Wednesday, 25 June 2014

Hindi Hasya ............. Ha Ha Ha Ha .......... यारों शिकार आया है, इसको खसोट लो

एक जमींदार के लिए उसके कुछ किसान एक भुना हुआ मुर्गा और एक बोतल फल का रस ले आए. जमींदार ने अपने नौकर को बुलाकर चीजें उनके घर ले जाने को कहा. नौकर एक चालाक, शरीर लड़का था. यह जानते हुए जमींदार ने उससे कहा, "देखो, उस कपड़े में जिंदा चिड़िया है और बोतल में जहर है. खबरदार, जो रास्ते में उस कपड़े को हटाया, क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो चिड़िया उड़ जाएगी. और बोतल सूंघ भी ली तो तुम मर जाओगे. समझे?"

नौकर भी अपने मालिक को खूब पहचानता था. उसने एक आरामदेह कोना ढूंढा और बैठकर भुना मुर्गा खा गया. उसने बोतल में जो रस था वह भी सारा पी डाला. एक बूंद भी नहीं छोड़ा.

उधर जमींदार भोजन के समय घर पहुँचा और पत्नी से भोजन परोसने को कहा. उसकी पत्नी ने कहा, "जरा देर ठहरो. खाना अभी तैयार नहीं है." जमींदार ने कहा, "मैंने जो मुर्गा और रस की बोतल नौकर के हाथ वही दे दो. वही काफी है."

उसके गुस्से की सीमा न रही जब उसकी पत्नी ने बताया कि नौकर तो सुबह का गया अभी तक लौटा ही नहीं.

बिना कुछ बोले गुस्से से भरा जमींदार अपने काम की जगह वापस गया तो देखा नौकर तान कर सो रहा है. उसने उसे लात मारकर जगाया और किसान द्वारा लाई गई भेंट के बारे में पूछा.

लड़के ने कहा, "मालिक, मैं घर जा रहा था तो इतने जोर की हवा चली कि मुर्गे के ऊपर ढका कपड़ा उड़ गया और जैसा आपने कहा था, वह भी उड़ गया. मुझको बहुत डर लगा कि आप सज़ा देंगें और मैंने बचने के लिए बोतल में जो जहर था वह पी लिया. और अब यहाँ लेटा-लेटा मौत के आने का इंतजार कर रहा था."
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देखा जो मुझको कोर्ट में, कहने लगे क्लर्क

यारों शिकार आया है, इसको खसोट लो,



जमशेद जी बोले कि मोटा है यह किसान

रिश्वत में इससे बढ़िया सी बैलों की जोट लो,



फ़रमाया जैकसन ने कि झंझट में मत पड़ो

सीधी सी बात यह है कि सौ-सौ के नोट लो,



बोले ये शेरसिंह कि बुजदिल हैं आप लोग

मेरी तो राय यह है कि कफ़न भी खसोट लो,



जुम्मन ने कांप कर कहा, यारों करो न शोर

जो कुछ भी तुमको लेना है, पर्दे की ओट लो,



नत्थू कड़क के बोले कि डर की है बात क्या

अपना ही तो अब राज है, डंके की चोट लो.
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