Thursday, 14 August 2014

ये है हिंदुस्तान मेरी जान.....................It happens only in India.. Ha Ha Ha Ha ......

ये है हिंदुस्तान मेरी जान

आज विद्यालय में बहुत चहल पहल है । 
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सब कुछ साफ - सुथरा , एक दम सलीके से ।
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सुना है निरीक्षण को कोई साहब आने वाले हैं । 
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पूरा विद्यालय चकाचक ।
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नियत समय पर साहब विद्यालय पहुंचे । 
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ठिगना कद , रौबदार चेहरा , और आँखें तो जैसे जीते जी पोस्टमार्टम कर दें ।
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पूरे परिसर के निरीक्षण के बाद उनहोंने कक्षाओं का रुख किया ।
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कक्षा पांच के एक विद्यार्थी को उठा कर पूछा , बताओ देश का प्रधान मंत्री कौन है ?
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बच्चा बोला -जी राम लाल ।
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साहब बोले -बेटा प्रधान मंत्री ?
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बच्चा - रामलाल ।
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अब साहब गुस्साए - अबे तुझे पांच में किसने पहुंचाया ? पता है मैं तेरा नाम काट सकता हूँ ।
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बच्चा -
कैसे काटोगे ?
मेरा तो नाम ही नहीं लिखा है ।
मैं तो बाहर बकरी चरा रहा था ।
इस मास्टर ने कहा कक्षा में बैठ जा दस रूपये मिलेंगे । 
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तू तो ये बता रूपये तू देगा या मास्टर ?
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साहब भुनभुनाते हुवे मास्टर जी के पास गए , 
कडक आवाज में पूछा - 
क्या मजाक बना रखा है ।
फर्जी बच्चे बैठा रखे हैं ।
पता है मैं तुम्हे नौकरी से बर्खास्त कर सकता हूँ ।
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गुरूजी -
कर दे भाई । 
मैं कौन सा यहाँ का मास्टर हूँ ।
मास्टर तो मेरा पड़ोसी दुकानदार है । 
वो दुकान का सामान लेने शहर गया है।
कह रहा था एक खूसट साहब आएगा , झेल लेना ।
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अब तो साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर । 
पैर पटकते हुए प्रधानाध्यापक के सामने जा पहुंचे । 
चिल्लाकर बोले ,
" क्या अंधेरगर्दी है 
, शरम नहीं आती । 
क्या इसी के लिए तुम्हारे स्कूल को सरकारी इमदाद मिलती है । 
पता है ,मैं तुम्हारे स्कूल की मान्यता समाप्त कर सकता हूँ
जवाब दो प्रिंसिपल साहब ।
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प्रिंसिपल ने दराज से एक सौ की गड्डी निकाल कर मेज पर रखी और बोला - 
मैं कौन सा प्रिंसिपल हूँ 
प्रिंसिपल तो मेरे चाचा हैं ।
प्रॉपर्टी डीलिंग भी करते हैं
आज एक सौदे का बयाना लेने शहर गए हैं । 
कह रहे थे , 
एक कमबख्त निरीक्षण को आएगा , उसके मुंह पे ये गड्डी मारना और दफा करना ।
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साहब ने मुस्कराते हुए गड्डी जेब के हवाले की और बोले - आज बच गये तुम सब । अगर आज मामाजी को सड़क के ठेके के चक्कर में शहर ना जाना होता , और अपनी जगह वो मुझे ना भेजते तो तुम में से एक की भी नौकरी ना बचती ।


It happens only in India.


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