Friday, 15 August 2014

Details regarding the birth of Balram ..........हलछठः श्रीकृष्ण के भाई बलराम का जन्म हुआ ,व्रत की कथा

Details regarding the birth of Balram


Details regarding the birth of Balram, elder brother of Sri Krishna, are found in the Srimad Bhagavad Purana, Mahabharat and Hari Vamsa. Balram has two mothers – Devaki and Rohini. Balarama was born in the womb of Devaki. As Devaki was imprisoned and Kansa had decided to kill all the children born to her, the child from the womb of Devaki was placed inside Rohini.

Devaki and Rohini were the wives of Vasudeva.

Even though Balram was born first in the womb of Devaki, his mother is Rohini as she delivered Him.

Balram is an incarnation of Adi Shesha.


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हलछठः श्रीकृष्ण के भाई बलराम का जन्म हुआ ,व्रत की कथा

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इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के भाई बलराम जी का जन्म हुआ था. बलरामजी का प्रमुख शस्त्र हल और मूसल है. इसलिए उन्हें हलधर कहते हैं. उन्हीं के नाम पर इस पर्व का नाम हल-षष्ठी पड़ा. क्योंकि इस दिन हल के पूजन का विशेष महत्व है.  

देश के पूर्वी अंचल में इसे ललई छठ भी कहते हैं. इस व्रत को पुत्रवती स्त्रियां करतीं हैं. इस दिन हल द्वार जुता हुआ फल और अन्न ही खाया जाता है. इस दिन गाय का दूध, दही भी नहीं खाया जाता है. इस दिन भैंस का दूध, दही ही उपयोग में लाया जाता है. इस दिन स्त्रियां एक महुए की दातुन करतीं हैं.

व्रत की कथा 

कहते हैं बहुत समय पहले एक गर्भवती ग्वालिन के प्रसव का समय समीप आया. उसे प्रसव पीड़ा होने लगी. उसका दही भी बेचने के लिए रखा हुआ था. ऐसे में वह मटकी लेकर निकल पड़ी. चलते हुए वह एक खेत में पहुंची जहां और उसने एक पुत्र को जन्म दिया.

उसने लड़के कपड़े में लपेटकर वहीं रख दिया और मटकियां उठाकर उठा कर आगे बढ़ गई. उस दिन हरछठ थी. उसका दूध गाय-भैंस का मिला हुआ था पर उसने अपने ग्राहकों को बताया कि दूध भेंस का ही है.

जहां ग्वालिन ने बच्चे को रखा था वहां एक किसान हल जोत रहा था. उसके बैल बच्चे को देखकर खेत की मेढ़ पर जा पहुंचे. हल की नोक बच्चे पर लगने से बच्चा मर गया.

किसान को यह देखकर बहुत दुख हुआ. ग्वालिन वापस लौटी तो उसने अपने बेटे को मरा हुआ पाया. उसे ध्यान आया कि उसने झूठ बेचकर कई लोगों का धर्म भ्रष्ट किया है इसलिए उसे यह परिणाम हुआ है.

वह तुरंत वापस गई और ग्वालिन ने जिसको भी दूध बेचा था उन्हें सच बता दिया. इस तरह कई लोगों का धर्म भ्रष्ट होने से बच गया. इसके बाद वह खेत में पहुंची तो उसका बच्चा उसे जिंदा मिला. इस तरह ग्वालिन हर वर्ष हरछठ को यह पूजा विधि-विधान से करने लगी.

1 comment:

  1. इस वर्ष 16 अगस्त को हलछठ है.

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