Tuesday, 14 October 2014

सास बहू दामाद चुटकुले

सास बहू दामाद चुटकुले 





एक मूर्ख से लड़के की शादी हो गयी। शादी के बाद ससुराल वालों को पता चला कि लड़का बेवकूफ है। लेकिन न इसकी पुष्टि हो पायी न खंडन। लिहाजा वे चुप रहे। शादी के कुछ दिन बाद गौने के लिये अपनी दुलहन को लेने के लिये लड़का ससुराल जाने लागा तो उसकी समझदार मां ने समझाया-बेटा ससुराल में सब बडों को प्रणाम करना ,आदर केसाथ बोलना
तथा छोटों से प्यार से बोलना।
लड़के ने कहा -अच्छा अम्मा। अउर कुछ?
मां बोली-हां बेटा । एक बात और करना कि वहां जो बोलना शुद्ध-शुद्ध बोलना ।
लड़का बोला-शुद्ध-शुद्ध बोलना ! यहिका का मतलब है?
मतलब यह कि बेटा वहां जब कोई पूछे खाना कइस बना है ? तो यह न कहना कि खाना नीक (अच्छा)बना है। कहना-भोजन बड़ा स्वादिष्ट है। और हां,पानी को पानी न कहना जल कहना ताकि लोग समझें कि दामाद पढ़ा-लिखा विद्वान है।
लड़के ने बात गांठ बांध ली तथा ससुराल के चल पड़ा।
ससुराल में उसके सभ्य व्यवहार से सब लोग चकित रह गये। वे समझे कि किसी ने उनको भड़काने के लिये दूल्हे के बारे में अफवाह उड़ा दी है कि वह पागल है। ऐसा विनयी,मितभाषी दामाद उन लोगों ने आसपास कहीं नहीं देखा था।
फिर भी गांव की महिलाओं में उत्सुकता थी सो वे खाना खिलाने के समय किसी न किसी बहाने आंगन में जमा थीं।
खाने के दौरान सास ने पूछा-बेटा ,खाना कइस बना है?
दामाद जी विनम्रता से बोले-माताजी ,भोजन तो बड़ा स्वादिष्ट बना है।
इस पर सास से अपनी प्रसन्नता छिपाये नहीं छिपी- वह आसपास की महिलाओं से उलाहने के स्वर में बोली- देखा,झुट्ठै सब लोग कहत रहलीं कि हमार दमाद पागल है,हमार दमाद पागल है। सबके दमाद तो कइसी अइली-गइली बतियात हैं। हमार दमाद तो देखा केतना बड़ा ज्ञानी है कहत है -'भोजन बड़ा स्वादिष्ट है।'
लड़के ने भी इस कनफुस-वार्ता को सुन लिया। उससे भी रहा न गया। वह बोला-तू त इतनैं मा छिटकै लगलू। अगर हम जो कहूँ पानी का जल कहि देब तौ तो तुम्हार छतियै फाटि जाई।
(तुम तो इतने में ही उछलने लगी। अगर मैं पानी को जल कह दूंगा तो तो तुम्हारी जान ही निकल जायेगी।)..
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सास ( दामाद से ) " बेटा तुम हर साल मेरी बेटी को एक बच्चे की मां बना देतो हो, ये कोई ठीक बात नहीं है "

दामाद (सास से ) " मम्मी जी मैंने जो आपसे प्रोमिस किया था उसी को निभा रहा हूँ "

सास " कैसा प्रोमिस ?"

दामाद " यही कि आपकी बेटी को कभी भी खाली पेट नहीं रखूंगा "
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सास के प्रति प्यार

संता बंता को कहानी सुना रहा था.

संता: एक सास अपने तीन दामादों का प्यार देखने के लिए दरिया में कूद गई. पहले दामाद ने उसे बचा लिया तो सास ने उसे गिफ्ट में मारुती दे दी, दूसरे दिन वह फिर कूद गई और दूसरे दमाद ने उसे बचा लिया, इस बार फिर खुश होकर सास ने उसे बाइक दे दी.

तीसरे दिन वह फिर कूदी लेकिन तीसरे दामाद ने सोचा कि अव सिर्फ साइकिल बची है, और साइकिल के लिए दरिया में कूदना बेवकूफी है, सास डूब गई. अगले दिन उस दामाद को मर्सडीज कार गिफ्ट मिली.

बंता: वो कैसे ?

