Wednesday, 10 September 2014

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ ......... Hindi Day Shayri........ Hindi Poems ........

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ 

1.
हिन्दी मेरा इमान है
हिन्दी मेरी पहचान है
हिन्दी हूँ मैं वतन भी मेरा
प्यारा हिन्दुस्तान है

2.
हिन्दी की बिन्दी को
मस्तक पे सजा के रखना है
सर आँखो पे बिठाएँगे
यह भारत माँ का गहना है

3.
बढ़े चलो हिन्दी की डगर
हो अकेले फिर भी मगर
मार्ग की काँटे भी देखना
फूल बन जाएँगे पथ पर

4.
हिन्दी को आगे बढ़ाना है
उन्नति की राह ले जाना है
केवल इक दिन ही नहीं हमने
नित हिन्दी दिवस मनाना है

5.
हिन्दी से हिन्दुस्तान है
तभी तो यह देश महान है
निज भाषा की उन्नति के लिए
अपना सब कुछ कुर्बान है

6.
निज भाषा का नहीं गर्व जिसे
क्या प्रेम देश से होगा उसे
वही वीर देश का प्यारा है
हिन्दी ही जिसका नारा है

7.
राष्ट्र की पहचान है जो
भाषाओं में महान है जो
जो सरल सहज समझी जाए
उस हिन्दी को सम्मान दो

8.
अग्रेजी का प्रसार भले
हम अपनी भाषा भूल चले
तिरस्कार माँ भाषा का
जिसकी ही गोदि में हैं पले

9.
भाषा नहीं होती बुरी कोई
क्यों हमने मर्यादा खोई
क्यों जागृति के नाम पर
हमने स्व-भाषा ही डुबोई

10.
अच्छा बहु भाषा का ज्ञान
इससे ही बनते है महान
सीखो जी भर भाषा अनेक
पर राष्ट्र भाषा न भूलो एक

11.
इक दिन ऐसा भी आएगा
हिन्दी परचम लहराएगा
इस राष्ट्र भाषा का हर ज्ञाता
भारतवासी कहलाएगा

12.
निज भाषा का ज्ञान ही
उन्नति का आधार है
बिन निज भाषा ज्ञान के
नहीं होता सद-व्यवहार है

13.
आओ हम हिन्दी अपनाएँ
गैरों को परिचय करवाएँ
हिन्दी वैज्ञानिक भाषा है
यह बात सभी को समझाएँ

14.
नहीं छोड़ो अपना मूल कभी
होगी अपनी भी उन्नति तभी
सच्च में ज्ञानी कहलाओगे
अपनाओगे निज भाषा जभी

15.
हिन्दी ही हिन्द का नारा है
प्रवाहित हिन्दी धारा है
लाखों बाधाएँ हो फिर भी
नहीं रुकना काम हमारा है

16.
हम हिन्दी ही अपनाएँगे
इसको ऊँचा ले जाएँगे
हिन्दी भारत की भाषा है
हम दुनिया को दिखाएँगे

--सीमा सचदेव
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मैं युग्म, तुम्हारी भाषा का,
हिन्दी की धूमिल आशा का ;
मैं युग्म , एकता की संभव
हर ताकत की परिभाषा का

मैं आज फ़लक पर बिछी हुई
काई पिघलाने आया हूँ
भारत की बरसों से सोई
आवाज़ जगाने आया हूँ

तुम देख तिमिर मत घबराओ
हम दीप जलाने वाले हैं
बस साथ हमारे हो लो, हम
सूरज पिघलाने वाले हैं

मैं एक नहीं हूँ , मैं हम हैं
माना , अपनी गिनती कम है
तुम उँगली गिन मत घबराओ
हममें भी मुट्ठी सा दम है

हाँ बहुत कठिन होगा लिखना
पत्थर पर अपने नामों को
होगा थोड़ा मुशकिल करना
अनहोनी लगते कामों को

पर वही सफ़ल होता है जो
चलने की हिम्मत रखता है
गिरता है, घायल होता है
पर फ़िर आगे हो बढ़ता है

