Thursday, 4 September 2014

पुत्र प्राप्ति का तरीका ................... मानचाही संतान, आजमायें तरीका

मां के गर्भ में पल रहा बच्‍चा लड़का या है या लड़की ये तो जन्‍म के बाद ही पता चलता है। ये और बात है कि अल्‍ट्रासाउंड मशीन के आने के बाद अब लोग जन्‍म से पहले ही गर्भ में पल रहे बच्‍चे के लिंग का पता लगा लेते हैं। अल्‍ट्रासाउंड मशीन एक तरह से गर्भ में पल रही कन्‍या शिशु की हत्‍या का बड़ा हथियार बन चुका है, जिससे देश में लिंगानुपात गड़बड़ा रहा है। यदि स्त्रियां प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा संतान प्राप्ति के लिए अपनाए गए तरीके और उनकी बताई काल गणना के आधार पर पति के साथ शारीरिक संबंध (sex) बनाएं तो वह अपनी इच्‍छानुसार पुत्र या पुत्री को जन्‍म दे सकती हैं।शारीरिक संबंध का नियोजन कर दंपत्ति एक पुत्र व एक पुत्री को जन्‍म देकर अपने परिवार को पूरा कर सकती है।

महिलाएं संभोग काल का विशेष ध्‍यान रख यह निर्धारित कर सकती हैं कि वह पुरुष शुक्राणु के Y क्रोमोजोम से अपने अंडाणु का निषेचन (sperm egg fertilization) चाहती हैं या X क्रोमोजोम से। पुरुष शुक्राणु के वाई क्रोमोजोम से अंडाणु का निषेचन माता के गर्भ में पुत्र को स्‍थापित करेगा और एक्‍स से निषेचन कन्‍या को। इससे परिवार को अपने हिसाब से संतुलित करने में दंपत्तियों को विशेष मदद मिलेगी और कन्‍या को गर्भ में मारने के पाप से भी वह बच सकेंगे, जो कि एक विकराल समस्‍या बनती जा रही है।

पीरियड के पहले दिन से करें संभोग काल का निर्धारिण


औरतें जब पीरियड (menstrual cycle) होती हैं तो उसकी समाप्ति के बाद करीब एक सप्‍ताह का समय संभोग के लिए सुरक्षित होता है। इस समय शारीरिक संबंध के बावजूद गर्भधारण की संभावना न के बराबर होती है। उसके बाद सम संख्‍या वाले दिन संभोग करने से पुत्र होने के आसार होते हैं। सम संख्‍या से हमारा मतलब 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14 वें दिन संभोग करने से है। इस दौरान विषम संख्‍या के (1, 3, 5,7, 9, 13, 15) दिन संभोग करने से पुत्री पैदा होने की संभावना अधिक होती है।

विशेष सावधानी


याद रहे दिन की गणना करते वक्‍त ये ध्‍यान रखें कि एक दिन का मतलब 24 घंटे से है। जैसे कि यदि कोई स्‍त्री 2 फरवरी को रात 10 बजे periods होती है तो 3 फरवरी रात 10 बजे तक पीरियड का एक दिन कहलाएगा। साधारणत: जब किसी स्‍त्री को दो फरवरी को किसी भी समय माहवारी होगी तो वह 3 फरवरी को दूसरा दिन मान लेती है। इससे गणना सही नहीं बैठती है।

दूसरी सावधानी यह बरतें कि periodic table की गणना पहले दिन से करें, लेकिन गर्भधारण के लिए संभोग पीरियड खत्‍म होने के एक सप्‍ताह बाद करें। एक सप्‍ताह का समय गर्भधारण से बचने के लिए सुरक्षित काल होता है।  अर्थात पुत्र प्राप्ति के लिए पीरियड शुरू होने वाले दिन से गणना कर 12 वें, 14 वें और 16 वें दिन संभोग करें। ध्‍यान रखें कि पुत्र चाहिए तो जब तक गर्भ धारण नहीं होता है तब तक विषम संख्‍या वाले दिन संभोग करने से बचें। ठीक इसी तरह अगर पुत्री चाहिए तो विषम संख्‍या वाले दिन संभोग करें और गर्भधारण करने तक सम संख्‍या वाले दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचें।

मेरा अनुभव


आप इसे विज्ञान से परे मान सकते हैं, लेकिन यह तरीका 99 फीसदी सफल और सही है। बाकी का एक फीसदी ऊपर वाले पर छोड़ दें। वैसे काल गणना की गलती लोग कर जाते हैं। मैंने खुद इस गणना के आधार पर इच्छित संतान की प्राप्ति की है। यही नहीं, मेरे कई रिश्‍तेदार भी इस सुझाव पर चलकर इच्‍छानुसार पुत्र और पुत्री को जन्‍म दे चुके हैं। हां आपको यह बता दूं कि यदि गणना काल में एक घंटे की भी गलती हुई तो परिणाम विपरीत होगा। अत: दिन की गणना का विशेष ध्‍यान रखें और ऊपर वाले पर भरोसा रखें।

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