संता: उसके ससुर ने दी.
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वैसे तो एक शरीफ इंसान हूँ
आप ही की तरह श्रीमान हूँ
मगर अपनी आंख से
बहुत परेशान हूँ
अपने आप चलती है
लोग समझते हैं -- चलाई गई है
जान-बूझ कर मिलाई गई है।


एक बार बचपन में
शायद सन पचपन में
क्लास में
एक लड़की बैठी थी पास में
नाम था सुरेखा
उसने हमें देखा
और बांई चल गई
लड़की हाय-हाय
क्लास छोड़ बाहर निकल गई।


थोड़ी देर बाद
हमें है याद
प्रिंसिपल ने बुलाया
लंबा-चौड़ा लेक्चर पिलाया
हमने कहा कि जी भूल हो गई
वो बोल - ऐसा भी होता है भूल में
शर्म नहीं आती
ऐसी गंदी हरकतें करते हो,
स्कूल में?
और इससे पहले कि
हकीकत बयान करते
कि फिर चल गई
प्रिंसिपल को खल गई।
हुआ यह परिणाम
कट गया नाम
बमुश्किल तमाम
मिला एक काम।


इंटरव्यूह में, खड़े थे क्यू में
एक लड़की थी सामने अड़ी
अचानक मुड़ी
नजर उसकी हम पर पड़ी
और आंख चल गई
लड़की उछल गई
दूसरे उम्मीदवार चौंके
उस लडकी की साईड लेकर
हम पर भौंके
फिर क्या था
मार-मार जूते-चप्पल
फोड़ दिया बक्कल
सिर पर पांव रखकर भागे
लोग-बाग पीछे, हम आगे
घबराहट में घुस गये एक घर में
भयंकर पीड़ा थी सिर में
बुरी तरह हांफ रहे थे
मारे डर के कांप रहे थे
तभी पूछा उस गृहणी ने --
कौन ?
हम खड़े रहे मौन
वो बोली
बताते हो या किसी को बुलाऊँ ?
और उससे पहले
कि जबान हिलाऊँ
चल गई
वह मारे गुस्से के
जल गई
साक्षात दुर्गा-सी दीखी
बुरी तरह चीखी
बात की बात में जुड़ गये अड़ोसी-पड़ोसी
मौसा-मौसी
भतीजे-मामा
मच गया हंगामा
चड्डी बना दिया हमारा पजामा
बनियान बन गया कुर्ता
मार-मार बना दिया भुरता
हम चीखते रहे
और पीटने वाले
हमें पीटते रहे
भगवान जाने कब तक
निकालते रहे रोष
और जब हमें आया होश
तो देखा अस्पताल में पड़े थे
डाक्टर और नर्स घेरे खड़े थे
हमने अपनी एक आंख खोली
तो एक नर्स बोली
दर्द कहां है?
हम कहां कहां बताते
और इससे पहले कि कुछ कह पाते
चल गई
नर्स कुछ नहीं बोली
बाइ गॉड ! (चल गई)
मगर डाक्टर को खल गई
बोला --
इतने सीरियस हो
फिर भी ऐसी हरकत कर लेते हो
इस हाल में शर्म नहीं आती
मोहब्बत करते हुए
अस्पताल में?
उन सबके जाते ही आया वार्ड-बॉय
देने लगा अपनी राय
भाग जाएं चुपचाप
नहीं जानते आप
बढ़ गई है बात
डाक्टर को गड़ गई है
केस आपका बिगड़वा देगा
न हुआ तो मरा बताकर
जिंदा ही गड़वा देगा।
तब अंधेरे में आंखें मूंदकर
खिड़की के कूदकर भाग आए
जान बची तो लाखों पाये।


एक दिन सकारे
बाप जी हमारे
बोले हमसे --
अब क्या कहें तुमसे ?
कुछ नहीं कर सकते
तो शादी कर लो
लड़की देख लो।
मैंने देख ली है
जरा हैल्थ की कच्ची है
बच्ची है, फिर भी अच्छी है
जैसी भी, आखिर लड़की है
बड़े घर की है, फिर बेटा
यहां भी तो कड़की है।
हमने कहा --
जी अभी क्या जल्दी है?
वे बोले --
गधे हो
ढाई मन के हो गये
मगर बाप के सीने पर लदे हो
वह घर फंस गया तो संभल जाओगे।


तब एक दिन भगवान से मिल के
धड़कता दिल ले
पहुंच गए रुड़की, देखने लड़की
शायद हमारी होने वाली सास
बैठी थी हमारे पास
बोली --
यात्रा में तकलीफ तो नहीं हुई
और आंख मुई चल गई
वे समझी कि मचल गई
बोली --
लड़की तो अंदर है
मैं लड़की की मां हूँ
लड़की को बुलाऊँ
और इससे पहले कि मैं जुबान हिलाऊँ
आंख चल गई दुबारा
उन्होंने किसी का नाम ले पुकारा
झटके से खड़ी हो गईं
हम जैसे गए थे लौट आए
घर पहुंचे मुंह लटकाए
पिता जी बोले --
अब क्या फायदा
मुंह लटकाने से
आग लगे ऐसी जवानी में
डूब मरो चुल्लू भर पानी में
नहीं डूब सकते तो आंखें फोड़ लो
नहीं फोड़ सकते हमसे नाता ही तोड़ लो
जब भी कहीं जाते हो
पिटकर ही आते हो
भगवान जाने कैसे चलाते हो?