हममें है हिम्मत बढ़ने की
तूफ़ान चीरकर चलने की
चट्टानों से टकराने की
गिरने पर फ़िर उठ जाने की

देकर अपनी आवाज़ सखे !
तुम भी अपने संग चलते हो?
तुम भी हो हिन्दी के सपूत
उसका संबल बन सकते हो ।

हिन्दी को उसका हम समुचित
सम्मान दिलाने आये हैं
हम पूत आज अपनी माता का
कर्ज चुकाने आये हैं

हिन्दी की कोमलता को हमने
समझा है, ताकत को भी
उसकी फ़र्राटे सी तेजी को
देखा है , आहट को भी

बतला दें अपनी बाधाओं को
हममें भी है धार बड़ी
होठों पर है मुसकान खिली
हाथों में है तलवार बड़ी

मैं युग्म आज फ़िर परशुराम -सा
यह संकल्प उठाता हूँ
अम्बर ! खाली कर जगह जरा
मैं सूरज नया उगाता हूँ

मैं युग्म , चाहता हूँ धरती पर
नहीं कहीं मतभेद रहे,
ऊँचाई का, गहराई का
धरती पर कोई भेद रहे

मैं युग्म, आदमी की सुन्दर
भावना जगाने आया हूँ
मैं युग्म, हिन्द के मस्तक को
कुछ और सजाने आया हूँ ।

मैं युग्म हिन्द की अभिलाषा का
छोटा सा कोना भर हूँ
तुम एक पुष्प बस दे जाओ
मैं भारत का दोना भर दूँ
- आलोक शंकर
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न जन की भाषा हो हिंदी .........

हर शब्द अटल निर्माण करे 
नवयुग की आशा हो हिंदी 
हर मन की भाषा हो हिंदी 
जन-जन की भाषा हो हिंदी 
पर जाने क्यों जब कहता हूँ 
हिंदी को भाषा जन-जन की 
तब बरबस ही उठ जाती है 
एक दबी हुई पीडा मन की 

अंग्रेजी महलों में सोती 
इसकी ही बढ़ी पिपासा है 
झोंपडियों में जो रहती है 
हिंदी निर्धन की भाषा है 

हिंदी में नींद नहीं आती 
सपने भी लो अंग्रेजी में 
अंग्रेजीमय बस हो जाओ 
खाओ खेलो अंग्रेजी में 

है दौड़ लगी अंग्रेजी पर 
हिंदी बस रोये दुखडा है 
अंग्रेजी नोट है डालर का 
हिंदी कागज़ का टुकडा है 

अंग्रेजी मक्खन ब्रैड और 
खस्ता मुर्गे की बोटी है 
जबरन जो भरती पेट सदा 
हिंदी वो सूखी रोटी है 

हर शिक्षा कर दी अंग्रेजी 
कण कण में भर दी अंग्रेजी 
खेतों में डाली अंग्रेजी 
आँगन में पाली अंग्रेजी 

बस मन समझाने की खातिर 
एक हिंदी दिवस मनाते हैं 
हिंदी को ही अपनाना है
यह कहकर दिल बहलाते हैं 

हम पाल रहे बचपन अपना 
अंग्रेजी की घुट्टी लेकर 
हिंदी का मान बढाते हैं 
अंग्रेजी में भाषण देकर 

अब तो तुतलाते स्वर को भी 
अंग्रेजी की अभिलाषा है 
अंग्रेजी बोले वह शिक्षित 
हिंदी अनपढ़ की भाषा है 

सब भाग रहे मदहोश हुए 
सब सीख रहे हैं अंग्रेजी 
हिंदी लिबास को छोड़ दिया 
सब दीख रहे हैं अंग्रेजी 

यह आज प्रतिष्ठा सूचक हैं 
हम अंग्रेजी में बात करें 
हिंदी है पिछडों की भाषा 
ना हिंदी भाषी साथ रखें 

कानून समूचा अंग्रेजी, 
शिक्षा में छाई अंग्रेजी 
चाहे हिंदी अध्यापक हो 
उसको भी भाई अंग्रेजी 

