Thursday, 4 September 2014

पुत्र प्राप्ति का तरीका.........मंगलवार व्रत विधि................मंगलवार व्रत कथा

पुत्र प्राप्ति का तरीका.........मंगलवार व्रत विधि................मंगलवार व्रत कथा 



हर दंपत्ति की कामना होती है कि उनको सुयोग्य संतान हो। लेकिन कुछ ऐसे लोग आज भी इस दुनिया में है जो मात्र पुत्र को ही संतान के रूप में चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए प्रस्तुत है अचूक उपाय। मंगलवार का उपवास रखने से मनचाही संतान की प्राप्ति होती है। मुख्यत: पुत्र की चाह रखने वालों के लिए यह मंगलवार व्रत होता है। मंगलवार व्रत कथा और विधि की संपूर्ण जानकारी पढ़ें। 

मंगलवार व्रत विधि 

यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से रखा जाता है। इस व्रत को आठ मंगलवार अवश्य करें। इस व्रत में गेहूं और गुड़ से बना भोजन ही करना चाहिए। एक ही बार भोजन करें। लाल फूल चढ़ाएं और लाल वस्त्र ही धारण करें। अंत में हनुमान जी की पूजा करें।

मंगलवार व्रत कथा 

एक निसंतान ब्राह्मण दंपत्ति काफी दुःखी थे। ब्राह्मण एक दिन वन में पूजा करने गया। वह हनुमान जी से पुत्र की कामना करने लगा। घर पर उसकी स्त्री भी पुत्र प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत करती थी। मंगलवार को व्रत के अंत में हनुमान जी को भोग लगाकर भोजन करती थी।



एक बार व्रत के दिन ब्राह्मणी ना भोजन बना पाई, और ना भोग ही लगा सकी। तब उसने प्रण किया कि अगले मंगल को ही भोग लगाकर अन्न ग्रहण करेगी। भूखी-प्यासी छः दिन तक रहने से अगले मंगलवार को वह बेहोश हो गई। 

हनुमान जी उसकी निष्ठा और लगन को देखकर प्रसन्न हो गए। उसे दर्शन देकर कहा कि वे उससे प्रसन्न हैं। उसे बालक देंगे, जो कि उसकी सेवा किया करेगा। हनुमान जी ने उस स्त्री को पुत्र रत्न दिया और अंतरध्यान हो गए। 

ब्राह्मणी अति प्रसन्न हो गई। उसने उस बालक का नाम मंगल रखा। जब ब्राह्मण घर आया, तो बालक को देख पूछा कि वह कौन है? पत्नी ने सारी कथा अपने स्वामी को बताई। पत्नी की बातों को छल पूर्ण जान ब्राह्मण को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह हुआ। 

एक दिन मौका देख ब्राह्मण ने बालक को कुंए में गिरा दिया। घर पर पत्नी के पूछने पर ब्राह्मण घबराया। पीछे से मंगल मुस्कुराता हुआ आ गया। ब्राह्मण आश्चर्यचकित रह गया। 

रात को हनुमानजी ने उसे सपने में सारी कथा बताई, तो ब्राह्मण प्रसन्न हुआ। फ़िर वह दम्पति मंगल का व्रत रखकर आनंद का जीवन व्यतीत करने लगे। तब से यह व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
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हैं अगर हनुमान भक्त तो ज़रूर करें 7 उपाय

यदि आप हनुमानजी के भक्त हैं तो आपके लिए मंगलवार और शनिवार बहुत ही विशेष दिन हैं। इन दोनों दिनों में की गई हनुमान पूजा खास फल देने वाली होती है। हनुमानजी को खुश करने के लिए 7 चमत्कारी उपाय हैं, जो कि मंगलवार और शनिवार को करने चाहिए।

प्रात: सुबह पीपल के कुछ पत्ते लें और इन पत्तों पर चंदन या कुमकुम से श्रीराम नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की एक माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। किसी भी पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं और सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

अगर आपको कड़ी मेहनत करने के बावजूद भी किसी भी कार्य में असफलता मिल रही है तो किसी भी हनुमान मंदिर में नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में हनुमानजी के सामने ही नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें या हनुमानजी के मंत्रों का जाप करें। वह नींबू अपने साथ रखकर कार्य करें। मेहनत के साथ ही कार्य में सफलता भी मिल जाएंगी।