अब आप ही बताइये
क्या करूं?
कहां जाऊं?
कहां तक गुन गांऊं अपनी इस आंख के
कमबख्त जूते खिलवाएगी
लाख-दो-लाख के।
अब आप ही संभालिये
मेरा मतलब है कि कोई रास्ता निकालिये
जवान हो या वृद्धा पूरी हो या अद्धा
केवल एक लड़की
जिसकी एक आंख चलती हो
पता लगाइये
और मिल जाये तो
हमारे आदरणीय 'काका' जी को बताइये!!!
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बहू- मां जी, ये अभी तक नहीं आए, 
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कहीं कोई लड़की का चक्कर तो नहीं है उनके? 
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मां जी- अरे कम्बख्त..! तू तो हमेशा गलत ही सोचती है... 
......
.........
हो सकता है कि किसी ट्रक के नीचे आ गया हो...!!
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बहू रोए जा रही थी। 
सास ने पुचकारते हुए पूछा....- क्यों बेटी..., रो क्यों रही है?
बहू- क्या मैं चुड़ैल जैसी दिखती हूं?
सास- नहीं, बिल्कुल नहीं।
बहू- क्या मेरी आंखें मेंढ़की की तरह हैं?
सास- नहीं तो।
बहू- क्या मेरी नाक नेपालियों की तरह है?
सास- नहीं...! 
बहू- क्या मैं भैंस जैसी मोटी और काली हूं?
सास- नहीं बेटी, यह सब किसने कहा तुमसे?
बहू- फिर सारे मोहल्ले के लोग क्यों कहते फिरते हैं कि तू तो अपनी सास जैसी दिखती है?
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नौकरानी, भागती-भागती आयी और बोली,

"मालकिन! आपकी सास को बाहर तीन औरतें पीट रही हैं।"

मालकिन अपनी नौकरानी के साथ भाग कर बाहर आयी और चुप-चाप खड़ी होकर तमाशा देखने लगी।

नौकरानी: मालकिन! आप मदद के लिए नहीं जाएँगी?

मालकिन: नहीं, उसके लिए तीन ही काफी हैं।
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बंटू की अपनी सास से जरा भी नहीं बनती थी।
एक दिन उसकी सास ने उसे ससुराल बुलाया और केसर, बादाम व मेवे का दूध से भरा गिलास पीने को दिया।
यह देख बंटू दंग रह गया। उसने सासू मां से पूछा कि आज इतना लाड़ जताने की क्‍या वजह है?
सास ने कहा, 'कोई खास वजह नहीं है बस आज नागपंचमी है।
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चिंटू:   क्या आप वृद्दाश्रम के लिये कुछ देना पसंद करेंगे?
मिंटू:  हाँ, अपनी सास!
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मुकेश ने अपनी सास के बिस्तर पर एक सांप देखा.
मुकेश ( सांप से ): मेरी सास को डस ले.
सांप : इसे क्या डसूं, इसी से तो अपना जहर रिचार्ज करवाता हूं.
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पत्नी: मैंने अक्सर देखा है कि आप मेरे रिश्तेदारों का बिल्कुल भी आदर नहीं करते!
पति: तुम्हें यह गलतफ़हमी है! तुम जानती हो मैं तुम्हारे सास ससुर का कितना आदर करता हूँ?
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 एक दिन चित्रगुप्त ब्रम्हाजी के पास एक रिक्वेस्ट ले कर आए कि प्रभु जी ये करवाचौथ के सातों जन्म वही पति स्कीम बंद करदी जाए...ब्रम्हाजी ने पुछा - क्यों क्या हुआ ???..चित्रगुप्त - प्रभु जी ट्रेक रखना कठिन होता है |औरत वही पति बार बार माँगती है औरआदमी हमेशा दुसरे जोड़ीदार की डिमांड करता रहता है.मैनेज करना कठिन होता जा रहा है !ब्रम्हाजी : परंतु यह स्कीम बंद नहीं की जा सकती...तब महामुनि नारदजी ने उपाय दिया कि मृत्यु लोक में संता नाम के एक बुद्धिमान विचारक रहते हैं उनसे सलाह ली जाए..संता को समस्या बताई गई और जो समाधान संता जी ने बताया उसने चमत्कारी रूप से महिलाओं की डिमांड एकदम समाप्त कर दी...संता जी ने सुझाया :जो भी पत्नी सातों जनम वही पति डिमांड करे उसे दे दो..........पर शर्त ये रहेगी कि अगर पति वही चाहिए,तो सास भी वही मिलेगी.
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एक महिला दूसरी महिला से - क्या तुम्हारी सास बीमार थी कैसे मर गई ?
दूसरी महिला पहली महिला से - दरअसल अतिम संस्कार के समानो मे पचास परसेंट की छूट चल रही थी सो मेरी सास ने उसी का फायदा उठाया और मर गई


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