Saturday, 14 June 2014

भूल कर भी क्यों नहीं काटना चाहिये शनिवार, मंगलवार और गुरुवार के दिन बाल और नाखून

 भूल कर भी क्यों नहीं काटना चाहिये 
 शनिवार, मंगलवार और गुरुवार के दिन बाल और नाखून 
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हिंदुत्व की अधिकतर परंपराओं और रीति-रिवाजों के पीछे एक सुनिश्वित 
वैज्ञानिक कारण होता है। आज भी हम घर के बड़े और बुजुर्गों को यह कहते 
हुए सुनते हैं कि, शनिवार, मंगलवार और गुरुवार के दिन बाल और नाखून 
भूल कर भी नहीं काटना चाहिये।.....पर आखिर ऐसा क्या कारण है ?
जब हम अंतरिक्ष विज्ञान और ज्योतिष की प्राचीन और प्रामाणिक पुस्तकों 
का अध्ययन करते तो इन प्रश्रों का बड़ा ही स्पष्ट वैज्ञानिक समाधान प्राप्त 
होता है। वह यह कि शनिवार, मंगलवार और गुरुवार के दिन ग्रह-नक्षत्रों की 
दशाएं तथा अंनत ब्रह्माण्ड में से आने वाली अनेकानेक सूक्ष्मातिसूक्ष्म किरणें 
मानवीय मस्तिष्क पर अत्यंत संवेदनशील प्रभाव डालती हैं।
यह भी स्पष्ट है कि इंसानी शरीर में उंगलियों के अग्र भाग तथा सिर अत्यंत 
संवेदनशील होते हैं। कठोर नाखूनों और बालों से इनकी सुरक्षा होती है। इसी
-लिये ऐसे प्रतिकूल समय में इनका काटना शास्त्रों के अनुसार वर्जित, निंदनीय 
और अधार्मिक कार्य माना गया है।

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