कद से ऊँचे हो गए साये, 
कभी पैरों से रौंदी थी,
यहीं परछाइयां हमने..

काग़ज़ की कश्ती थी 
पानी का किनारा था।
खेलने की मस्ती थी 
ये दिल अवारा था।
कहाँ आ गए 
इस समझदारी के दलदल में।
वो नादान बचपन भी
कितना प्यारा था ...!

जमीन छुपाने के लिए गगन होता है...
दिल छुपाने के लिए बदन होता है....
शायद मरने के बाद भी छुपाये जाते है ग़म....इस लिए हर लाश पे कफ़न होता है

मेरे लफ़्ज़ों से न कर
मेरे क़िरदार का फ़ैसला ll
तेरा वज़ूद मिट जायेगा 
मेरी हकीक़त ढूंढ़ते ढूंढ़ते l

कब्र की मिट्टी हाथ में लिए सोच रहा हूं,
लोग मरते हैं तो गु़रूर कहाँ जाता है.

किनारे पर तैरने वाली
लाश को देखकर
ये समझ आया… 
बोझ शरीर का नही साँसों का था..!!

यह जो मेरी क़ब्र पर रोते हैं,
अभी ऊठ जाऊँ,
तो ये जीने न दे..!! 

मेरे पीठ पर जो जख्म़ है,
वो अपनों की निशानी हैं,
वरना सीना तो आज
भी दुश्मनो के इंतजार मे बैठा है.. 

जरुरत तोड देती है
इन्सान के घमंड को.. 
न होती मजबूरी तो
हर बंदा खुदा होता.!!!

जिसको गलत तस्वीर दिखाई,
उसको ही बस खुश रख पाया.
जिसके सामने आईना रक्खा,
हर शख्स वो मुझसे रूठ गया..!! 

इस जमाने मे वफा की तलाश ना कर गाफि़ल
वो वक्त और था..
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे होते थे..!!! 
📈📉
आज अजीब किस्सा देखा हमने खुदकुशी का,
एक शख्स ने ज़िन्दगी से तंग आकर..
मुहब्बत कर ली
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समंदर के किनारे दो प्रेमी बैठे हुए थे।
लड़की ने लड़के का हाथ पकड़कर कहा,"तुम कुछ बोलते क्यों नहीं?"
लड़के ने मुस्कुरा कर रेत पर लिखा;
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"मेरे मुंह में गुटखा है।"
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पार्क के किनारे एक युवती को अकेला पाकर
पोंचूजी हाथ में फूल लिए उसका पीछा कर रहे थे।
युवती- तुम्हे पता है! पीछे मेरी मां आ रही हैं?
पोंचूजी- अरे, हम तो खानदानी आशिक है।
तुम्हारी मां के पीछे मेरे पिताश्री आ रहे है।

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