Thursday, 18 September 2014

कलयुग कब और कैसे आया.........भगवान के दसवें अवतार से जुड़ी रोचक बातें

कल्कि अवतार होना निश्चित है..!कलयुग कब और कैसे आया



जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया और भगवान श्री कृष्ण अपनी लीला का संवरण करके चले गए तो पांडवो ने भी अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के बेटे परीक्षित का राज अभिषेक करके स्वर्गारोहण किया . पाण्डवों के स्वर्ग जाने के पश्चात राजा परीक्षित ऋषि-मुनियों के आदेशानुसार धर्मपूर्वक शासन करने लगे। उनके जन्म के समय ज्योतिषियों ने जिन गुणों का वर्णन किया था, वे समस्त गुण उनमें विद्यमान थे। उनका विवाह राजा उत्तर की कन्या इरावती से हुआ। उससे उन्हें जनमेजय आदि चार पुत्र प्राप्त हुए। इस प्रकार वे समस्त ऐश्वर्य भोग रहे थे। 
एक बार दिग्विजय करते हुए परीक्षित सरस्वती नदी के तट पर पहुंचे। राजा ने छिपकर देखा. तो गौ रो रही थी.भगवान श्रीकृष्ण के जाने के साथ ही पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हो गया था। इस युग में प्राणी पापाचार में लिप्त हो जाएंगे। यही सोचकर पृथ्वी अत्यंत दुःखी थी. 
तब बैल ने उससे कहा- तुम क्यों रही हो ? मेरा एक पैर बचा है क्या तुम मेरी इस हालत पर रो रही हो. वास्तव में वृषभ-रूप में धर्म तथा गाय-रूप में पृथ्वी थी. 
तब बैल ने कहा - सतयुग में मेरे (धर्म के) -पवित्रता, तप, दया और सत्य-ये चार चरण थे। किंतु कलयुग में गर्व, मोह और मद के कारण मेरे तीन चरण नष्ट हो गए हैं। अब केवल एक ही चरण बचा है सत्य जिसपर मै स्थित हूँ. तभी वहां उन्होंने देखा कि एक राजवेषधारी शूद्र हाथ में डंडा लिए एक पैर वाले वृषभ (बैल) और अति दुर्बल गाय को निर्दयता से पीटने लगा वह वृषभ भय से कांपता हुआ एक पैर पर खड़ा था और गाय उस शूद्र के पांवों के पास गिर कर उसकी ठोकरें खा रही थी। 
यह वीभत्स दृश्य देखकर परीक्षित क्रोधित होकर बोले-“ठहर जा दुष्ट! तू कौन है, जो इन निर्दोष और दुर्बल प्राणियों पर अत्याचार कर रहा है? यद्यपि तूने राजा का वेष धारण कर रखा है, किंतु तेरा कर्म तेरे शूद्र होने की बात कह रहा है। तूने मेरे राज्य में यह कार्य कर घोर अपराध किया है। इसलिए तेरा वध ही तेरे लिए उचित दण्ड है।”
परीक्षित ने धर्म और पृथ्वी को सांत्वना दी और म्यान से तलवार निकालकर आगे बढ़े। कलयुग ने देखा कि अब परीक्षित उसे मार ही डालेंगे तो उसने अपना राजसी वेश त्याग दिया और भय से व्याकुल होकर उनके चरणों में मस्तक झुका दिया। परीक्षित परम दयालु थे। जब उन्होंने कलयुग को अपनी शरण में देखा तो उनका मन दया से भर आया।


उन्होंने उसके रहने के लिए ये स्थान बता दिए- 

1. जुआ- जहाँ जुआ खेला जाता है. 
2. स्त्री- जहाँ परस्त्री गमन होता है. 
3. मद्य- जहाँ लोग शराब पीते है.
4. हिंसा - जहाँ हिंसा होती है.इस प्रकार जब राजा परीक्षित ने कलयुग को चार स्थान दिए तो वह बोला कोई एक और जगह दीजिये. 

तब राजा ने कहा -तुम स्वर्ण (सोना)में भी वास कर सकते हो.(यहाँ स्वर्ण का अर्थ अनीति से कमाये धन से है.) इनके साथ-साथ मिथ्या, मद, काम, हिंसा और वैर-ये पांच वस्तुएं भी कलि को दे दीं। 

राजा आखेट के लिए निकले थे जैसे ही स्वर्ण में रहने का स्थान दिया तो राजा उस दिन जो मुकुट पहने था वह जरासंध राजा का था जो भीम ने जबरजस्ती उससे छीन लिया था. इसलिए कलि उनके मुकुट में आकर बैठ गया. 

