Wednesday, 10 September 2014

Some facts perhaps you are not knowing ..........."सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा"

"सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा" अल्लमा मुहम्मद इकबाल ने लिखा था । 

लोग इसे हिन्दु मुस्लिम एकता का प्रतिक मानते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि जिस इकबाल ने "सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान" लिखा था, उसी ने 1947 बटवारे के बाद   पाकिस्तान के पक्ष मे एक गीत लिखा -


खंजर हीलाल का है कोमी निशां हमारा,

मुस्लिम हैं हम वतन है सारा जहां हमारा ।

तौहीद की अमानत सीनों में है हमारा

आसां नहीं मिटाना, नाम-ओ-निशां हमारा ।।


उसी वक्त बनारस के कवि नजीर बदायुनी ने इकबाल को पाकिस्तान की सरपरस्ती करने पर ललकारते हुए लाल किले से कहा-

इकबाल ने छोड़ी राहे वतन परस्ती, 

गाकर नया तराना सारा जहा हमारा,

हमने भी एक मिस्रे मे बात खत्म कर दी,

सारा जहा तुम्हारा हिन्दुस्तान हमारा ।


हम यह पोस्ट हर भारतीय को सच्चाई जानने के लिए पोस्ट कर रहे हैं, लेकिन ये गीत अपना है, इससे विद्वेष न करें । वंदे मातरम ।।
source of the post

No comments:

Post a Comment