यदि आपके कार्यों में बार-बार अड़चनें आ रही हैं या धन प्राप्ति में देरी हो रही है या किसी की बुरी नजर बार-बार लगती है तो किसी भी सिद्ध हनुमान मंदिर में एक नारियल लेकर जाएं। नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके पश्चात हनुमान चालीसा का जाप करते रहें। सिर पर वारने के बाद नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

यदि आप मालामाल होना चाहते हैं तो रात में किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और वहां मूर्ति के सामने चौमुखा दीपक लगाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा प्रतिदिन करेंगे तो बहुत ही जल्द बड़ी-बड़ी परेशानियां भी आसानी से दूर हो जाएंगी।

यदि आपके बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं तो शनिवार को यह उपाय करें। आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान आदि करने के बाद घर से एक नींबू अपने साथ लें और किसी चौराहे पर जाएं। नींबू के दो बराबर टुकड़ें करके एक टुकड़े को अपने से आगे की ओर फेंकें और दूसरे टुकड़े को पीछे की ओर। इस समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर ज़रूर होना चाहिए।
हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।

हनुमानजी के मंदिर में एक नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। अपनी श्रद्धा अनुसार हनुमान मंदिर में बजरंग बली का चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी।
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ये पांच दु:ख हर लेते हैं हनुमान


श्री हनुमान के स्वरूप, चरित्र, आचरण की महिमा ऐसी है कि उनका मात्र नाम ही मनोबल और आत्मविश्वास से भर देता है। रुद्र अवतार होने से हनुमान का स्मरण दु:खों का अंत करने वाला भी माना गया है।

श्री हनुमान के ऐसे ही
अतुलनीय चरित्र, गुणों और विशेषताओं को श्री राम के परमभक्त गोस्वामी तुलसीदास ने श्री हनुमान चालीसा में उतारा है। श्री हनुमान चालीसा का पाठ हनुमान भक्ति का सबसे
श्रेष्ट, सरल उपाय है, बल्कि धर्म की दृष्टि से बताए गए पांच दु:खों का नाश करने वाला भी माना गया है।

श्री हनुमान चालीसा की शुरूआत में ही पंक्तियां आती है कि -

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।

बल बुद्धि, विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

इस दोहे में बल, बुद्धि और विद्या द्वारा क्लेशों को हरने के लिए हनुमान से विनती की गई है। यहां जिन क्लेशों का अंत करने के लिए प्रार्थना की गई है, वह पांच कारण है - अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश। जानते हैं इन पांच दु:खों के अर्थ और व्यावहारिक रूप।

अविद्या - विद्या या ज्ञान का अभाव। विद्या व्यक्ति के चरित्र, आचरण और व्यक्तित्व विकास के लिए अहम है। व्यावहारिक रूप से भी किसी विषय पर जानकारी का अभाव असुविधा, परेशानी और कष्टों का कारण बन जाता है। इसलिए विद्या के बिना जीवन दु:खों का कारण माना गया है।

अस्मिता - स्वयं के सम्मान, प्रतिष्ठा के लिए भी व्यक्ति अनेक पर मौकों अहं भाव के कारण दूसरों का जाने-अनजाने उपेक्षा या अपमान कर देता है। जिससे बदले में मिली असहयोग, घृणा भी व्यक्ति के गहरे दु:ख का कारण बन सकती है।

राग - किसी व्यक्ति, वस्तु या विषय से आसक्ति से उनसे जुड़ी कमियां, दोष या बुराईयों को व्यक्ति नहीं देख पाता। जिससे मिले अपयश, असम्मान विरोध भी कलह पैदा करता है।

द्वेष - किसी के प्रति ईर्ष्या या बैर भाव का होना। यह भी कलह का ही रूप है, जो हमेशा ही व्यक्ति को बेचैन और अशांत रखता है।

अभिनिवेश - मौत या काल का भय। मन पर संयम की कमी और इच्छाओं पर काबू न होना जीवन के प्रति आसक्ति पैदा करता है। यही भाव मौत के अटल सत्य को स्वीकारने नहीं देता है और मृत्यु को लेकर चिंता या भय का कारण बनता है।

व्यावहारिक रूप से इन पांच दु:खों से मुक्ति या बचाव बुद्धि, विद्या या बल से ही संभव है। धार्मिक दृष्टि से हनुमान उपासना से प्राप्त होने वाले बुद्धि और विवेक खासतौर पर इन पांच तरह के कलह दूर रखते हैं।

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