कलयुग राजा परीक्षित के सिर पर सवार था ही। उस दिन उन्हें दिनभर घुमने पर भी शिकार नहीं मिला और उनके सैनिक भी पीछे छुट गए वे भूखे प्यासे एक आश्रम में पहुँचे तब उन्होंने एक ऋषि को देखा.जो समाधि में थे तब उन्होंने जल कि याचना की परन्तु ऋषि तो समाधि में थे इसलिए उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.

इस पर उनके सिर पर सवार कलि ने उनकी बुद्धि खराब कर दी और कहा - ये ढोग कर रहा है इसे मार डाल .परन्तु अच्छे संस्कार के कारण राजा ने उन्हें मारा तो नहीं क्रोधवश भूखे और प्यासे होने के कारण उनके गले में मरे सर्प को डाल दिया. क्योंकि ऋषि ध्यानमग्न थे, अतः परीक्षित का स्वागत नहीं कर सके थे। और आश्रम से चले गए. मुनि के श्रृंगी नामक पुत्र ने जब यह सुना तो परीक्षित को श्राप दे दिया कि आजा से सातवे दिन तक्षक नाग द्वारा कटने से आपकी मृत्यु हो जायेगी. 

इस प्रकार पृथ्वी पर कलयुग का आगमन हुआ और इसका पहला शिकार इसे शरण देने वाले परीक्षित ही बने। कलयुग की आयु 4,32,000 वर्ष कही गई है। इसका आरंभ 3102 वर्ष ईसा पूर्व से हुआ।

कल्कि अवतार ..


जिस तरह आज पुरे दुनिया में अत्याचार, भ्रस्टाचार, पापाचार और व्याविचार का बोलबाला बढ़ रहा है- लड़कियों और महिलाओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल है, जमाखोरों ने महंगाई को एवरेस्ट पर पहुंचा दिया है, दलालों की पूछ बढ़ गयी है, पैकेटमारों की दिन-दूनी वृद्धि हो रही है, छिंताईबाज़ के पौ बारह हैं, नमक हरामो की चांदी काट रही है, स्कूलों में पढाई के नाम पर ऐश हो रहा है, स्कुल-अस्पताल-मंदिर बनाने  के नाम पर पूंजीपतियों का सबसे बड़ा गोरखधंधा चरम पर है....... इससे तो यही लगता है की किसी न किसी रूप में किसी कल्याणकारी का उद्गम जरूर होगा. पर प्रश्नवाचक चिन्ह भी चेहरे पर झलकने लगते है. क्या यह संभव है. धार्मिक पवृति के लोगों ने तो कल्कि अवतार की घोषणा भी कर दी है. सिर्फ यही नहीं समय और स्थान भी निर्धारित कर दिए गए हैं. अब देखना है की भगवान श्री  कल्कि का अवतार होता है या फिर लोगों का यह भ्रम मात्र है

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भगवान विष्णु के अब तक नौ अवतार हो चुके हैं और दसवें अवतार की प्रतीक्षा चल रही है। पुराणों में भगवान के दसवें अवतार की जो तिथि बतायी गयी है उसके अनुसार भगवान सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को जन्म लेंगे।

 श्रीमद्भागवत पुराण के बारहवें स्कंद में लिखा है कि भगवान का कल्कि अवतार कलियुग की समाप्ति और सतयुग के संधि काल में होगा। इनके जन्म स्थान के विषय में श्रीमद्भागवत, स्कंध पुराण और कल्कि पुराण में बताया गया है कि कल्कि भगवान उत्तर प्रदेश में गंगा और रामगंगा के बीच बसे मुरादाबाद के संभल ग्राम में जन्म लेंगे।


भगवान के दसवें अवतार से जुड़ी रोचक बातें



पुराणों के अनुसार इनके पिता का नाम विष्णुदत्त होगा। विष्णुदत्त भगवान विष्णु के परम भक्त होंगे। जबकि गुरू गोविंद सिंह जी ने दशम नामक ग्रंथ में लिखा है कि कल्कि भगवान का जन्म कश्मीर में बिशन दत्त नाम के व्यक्ति के घर होगा। बारह वर्ष की उम्र में कल्कि भगवान त्रिकोता नामक कन्या से विवाह करेंगे।


भगवान के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति के विषय में दक्षिण भारतीय ज्योतिषियों की गणना कहती है कि भगवान उस समय जन्म लेंगे जब चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में होगा। सूर्य तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में गोचर करेगा। गुरू स्वराशि धनु में और शनि अपनी उच्च राशि तुला में विराजमान होगा। वर्तमान में शनि अपनी उच्च राशि तुला में ही गोचर कर रहा है।

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