Sunday, 8 June 2014

गंगा दशहरा

गंगा दशहरा



ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है. इस दिन पवित्र नदी गंगा जी भागीरथ द्वारा स्वर्ग लोग से पृ्थ्वी लोक पर अवतीर्ण हुई थी. इस दिन स्नान, दान, तर्पण से जीवन के समस्त पापों का नाश होता है.यही कारण है, कि इस पर्व का नाम दशहरा पडा है. पर्वों की श्रेणी में गंगा दशहरा श्रद्वा और विश्वास का पर्व है. प्राचीन पुराण के अनुसार इस तिथि में स्नान, दान करना विशेष कल्याणकारी रहता है. सभी नदियों में गंगा नदी को सबसे अधिक पवित्र और पापमोचिनी माना गया है. गंगा में डूबकी लगाने से मनुष्यों को मुक्ति प्राप्त होती है.


ऋषि भागीरथ ने अपनी कई वर्षो की कठोर तपस्या कर गंगा को पृ्थ्वी पर आने के लिये मनाया था. गंगा दशहरा पर्व पर प्यासे राहगीरों को शर्बल पिलाकर उनकी प्यास बुझाना कल्याणकारी माना जाता है. इस दिन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बडे-बडे मेलों का आयोजन किया जाता है. जगह-जगह पर प्याऊ लगाने के साथ साथ इस दिन छतरी, वस्त्र, जूते और गर्मी की ताप से बचने के सभी साधनों को दान में देना शुभ माना जाता है. यह सभी कार्य करने से व्यक्ति के पाप दूर होते है. और वह सदमार्ग की ओर अग्रसर होता है.



गंगा दशहरा

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है. इस दिन पवित्र नदी गंगा जी भागीरथ द्वारा स्वर्ग लोग से पृ्थ्वी लोक पर अवतीर्ण हुई थी. इस दिन स्नान, दान, तर्पण से जीवन के समस्त पापों का नाश होता है.यही कारण है, कि इस पर्व का नाम दशहरा पडा है. पर्वों की श्रेणी में गंगा दशहरा श्रद्वा और विश्वास का पर्व है. प्राचीन पुराण के अनुसार इस तिथि में स्नान, दान करना विशेष कल्याणकारी रहता है. सभी नदियों में गंगा नदी को सबसे अधिक पवित्र और पापमोचिनी माना गया है. गंगा में डूबकी लगाने से मनुष्यों को मुक्ति प्राप्त होती है.


ऋषि भागीरथ ने अपनी कई वर्षो की कठोर तपस्या कर गंगा को पृ्थ्वी पर आने के लिये मनाया था. गंगा दशहरा पर्व पर प्यासे राहगीरों को शर्बल पिलाकर उनकी प्यास बुझाना कल्याणकारी माना जाता है. इस दिन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बडे-बडे मेलों का आयोजन किया जाता है. जगह-जगह पर प्याऊ लगाने के साथ साथ इस दिन छतरी, वस्त्र, जूते और गर्मी की ताप से बचने के सभी साधनों को दान में देना शुभ माना जाता है. यह सभी कार्य करने से व्यक्ति के पाप दूर होते है. और वह सदमार्ग की ओर अग्रसर होता है.



गंगा दशहरा

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है. इस दिन पवित्र नदी गंगा जी भागीरथ द्वारा स्वर्ग लोग से पृ्थ्वी लोक पर अवतीर्ण हुई थी. इस दिन स्नान, दान, तर्पण से जीवन के समस्त पापों का नाश होता है.यही कारण है, कि इस पर्व का नाम दशहरा पडा है. पर्वों की श्रेणी में गंगा दशहरा श्रद्वा और विश्वास का पर्व है. प्राचीन पुराण के अनुसार इस तिथि में स्नान, दान करना विशेष कल्याणकारी रहता है. सभी नदियों में गंगा नदी को सबसे अधिक पवित्र और पापमोचिनी माना गया है. गंगा में डूबकी लगाने से मनुष्यों को मुक्ति प्राप्त होती है.


ऋषि भागीरथ ने अपनी कई वर्षो की कठोर तपस्या कर गंगा को पृ्थ्वी पर आने के लिये मनाया था. गंगा दशहरा पर्व पर प्यासे राहगीरों को शर्बल पिलाकर उनकी प्यास बुझाना कल्याणकारी माना जाता है. इस दिन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बडे-बडे मेलों का आयोजन किया जाता है. जगह-जगह पर प्याऊ लगाने के साथ साथ इस दिन छतरी, वस्त्र, जूते और गर्मी की ताप से बचने के सभी साधनों को दान में देना शुभ माना जाता है. यह सभी कार्य करने से व्यक्ति के पाप दूर होते है. और वह सदमार्ग की ओर अग्रसर होता है.
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