अपनी भाषा कहते हैं तो 
हिंदी को मान दिलाना है 
बस नाम नहीं देना केवल 
सच्चा सम्मान दिलाना है 

भारत में जब हर कागज़ पर 
हिंदी में लिक्खा जाएगा 
उस दिन ही हर भारतवासी 
हाँ हिंदी दिवस मनायेगा 

आँखों में आँसू मत रखना 
करने की अभिलाषा रखना 
निज कलम और अधरों पर बस 
केवल हिंदी भाषा रखना 

फिर से आवाज़ लगाता हूँ 
नवयुग की आशा हो हिंदी 
बस केवल यही पुकार मेरी 
जन जन की भाषा हो हिंदी 

अरुण मित्तल 'अद्भुत'
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HINDI DIWAS
Is varsh bhi hum Hindi Diwas mana rahe hain

Hindi main kaarya karne ka sankalp dohrah rahe hain

Agle din hindi chhod angreji apna rahe hain

Fir bhi shaan se hum hindi premi kehla rahe hain



Hum kab tak ye Hindi Diwas manate reh jayenge

Hindi main kaarya karne ka sirf sankalp dohrate reh jayenge

Hum kab tak maa ko mom, baap ko dad banate reh jayenge

Hum kag tak apni Hindi maa ko thukrakar,

Videshi Angreji mummy ko apnate reh jayenge.



Pichhle varsh jab humne Hindi Diwas manaya

Maine sachhe mann se angreji chhod hindi ko apnaya

Apne aap ko kuchh kathinaiyon mein hi paya



Maine auto rickshaw wale ko hindi main batlaya,

Kya vishvavidyalaya le chalo ge bhai

Usne mujhko samjhaya,

Yahan to koi  vishvavidyalaya hi nahi hai

University jaldi pahunchna tha jab batlaya,

To usne jhallate hue batlaya,

Kyo Angreji main vishvavidyalaya kahe ja rahe ho

Apna tatha mera waqt barbad kiye ja rahe ho

Hindi main University kahne se kya darte ho

Lagta hai apni hindi bhasha se prem nahi karte ho



Ek din shaakha prbandhak ko hindi main patra likha

Ant main kirpya pawati sheeghra bheje maine likha

Shayad mujhse pawati ki jagah parwati type ho aaya

Kyonki agle din parwati ko apne kaaryalya mein paya

Usne socha, maine uska majak udaya

Isliye aate hi wo mujhpar gusse se chillayi

Maine maafi mangkar usse jaan chhudwai.



Prabandhak ne mahila adhikari ko D.O. patra likhwaya

Maine my dear ki hindi meri priye banaya

Tatha patra shaakha mein sheeghra bhijwaya

Yeh patra bhi mere liye musibat hi laya

Kyonki agle din uska pati kaaryalaya mein aaya

Aate hi wo mujhpar gusse se chillaya

Meri priye likhne ko usne gambhir mamla batlaya

Maine maafi mangkar usse peecha chhudwaya.



Is tarah sachche mann se jab maine angreji chhod hindi ko apnaya

Apne aap ko bhaari musibaton mein hi paya

Fir bhi hindi mein kaarya karne se nahi ghabraya

Mai hindi me nirantar abhyaas kiye ja raha hun

Dheere-dheere kathinaiyon ko apne se duur pa raha hun

Ab main hindi me master bhi kehla raha hun

Hindi Adhikari ko hindi jo sikhla raha hun.



Videshi shaan se,

 hamari bhasha seekh kar hindi vidvan kehla rahe hain

Fir aap log apni bhasha ko apnane se kyon katra rahe hain

Kirpya aap bhi is Hindi Diwas ka fayda uthao

Abhi se sachche mann se angreji chhod hindi ko apnao



Shahido ne dekar apni kurbaniyan

Desh ko angrejo ki daasta se mukt karwaya

Kirpya aap bhi kuch desh prem ki bhawna dikhlao

Sabhi mil kar apni hindi bhasha ko

Angreji ki daasta se mukti dilwao

Angreji ki daasta se mukti dilwao.




         RAJESH ARORA

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