Wednesday, 20 August 2014

कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं।..............आइए जानें, उनकी इतनी सारी पत्नियों की क्या है कहानी...

कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं।..............

कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं। वैसे तो इस संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक कथा कुछ ऐसी है। आइए जानें, उनकी इतनी सारी पत्नियों की क्या है कहानी...

कृष्ण की पहली पत्नी थी रुक्मणि, जिनका हरण के बाद उनसे कृष्ण ने विवाह किया। दरअसल विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि मन ही मन कृष्ण की हो चुकी थीं, लेकिन रुक्मणि के भाई रुक्मणि का विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ करना चाहते थे। रुक्मणि की मर्जी से उनका हरण कर कृष्ण ने उनके साथ विवाह रचाया।

कृष्ण की दूसरी पत्नी निशाधराज जाम्बवान की पुत्री जाम्बवती थी। 

उनकी तीसरी पत्नी सत्राजीत की पुत्री सत्यभामा हुईं, जिसे सत्राजीत ने कृष्ण को तब सौंपा जब सत्राजीत द्वारा कृष्ण पर कई आरोप लगाए गए और जब उन्हें पता चला कि ये आरोप बेबुनियाद थे तो शर्मिंदगी के कारण उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह कृष्ण संग रचा दिया।

इसके बाद एक स्वयंवर में पहुंचे कृष्ण राजकुमारी मित्रबिन्दा को लाए और विवाह रचाया, जो उनकी चौथी पत्नी बनीं। फिर कौशल का राजा नग्नजीत के सात बैलों को कृष्ण ने एक साथ नाथ दिया और उनकी कन्या सत्या से विवाह किया। फिर कैकेय की राजकुमारी भद्रा से उनका विवाह हुआ।

भद्रदेश की राजकुमारी लक्ष्मणा कृष्ण को चाहती थी, लेकिन परिवार उनका परिवार कृष्ण संग विवाह के खिलाफ था इसलिए कृष्ण को उन्हें भी हरणा पड़ा। 

लाक्षागृह से बच निकलने पर पांडवों से मिलने कृष्ण इंद्रप्रस्थ पहुंचे। इस दौरान अर्जुन के साथ कृष्ण कहीं विहार पर निकले, जहां सूर्य पुत्री कालिन्दी भगवान कृष्ण को पति स्वरूप पाने के लिए तपस्या कर रही थी। कृष्ण उनकी आराधना से मुख मोड़ न सके और आखिरकार उनसे भी विवाह कर लिया। 

इस तरह कुल मिलाकर कृष्ण की 8 पत्नियां हुईं, रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।

एक बार स्वर्गलोक के राजा देवराज इंद्र ने कृष्ण से प्रार्थना की, 'प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आम लोगों की खूबसूरत कन्याओं का हरण कर उन्हें अपने यहां बंदीगृह में डाल रखा है। इस संकट से आप ही मुक्ति दिला सकते हैं।'

इंद्र की प्रार्थना स्वीकार कर श्रीकृष्ण अपनी प्रिय पत्नी सत्यभामा को साथ लेकर गरुड़ पर सवार हो प्रागज्योतिषपुर पहुंचे। वहां पहुंचकर भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से सबसे पहले मुर दैत्य और उसके पुत्रों का संहार किया। चूंकि भौमासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था इसलिए भगवान कृष्ण ने सत्यभामा को सारथी बनाया और फिर कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से उसका वध कर डाला।

इसके बाद भौमासुर के बेटे को गद्दी पर बिठाकर भौमासुर द्वारा हरण कर लाई गईं 16,100 कन्याओं को कैद से मुक्त कराया। सालों से भौमासुर के कैद में रहने के कारण इन्हें कोआ अपनाने को तैयार नहीं था, इसलिए आखिरकार कृष्ण ने सभी को आश्रय दिया और 16,100 कन्याओं ने कृष्ण को पति स्वरूप स्वीकार कर उनकी भक्ति में लीन हो गईं।   साभार- नवभारत टाइम्स 

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